लेह के 3 रूट कौन हैं, जो इस साल रिकॉर्ड समय में खुल गए, सेना और स्थानीय लोगों को होगी आसानी
लद्दाख में पिछले कुछ वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर करने पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया गया है। नतीजे नजर आने लगे हैं। लेह जाने वाली तीनों सड़कें इस साल समय से काफी पहले खुल चुकी हैं।

लेह-लद्दाख देश का ऐसा हिस्सा है, जो पहले सर्दियों में बर्फ की वजह से महीनों तक देश से सड़क मार्ग से कट जाता था। हवाई मार्ग ही विकल्प बचता था। लेकिन, बीआरओं की बढ़ती क्षमता और बेहतर हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते पिछले कुछ वर्षों में इस इलाके के दिन भी फिर गए हैं। लेह तक जाने वाली जो सड़कें आराम से साल के तीन-चार महीने बंद रहती थीं, अब गिनती के दिन ही वहां का रास्ता रोकना पड़ रहा है। क्योंकि, सड़कें जल्दी ही यातायात के लिए बहाल की जा रही हैं। इस बार तो बीआरओ ने लेह जाने वाले तीन रूट को रिकॉर्ड समय पर खोल दिया है।
Recommended Video

लेह जाने वाली तीनों सड़कें इस सार रिकॉर्ड समय पर खुल गईं
सीमा सड़क संगठन ने लेह जाने वाले तीनों रास्तों को इस साल रिकॉर्ड समय पर खोलने में सफलता हासिल की है। जो सड़कें पहले सर्दी के दिनों में बर्फ जमे होने की वजह से महीनों तक बंद रहती थीं, इस बार महीनों पहले चालू कर दी गई हैं। 439 किलोमीटर लंबा श्रीनगर रूट सिर्फ 68 दिन बंद रहने के बाद इस साल 16 मार्च को ही खोल दिया गया है। जबकि, पहले श्रीनगर से 100 किलोमीटर दूर 11,540 फीट की ऊंचाई पर स्थित जोजिला दर्रा महीनों तक यातायात के लिए नहीं खुल पाता था। इस साल पहले यह दर्रा 6 जनवरी तक खुला हुआ था।

मनाली-लेह मार्ग भी खुला
इसी तरह अटल टनल से गुजरने वाली 427 किलोमीटर लंबी मनाली-लेह सड़क इसी शनिवार को खोल दिया गया है। पहले मई-जून से पहले इसपर यातायात शुरू करना असंभव होता था। इस साल यह रूट 138 ही दिन बंद रहा। वहीं निम्मू-पदम दार्चा (NPD) रोड पर 16,561 फीट की ऊंचाई पर स्थित शिंकुला दर्रा भी 55 दिनों बाद इस साल गुरुवार को खोल दिया गया। इस सड़क को लद्दाख तक पहुंचने के लिए तीसरे मार्ग के तौर पर विकसित किया जा रहा है, जिसकी अभी ब्लैक टॉपिंग भी नहीं हुई है।

सैनिकों से लेकर नागरिकों तक का जीवन हुआ आसान
गलवान घाटी में 2020 के जून महीने में चीन के सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प की घटना के बाद लद्दाख में सैनिकों की ज्यादा संख्या में तैनाती को देखते हुए, उनके लिए यह बहुत ही राहत वाली बात है। क्योंकि, अब उन्हें बंद रास्तों की वजह से 3-4 महीने तक वहीं घिरे रहने के बजाए, जल्द रोटेशन का लाभ मिल सकता है। इसकी वजह से सस्ती सप्लाई का भी रास्ता खुल गया है, क्योंकि पहले हवाई मार्ग ही रास्ता बचता था। आम लद्दाखियों के साथ-साथ वहां काम के सिलसिले में जाने वाले देश के दूसरे राज्यों के कामगारों के लिए भी यह फायदे का सौदा है। क्योंकि, पहले बर्फबारी के चलते सड़क संपर्क महीनों तक टूटा रहता था और हवाई मार्ग का ही विकल्प बचता था।

अब दो सुरंगों को तैयार करने पर फोकस
बर्फ से महीनों तक बंद रहने वाले रास्तों को अब समय से पहले खोलना संभव हुआ है तो बीआरओ की वजह से। मुश्किल से मुश्किल क्षेत्र में भी अब इसने जल्द बर्फ हटाने की क्षमता विकसित कर ली है। इसने सरकार का भी हौसला बढ़ाया है, जो अब दो सुरंगों को जल्द तैयार करने पर ध्यान दे रही है। पहला जोजिला के नीचे, जो कि जल्दी ही तैयार होने वाला है और दूसरी शिंकुला। इससे लद्दाख तक हर मौसम पहुंच सुलभ हो जाएगी। ऐसा होने पर सेना को बेहतर तरीके से तैयार रहने का भी मौका मिलेगा और क्षेत्र के लोगों का जीवन भी आसान बनेगा।

कई जोखिम वाले रास्तों से भी मिलेगा छुटकारा
शिंकुला सुरंग बनने से वाहनों को चार चोटियों से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी और न ही एवलांच-संभावित पतले रास्तों से गुजरने की मजबूरी रहेगी। सर्दियों के दिनों में मनाली-लेह मार्ग पर जब तेज सर्द हवाएं चलती हैं, तो वहां से गुजरना काफी कठिन होता है। लेकिन, नई सुरंग तैयार होने के साथ यह सारी परेशानी दूर होने की उम्मीद है। (कुछ तस्वीरें-फाइल)












Click it and Unblock the Notifications