यूरोप की तरह भारत में दोबारा बढ़ सकते हैं कोरोना के मामले, ये कारण होंगे जिम्मेदार

यूरोप और मध्य एशिया की तरह भारत में भी कोरोना वायरस के मामले एक बार फिर से बढ़ सकते हैं, इसकी कुछ प्रमुख वजहें सामने आई हैं।

नई दिल्ली, 13 नवंबर। एक तरफ जहां तमाम राज्यों के पास कोरोना वायरस की अप्रयुक्त वैक्सीनों का स्टॉक बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार द्वारा अगले महीने तक सभी व्यस्कों को कोरोना की डोल लगाने की डेडलाइन भी नजदीक आती जा रही है। भारत में कोरोना वायरस टीकाकरण अभियान को शुरू होने के 300 दिन के बाद भी यहां की 80 प्रतिशत पात्र आबादी को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज दी गई है, जबकि 40 प्रतिशत से भी कम पात्र लोगों को कोरोना के दोनों टीके लगाए गए हैं। यूरोप और मध्य एशिया में भी टीकाकरण की स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं है और यही वजह है कि यहां कोरोना की एक नई लहर देखी जा सकती है। यहां कोरोना के मामले एक बार फिर से बढ़ने लगे हैं।

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लोगों की लापरवाही बन सकती है कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यूरोप और मध्य एशिया का हर एक देश कोरोना के पुनरुत्थान के वास्तिवक खतरे का सामना कर रहा है, या इससे पहले से ही लड़ रहा है। WHO ने अपर्याप्त टीकाकरण कवरेज और सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक उपायों में छूट को इसका कारण बताया। वहीं भारत में टीकाकरण तो बेहतर रह है लेकिन लोग सोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन नहीं कर रहे हैं, जो भारत में कोरोना के दोबारा से उभार की बड़ी वजह बन सकता है।

धीमी हुई टीकाकरण की रफ्तार
शुक्रवार को भारत के टीकाकरण अभियान का 301वां दिन था और अब तक देश में 111 करोड़ से अधिक डोज दी जा चुकी हैं। भारत में अगस्त और सितंबर में टीकाकरण की रफ्तार तेज थी, लेकिन अक्टूबर के बाद से इसमें गिरावट आई है। कोरोना पर काबू पाने के लिए हमें अपनी टीकाकरण की रफ्तार को और बढ़ाने की जरूरत है।

भारत में 16 जनवरी से शुरू हुआ था टीकाकरण
भारत में टीकाकरण अभियान की शुरुआत 16 जनवरी से हुई थी, शुरुआत में टीकों की कमी और अन्य कारणों के कारण इसकी रफ्तार धीमी रही, लेकिन जून के बाद इसने तेजी पकड़ी और केवल जून में ही 12 करोड़ डोज लगा दी गईं। वहीं जुलाई में यह आंकड़ा 13.45 करोड़ के पार पहुंच गया। अगस्त में 18.38 करोड़, सितंबर में 23.60 करोड़ और अक्टूबर में 17.29 करोड़ वैक्सीन की डोज दी गईं। अकेले अगस्त और सितंबर में 40 प्रतिशत लोगों का टीकाकरण हुआ। इन्हीं महीनों में कोरोना की तीसरी लहर की संभावना जताई जा रही थी।

राज्य नहीं लगा पा रहे वैक्सीन
हालांकि पिछले कुछ हफ्तों में कोरोना के केसों में भारी कमी आई है। लेकिन अब यूरोप और मध्य एशिया की तरह भारत में एक बार फिर से कोरोना के केसों में वृद्धि की संभावना बन सकती है, क्योंकि राज्यों के पास अप्रयुक्त वैक्सीनों का भारी स्टॉक पड़ा हुआ है, त्योहारों के कारण टीकाकरण अभियान प्रभावित हुआ है, इसके अलावा लोग कोरोना को लेकर लापरवाह दिख रहे हैं। सरकार ने अब तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 121 करोड़ डोज दी हैं। शुक्रवार तक राज्यों के पास 18.04 करोड़ अप्रयुक्त वैक्सीन थीं।

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लोगों को घर-घर जाकर टीका लगाया जाए- पीएम मोदी
इस महीने की शुरुआत में पीएम मोदी ने सभी जिलों के साथ टीकाकरण कवरेज में कमी को लेकर बैठक की थी। मीटिंग में उन सभी जिलों के अधिकारी उपस्थित हुए जहां 50 प्रतिशत से कम टीकाकरण हुआ है, और कोरोना की दूसरी डोज बेहद कम लोगों को लगी है। पीएम मोदी ने झारखंड, मणीपुर, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और मेघालय के 40 जिलों के जिलाधिकारियों के साथ बैठक की थी। पीएम मोदी ने बैठक में जिलाधिकारियों से घर घर जाकर लोगों का टीकाकरण करने का निर्देश दिया। दुनिया में कोरोना के मामले एक बार फिर से बढ़ रहे हैं, लोगों को समझना चाहिए कि जब तक प्रत्येक व्यक्ति का टीकाकरण नहीं हो जाता हमें इसको लेकर पूरी सावधानी बरतनी है। इस घातक संक्रमण से बचने के लिए टीकाकरण ही सबसे कारगर उपाय है।

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