Lok Sabha Chunav: कैडर वाली बीजेपी पर कैसे हुआ 'बाहरी' उम्मीदवारों का कब्जा? लिस्ट में यूपी सबसे आगे
Lok Sabha Election: भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से कैडर आधारित और संगठन पर निर्भर पार्टी है। पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहती है। लेकिन, पिछले कुछ वर्षों में इसके काम करने के तरीके में काफी बदलाव आया है। इस बदलाव का असर इस बार पार्टी के उम्मीदवारों पर भी दिख रहा है।
बीजेपी ने इस बार देशभर में जितने भी उम्मीदवारों को टिकट दिया है, उनमें से करीब एक-चौथाई या 24% दूसरे दलों से आए नेता हैं। उनका भाजपा के संगठन या उसके वैचारिक संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से कोई लेना-देना नहीं रहा है।

बीजेपी के 90 प्रत्याशियों ने बीते 5 साल में ज्वाइन की है पार्टी
इस बार बीजेपी ने देशभर में जिन 435 उम्मीदवारों को उतारा है,उनमें से 106 पिछले 10 वर्षों में पार्टी में शामिल हुए हैं। लेकिन, इनमें 90 उम्मीदवारों ने तो बीते 5 वर्षों में ही पार्टी ज्वाइन की है। भाजपा जैसी पार्टी के लिए यह बहुत ही अलग ट्रेंड है और कई जगहों पर इसकी वजह से पार्टी को अपने ही कार्यकर्ताओं के ही विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
आंध्र प्रदेश में 83% बीजेपी उम्मीदवार 'बाहरी'
कुछ राज्य तो ऐसे हैं, जहां भाजपा पूरी तरह से आयातित उम्मीदवारों के ही भरोसे रह गई है। मसलन, आंध्र प्रदेश में बीजेपी ने 6 उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं, उनमें से पांच 2019 के बाद भाजपा में शामिल हुए हैं। दिलचस्प बात ये है कि ये नेता सिर्फ वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस से ही नहीं, टीडीपी छोड़कर भी भाजपा में शामिल हुए हैं, जिसके साथ अब पार्टी का गठबंधन है।
तेलंगाना में 65% 'बाहरियों' पर भरोसा
इसी तरह से तेलंगाना में 17 में से बीजेपी के 11 उम्मीदवार कांग्रेस या बीआरएस छोड़कर आए हैं और इनमें से भी 6 इस चुनावों से ठीक पहले आए हैं।
हरियाणा में भाजपा के 60% उम्मीदवार पहले दूसरे दलों में थे
आंध्र और तेलंगाना में बीजेपी अभी विस्तार की कोशिशों में ही लगी हुई है। लेकिन, हरियाणा में तो वह 10 साल से सत्ता में है। वहां पार्टी के 10 उम्मीदवारों में से 6 ऐसे हैं, जिनकी एंट्री 2014 के बाद हुई है। नवीन जिंदल और अशोक तंवर जैसे लोग तो इस साल पार्टी में आए और टकट भी मिल गया।
यूपी में भी भाजपा को करना पड़ा है 23 'बाहरी' उम्मीदवारों पर भरोसा
इसी तरह से पंजाब में 13 में से आधे से ज्यादा (7) उम्मीदवार दूसरे दलों से आए हैं। झारखंड में भी (7) यही स्थिति है। यहां सबसे हाई-प्रोफाइल एंट्री सीता सोरेन की है, जो पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की भाभी और शिबू सोरेन की बहू हैं। लेकिन, सबसे चौंकाने वाली स्थिति उत्तर प्रदेश की है। यहां की 80 सीटों में से बीजेपी के 74 प्रत्याशियों में से 23 या 31% दूसरी पार्टियों से आए हुए हैं।
गुजरात में भी बीजेपी को दूसरे दलों से आए नेताओ पर करना पड़ा है भरोसा
इसी तरह से ओडिशा में 6, तमिलनाडु में 5, महाराष्ट्र में 7, पश्चिम बंगाल में 10, बिहार में 3, कर्नाटक में 4, केरल में 2, राजस्थान में 2, गुजरात में 2, मध्य प्रदेश में 2 और अन्य राज्य में 4 प्रत्याशियों की जड़ें पहले दूसरी पार्टियों में रह चुकी हैं।
गुजरात की राजनीति पर जिस तरह से बीजेपी हावी हो चुकी है, वहां अगर एक भी प्रत्याशी का राजनीतिक बैकग्राउंड अलग है, तो यह निश्चित रूप से पार्टी के कार्य करने के तरीके में हुए बहुत बड़े परिवर्तन का संकेत है।
दूसरे दलों से आए वे बड़े दिग्गज, जिन्हें भाजपा ने बनाया उम्मीदवार
अगर दूसरे दलों से भाजपा में आकर चुनाव लड़ रहे कुछ बड़े नामों की चर्चा करें तो इनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद, नवीन जिंदल, अशोक तंवर, परनीत कौर, सीता सोरेन, किरण कुमार रेड्डी जैसे नेताओं का नाम लिया जा सकता है।












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