5 राज्यों में हुई हार पर गडकरी का बड़ा बयान, कहा- विफलता की जिम्मेदारी भी पार्टी नेतृत्व ले
पुणे। एक बार फिर से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अपने एक बयान की वजह से सुर्खियों में हैं, पुणे जिला शहरी सहकारी बैंक असोसिएशन लिमिटेड द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि 'नेतृत्व' को 'हार और विफलताओं' की भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए, सफलता के कई दावेदार होते हैं लेकिन विफलता में कोई साथ नहीं होता. सफलता का श्रेय लेने के लिये लोगों में होड़ रहती है लेकिन विफलता को कोई स्वीकार नहीं करना चाहता, सब दूसरे की तरफ उंगली दिखाने लगते हैं और आपस में दोषा रोपण करने लगते हैं, जो कि सही नहीं है।

'विफलता की जिम्मेदारी भी पार्टी नेतृत्व ले'
अपनी बात को स्पष्ट करते हुए गडकरी ने कहा कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद प्रत्याशी मिलने पर बहाना बनाते हैं, कहते हैं कि पोस्टर नहीं मिला, पार्टी से पैसा मांग रहा था तो नहीं दिया, बड़े नेता की सभा मांगी थी तो वो भी नहीं हुई, कैंसिल कर दी. इस प्रकार सारा वातावरण खराब कर दिया और इन सब कारणों की वजह से हार हुई है, जबकि उन्हें हार स्वीकार करनी चाहिए और अपनी गलती माननी चाहिए लेकिन ऐसा आम तौर पर नहीं होता है।

बहुत कुछ कहता है गडकरी का बयान!
गडकरी ने कहा कि हार का क्रेडिट लेने की हिम्मत नेतृत्व में होनी चाहिए और जब तक नेतृत्व हार का क्रेडिट खुद के कंधों पर नहीं लेगा तब तक संस्था के प्रति उनकी लॉयल्टी और कटिबद्धता सिद्ध नहीं होगी, वैसे गडकरी का ये बयान काफी बातों की ओर इशारा करता है, आपको बता दें कि हाल ही में तीन बड़े राज्यों में भाजपा हारी है, ऐसे में हार की जिम्मेदारी हालांकि राज्य के ही शीर्ष नेताओं ने ली है लेकिन जब कहीं भाजपा जीतती है तो पार्टी की जीत का क्रेडिट पीएम मोदी और अमित शाह को दिया जाता है लेकिन हारने पर विपक्ष को छोड़कर भाजपा के किसी भी नेता ने नहीं कहा कि ये मोदी या अमित शाह की हार है।

दबी जुबान से गडकरी ने पार्टी के आलाकमानों को जिम्मेदार ठहराया?
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि अपनी बेबाकी के लिए मशहूर गडकरी के इस बयान का यही अर्थ हैं, उन्होंने खुलकर तो नहीं लेकिन दबी जुबान से ही भाजपा के लिए पार्टी के आलाकमानों को जिम्मेदार ठहराया है, वैसे भी गडकरी के हालिया बयानों पर नजर डालें तो आप पाएंगे कि वो लगातार पार्टी के शीर्ष कमान पर हमले कर रहे हैं, हाल ही में उन्होंने कहा था कि सपने दिखाने वाले लोगों को अच्छे लगते हैं, पर दिखाए हुए सपने पूरे नहीं होते हैं तो उन नेताओं की लोग पिटाई भी करते हैं।
यह भी पढ़ें: अनुपम खेर का नसीरुद्दीन शाह पर निशाना, पूछा- और कितनी आजादी चाहिए आपको?












Click it and Unblock the Notifications