विचाराधीन कैदियों के लिए दिखा पीएम मोदी का दर्द, बोले - उनके बारे में सहानुभूति के साथ सोचिए
law ministers conference:भारत की न्यायालयों में लाखों की संख्या में लंबित केसों के कारण लोगों को न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। वहीं सबसे बुरी हालत जेल में बंद विचारधीन कैदियों की होती है उनके केस पर लंबे- लंबे अंतराल के बाद कोर्ट में सुनवाई होने के कारण कई बार सालों सलाखों के पीछे इंतजार करना पड़ता है। इन विचाराधीन कैदियों के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दर्द भी कानून मंत्रियों के सम्मेलन में शनिवार को साफ नजर आया।

कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्वरित ट्रायल पर विचार-मंथन करने का आग्रह करते हुए कहा कानूनी व्यवस्था को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और विचाराधीन कैदियों के बारे में सहानुभूति के साथ सोचना चाहिए।
अनावश्यक कानूनों को हटाने की पैरवी की
पीएम मोदी ने अप्रचलित कानूनों और फॉस्ट ट्रायल को दूर करने के लिए कानूनी प्रणाली के निरंतर सुधार पर जोर दिया। उन्होंने अनावश्यक कानूनों को हटाने की पैरवी करते हुए जानकारी दी कि उनकी सरकार ने पिछले आठ वर्षों में अथक प्रयास किया और जीवन की सुगमता में सुधार के लिए 32,000 अनुपालनों (compliances) को हटा दिया गया है।
अनावश्यक कानून की समीक्षा करने की दी सलाह
प्रधानमंत्री ने बताया कि कई स्वतंत्रता के पूर्व के कई अनावश्यक कानून आज भी कई राज्यों में हैं। पीएम मोदी ने ऐसे कानूनों की समीक्षा करने और जीवन में आसानी और न्याय की आसानी सुनिश्चित करने का सम्मेलन में आग्रह किया। उन्होंने कहा न्याय में देरी चुनौतियों में से एक है और इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जा रहा है।
गुजरात की शाम की अदालतों ने न्यायपालिका का भार उठाया है
पीएम मोदी ने गुजरात में शाम की अदालतों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उन सायंकालीनी अदालतों ने न्यायपालिका का कैसे भार उठाया है ।
कोई कानून बने ये भी तय हो कि वो कानून कब तक लागू रहेगा
इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा कानून बनाते समय ये ध्यान रखना चाहिए कि वो सरल भाषा में हो ताकि लोग कानूनों को समझ सकें। इसके साथ राज्य के कानून में स्थानीय भाषा के महत्व को जोड़ने की भी सलाह दी। पीएम मोदी ने कहा कुछ देशों में ये नियम है कि जब कोई कानून बन रहा है तो यह भी तय होता है कि कानून कब तक लागू रहेगा । हमें अपने देश में भी इस दिशा में भी काम करना चाहिए।












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