जिस बंगले में 31 साल रहे रामविलास पासवान, अब चिराग को मिला वो खाली करने का फरमान
नई दिल्ली, 17 अगस्त। पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के निधन के बाद उनके लिए आवंटित सरकारी बंगले को अब केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को आवंटित कर दिया गया है। यह बंगला दिल्ली के 12 जनपथ रोड़ पर स्थित है, जिसमे फिलहाल राम विलास पासवान के बेटे चिराग पासवान अपनी पत्नी व बेटे के साथ रह रहे हैं। चिराग पासवान लोक जनशक्ति पार्टी के लोकसभा सांसद हैं। इसी बंगले में लोजपा की तमाम बैठके होती थीं और लोजपा का आधिकारिक पता भी यही बंगला था। लेकिन अब इस बंगले को रेल मंत्री को आवंटित कर दिया गया है।
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31 साल रहे रामविलास पासवान
जिस बंगले को अश्विनी वैष्णव को आवंटित किया गया है उसमे राम विलास पासवान 31 साल से रह रहे थे। राम विलास पासवान को यह बंगला 1989 में आवंटित किया गया था लेकिन अक्टूबर 2020 में राम विलास पासवान के निधन के बाद अब इस बंगले को रेल मंत्री को आवंटित कर दिया गया है। यानि चिराग पासवान को अपने परिवार के साथ इस बंगले को अब खाली करना होगा।

14 जुलाई को मिला नोटिस
सूत्रों के अनुसार केद्रीय आवास और शहरी मंत्रालय ने चिराग पासवान को बंगला खाली करने के लिए नोटिस भी भेज दिया है। चिराग पासवान को बंगला खाली करने का नोटिस 14 जुलाई को मंत्रालय की ओर से भेजा गया है। रिपोर्ट के अनुसार चिराग पासवान ने बंगला खाली करने के लिए कुछ और दिनों का समय मांगा है। उन्होंने अपील की है कि अक्टूबर 2021 में उनके पिता की पहली पुण्यतिथि होगी, तबतक इस बंगले को खाली नहीं कराया जाए।

पशुपति पारस को बंगले का मिला था प्रस्ताव
चिराग पासवान के चाचा और राम विलास पासवान के भाई पशुपति पारस जिन्हें मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री बनाया गया है उन्हें पहले इस बंगले को लेने का प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन उन्होंने यह बंगला लेने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि इससे गलत संदेश जाएगा। जिसके बाद पशुपति पारस को पूर्व सांसद शरद यादव का बंगला आवंटित किया गया है। यह बंगाल 7 तुगलक रोड लुटियंस में है।

पार्टी में दो फाड़ के बाद चाचा ने अलग की राह
गौर करने वाली बात है कि पशुपति पारस ने लोक जनशक्ति पार्टी के चार अन्य सांसदों के साथ मिलकर पार्टी से अलग होने का फैसला लिया और चिराग पासवान से राह अलग कर ली। जिसके बाद उन्होंने चिराग पासवान को लोकसभा में पार्टी के नेता के पद से हटा दिया खुद अपने सांसदों के गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए।












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