NDA जीती, पर जीत में रह गई कसक, क्या यूट्यूबर ध्रुव राठी ने बीजेपी का गेम बिगाड़ने में निभाया अहम रोल?
Indian Youtuber Dhruv Rathee: लोकसभा चुनाव के नतीजे साफ हो चुके हैं। एनडीए को बहुमत मिली है जबकि विपक्षी गठबंधन इंडी बहुमत से काफी पीछे रह गई। हालांकि, विपक्ष ने गठबंधन के तौर पर और साथ ही साथ कांग्रेस ने व्यक्तिगत तौर पर भी पिछले लोकसभा चुनाव से बेहतर प्रदर्शन किया है।
एनडीए को बहुमत तो मिल गई है पर जाहिर तौर पर नतीजे मनमुताबिक नहीं आए हैं। अकेली बीजेपी बहुमत से काफी सीटें पीछे रह गई है। एग्जिट पोल भी इस बार गलत साबित हुए हैं। इस अप्रत्यासित चुनावी परिणाम के पीछे और विपक्ष के बेहतर प्रदर्शन का कुछ प्रतिशत श्रेय यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी दिया जा रहा है।
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हालांकि, यूट्यूबर ध्रुव राठी कई बार ये दावा कर चुके हैं कि वो किसी पार्टी से जुड़े हुए नहीं हैं, ना ही वो किसी पार्टी के पक्ष या विरोध में वीडियो बनाते हैं। उनका कहना है कि वो केवल फैक्ट पर बातें करते हैं और उसी पर वीडियो बनाते हैं।
पिछले चुनावों में, भाजपा सोशल मीडिया पर हावी थी, लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 में, यूट्यूबर्स ने स्क्रिप्ट को पलट दिया। कहा जा रहा है कि इन यूट्यूबर्स ने भाजपा से लाइमलाइट चुरा ली और कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडी गठबंधन के प्रभाव को बढ़ा दिया।
इन स्वतंत्र आवाजों ने ध्यान खींचा और यहां तक कि द इकोनॉमिस्ट जैसे वैश्विक प्रकाशनों में भी सुर्खियां बटोरीं। भारत में 476 मिलियन यूट्यूब (YouTube) दर्शकों के साथ, प्रभाव निर्विवाद था।
ध्रुव राठी के वीडियो, जो केंद्र सरकार की नीतियों उनके फैसलों को केंद्र में रख कर बनाए जाते हैं। उनमें सरकार की कमियां, नेताओं के भाषणों में बोले गए झूओठ से लेकर चुनावी वादे और बाद में उनको केंद्र द्वारा नजरअंदाज करना शामिल होता है।
सत्ता पक्ष लगातार ये आरोप लगाती रही है कि विपक्षी दलों द्वारा फंडिंग मिलने की वजह से वो सरकार की कमियों और पीएम मोदी के ऊपर वीडियो बनाते हैं, लेकिन यूट्यूबर का कहना है कि वो केवल सरकार की कमियां दिखा रहे हैं और डेमोक्रेसी में ऐसा होना जरुरी है।
इस लोकसभा चुनाव के दौरान लगभग घर-घर में लोग ध्रुव राठी का नाम जान चुके हैं। उनके वीडियो पर आने वाले मिलियन-मिलियन व्यूज इस बात का गवाह हैं कि लोग उनकी बातों से इत्तेफाक भी रखते हैं। ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा की लोकसभा चुनाव में हुए सीटों के नुकसान में ध्रुव राठी का भी अहम रोल रहा है।
सोशल मीडिया के इस जमाने में जहां हर किसी के हाथों में स्मार्ट फोन है वैसे में यूट्यूबर जनता पर अच्छा खासा प्रभाव डालते हैं। बीजेपी का 240 सीटों पर सिमटना और गठबंधन का 300 सीटों का आंकड़ा पार ना करना भी इन प्रभावों का एक असर हो सकता है।
'मोदी: द रियल स्टोरी' को मिले 27 मिलीयन व्यूज
इस चुनाव में यूट्यूबर ध्रुव राठी थे के वीडियो "मोदी: द रियल स्टोरी" को 27 मिलियन बार देखा गया जो कि काफी प्रभावशाली है। मीडिया टिप्पणीकार सेवंती निनान द्वारा "बड़ी नई घटना" के रूप में वर्णित, राठी जैसे यूट्यूबर्स अपनी जानकारीपूर्ण और आकर्षक कहानी कहने की शैली में तर्क, तथ्य-जांच, सवाल पूछने और महत्वपूर्ण संदर्भ प्रदान करने की आवाज बन गए हैं।
मीडिया टिप्पणीकार माधवन नारायणन के अनुसार, इन यूट्यूबर्स ने शिक्षित युवाओं और मध्यम वर्ग के साथ जुड़कर मुख्यधारा मीडिया द्वारा छोड़े गए शून्य को भर दिया है। उनके जुनून, अनौपचारिकता और ज्ञान-संचालित सामग्री ने राय और मीडिया उपभोग की आदतों को नया आकार दिया है।
जबकि राष्ट्रीय टीवी एक विशिष्ट दर्शकों की जरुरत को पूरा करता है। इनफार्मेशन का एक बड़ा गैप है जिसे यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म आसानी से भर देते हैं। मीडिया टिप्पणीकार वनिता कोहली-खांडेकर का कहना है कि व्हाट्सएप, फेसबुक और विभिन्न लघु वीडियो ऐप्स के उदय के साथ, लोग अपनी आवाज ढूंढ रहे हैं और महत्वपूर्ण ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
राजनेताओं ने भी पारंपरिक मीडिया को दरकिनार करते हुए मतदाताओं तक सीधे पहुंचने में यूट्यूब चैनलों के प्रभाव को पहचाना है। जैसा कि निनान कहते हैं, सत्ता परिवर्तन हो रहा है, मीडिया परिदृश्य में व्यक्तियों का प्रभाव अधिक हो रहा है।
इन डिजिटल प्लेटफार्मों के प्रभाव पर सरकार का ध्यान भी गया, जिसके कारण ब्रॉडकास्ट सर्विसेज (रेगुलेशन) बिल जैसे प्रस्तावित नियम सामने आए, जिसका उद्देश्य ओटीटी चैनलों को इसके दायरे में लाना है।
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