Lok Sabha Chunav 2024: क्या कोयंबटूर में इस बार BJP जीतेगी, अन्नामलाई को क्यों पसंद कर रहे हैं वोटर?
Lok Sabha Election 2024: तमिलनाडु के कोयंबटूर में इस बार इंडिया ब्लॉक की अगुवा डीएमके या विपक्षी एआईएडीएमके के लिए चुनाव आसान नहीं रहने वाला है। यहां भाजपा ने अपने प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई को उतारकर संघर्ष को बहुत ही कड़े मुकाबले में बदल दिया है। एक लाइन में तथ्य यह है कि अन्नामलाई की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
कोयंबटूर लोकसभा सीट की अहमियत इसी बात से समझी जा सकती है कि सत्ताधारी डीएमके ने यहां सीपीएम से वर्षों पुराना अपना समझौता तोड़कर अपना उम्मीदवार उतारा है। वहीं एआईएडीएमके ने अपने आईटी विंग के चीफ को टिकट दिया है।

अन्नामलाई से मुकाबला, डीएमके ने सीपीएम से वापस ली सीट
2019 में यहां पर डीएमके के समर्थन से सीपीएम को 45.66% वोट मिले थे। वहीं भाजपा के सीपी राधाकृष्णन 31.34% के साथ दूसरे नंबर पर रहे थे। अन्नामलाई की उम्मीदवारी को देखते हुए डीएमके ने यहां से गणपति पी राजकुमार को उतारा है। वे कोयंबटूर के पूर्व मेयर हैं और 2020 में ही अन्नाद्रमुक छोड़कर आए हैं। एआईएडीएमके ने यहां से सिंगाई रामचंद्रन को टिकट दिया है।
बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को लेकर सभी दल चौकन्ना
कोयंबटूर एक औद्योगिक शहर है और यह दक्षिण भारत के मैनचेस्टर के नाम से भी प्रसिद्ध है। चुनाव से पहले यह सीट इस बार काफी हाई-प्रोफाइल हो चुकी है। भाजपा ने इस यहां पर पूरा जोर लगा रखा है। बुधवार को फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां आए थे। भाजपा की चुनावी सक्रियता ने डीएमके और एआईएडीएमके दोनों को चौकन्ना कर दिया है।
डीएमके उम्मीदवार के समर्थन में शुक्रवार को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी यहां इंडिया ब्लॉक की संयुक्त रैली करने वाले हैं। तमिलनाडु देश का एक ऐसा राज्य है, जहां के वोटर निर्णायक मतदान के लिए जाने जाते हैं। यहां किसी भी पार्टी के पक्ष में एकतरफा चुनाव परिणाम आने की एक परंपरा सी नजर आती है।
खराब कानून-व्यवस्था बढ़ा रही है डीएमके की टेंशन
तमिलनाडु में डीएमके सत्ता में है, लिहाजा उसे एंटी-इंकंबेंसी का भी सीधे मुकाबला करना पड़ रहा है। मसलन, 46 वर्षीय एस भास्करन ने टीओआई से बातचीत में बढ़ते अपराध और युवाओं में ड्रग्स की बढ़ती लत को लेकर अपनी गंभीर चिंता जताई है।
एआईएडीएमके में हर कोई नहीं देख रहा विकल्प
वे कहते हैं, 'हत्या, चोरी, पॉकेटमारी और अन्य अपराध पिछले कुछ वर्षों में बहुत ही ज्यादा बढ़ गए हैं।' उनके मुताबिक डीएमके सरकार इसे रोकने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं कर रही है। कई अन्य लोग भी कानून और व्यवस्था को लेकर चिंता जता रहे हैं, लेकिन अबकी बार विकल्प के रूप में सबको एआईएडीएमके नजर नहीं आ रही है।
'मुझे अन्नामलाई पसंद हैं'
जैसे कंस्ट्रक्शन के कारोबार से जुड़े 41 वर्षीय आर मणिकंदन को बीजेपी एक बेहतर विकल्प नजर आ रही है। वे कहते हैं, 'मैंने पिछली बार डीएमके को वोट दिया था, लेकिन इस बार मैं बीजेपी को वोट दूंगा, क्योंकि मैं बदलाव चाहता हूं और मुझे अन्नामलाई पसंद हैं।' वे कहते हैं, 'मैं देखता हूं कि पिछले तीन वर्षों से कोयंबटूर में अपराध बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं और मुझे उम्मीद है कि अन्नामलाई उसे रोकने में काफी मददगार साबित होंगे।'
डीएमके के साथ अभी भी जुड़ा है वफादार वोटर
हालांकि, डीएमके को हराना इतना आसान भी नहीं है। उसका अपना एक समर्पित वोट बैंक है। जैसे 65 वर्षीय मुतम्मा डीएमके की ओर से घोषित लाभ से वंचित हैं, जिसके तहत परिवार की मुख्य महिला को 1,000 रुपए दिए जाते हैं, लेकिन वह कहती हैं कि उनका वोट डीएमके को ही जाएगा, क्योंकि वह दिवंगत एम करुणानिधि के प्रति वफादार रहना चाहती हैं।
इसी तरह से एक कपड़े के स्टोर में काम करने वाली 35 वर्षीय वोटर पी पूंगोताई कहती हैं कि उन्हें उम्मीद है कि डीएमके ने जो वादा किया था, वह इस बार पूरा करेगी।
कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए अन्नामलाई को फिट मान रहे हैं लोग
लेकिन, 49 साल के बिजनेसमैन प्रतिभन के को अन्नामलाई की सकारात्मक अपील आकर्षित कर रही है और वे इस बार द्रविड़ पार्टियों को छोड़कर 'कमल' निशान को एक मौका देना चाहते हैं। वे कहते हैं, 'कानून को सही दिशा में ले जाने वाला हमें एआईएडीएमके में कोई सही उम्मीदवार नहीं दिखाई देता।' उनके मुताबिक, 'अन्नामलाई को इससे समझदारी से निपटने का अनुभव और शिक्षा मिली है।'
अन्नामलाई को 60% वोट मिलने का अनुमान
ऐसा भी दिख रहा है कि डीएमके को हिंदू-विरोधी होने के रूप में पेश करने और सनातन का मुद्दा उठाने से भाजपा को फायदा मिल रहा है। अन्नामलाई इस सीट पर बीजेपी को 60% वोट मिलने का अनुमान जता रहे हैं। 2014 में एआईएडीएमके ने 36.69% वोट लेकर यह सीट जीती थी, जबकि बीजेपी को 33.12% वोट मिले थे।












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