जब लता मंगेशकर की वजह से पाकिस्तानियों ने अपने मुल्क में उठाई कश्मीर की जिद छोड़ने की मांग
नई दिल्ली, 6 फरवरी: भारत और पाकिस्तान कभी भी किसी बात पर सहमत नहीं होते। लेकिन, लता मंगेशकर की आवाज में ऐसा असर था, जिसपर दोनों दुश्मन मुल्क भी एक ही सुर में बोलते थे। इसलिए जब लताजी आज हमारे बीच नहीं हैं तो सवा सौ करोड़ भारतीयों की आंखें नम हैं तो पाकिस्तान में भी मातम पसरा है। उस महान गायिका के सुर में इतनी ताकत थी कि परमाणु बमों की धमकी देने वाले देश की आवाज भी मंद पर जाती थी। यह कोई एक दिन की बात नहीं है। जब से देश का बंटवारा हुआ है, लताजी के गाने भारतीयों को सुकून देते थे, तो पाकिस्तानी भी उसे सुनने के लिए पूरी तरह से मचलते रहते थे। मोहम्मद अली जिन्ना के पाकिस्तान बनाने पर अगर किसी पाकिस्तानी ने सवाल उठा तो सिर्फ यही कि इस फैसले की वजह से उसे लता मंगेशकर को गंवाना पड़ गया।
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लता मंगेशकर के निधन पर पाकिस्तान में भी मातम
लता की आवाज में ऐसा जादू था कि पाकिस्तान जैसे मुल्क और वहां के हुक्कमरानों की मानसिकता पर भी उसकी मधुर ध्वनि का अमिट छाप पड़ चुका है। आज जब लताजी हमारे बीच नहीं हैं, तब पाकिस्तान से जो इसपर आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है, उसमें भी उनकी सुरीली आवाज का असर दिखाई पड़ रहा है। अक्सर गलत वजहों से पाकिस्तानी राजनीति में सुर्खियां बटोरने वाले पाकिस्तानी सूचना और प्रसारण मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि देते हुए ट्विटर पर लिखा है, 'एक प्रसिद्ध शख्सियत अब नहीं है, लता मंगेशकर मधुर स्वर की रानी थीं, जिन्होंने संगीत की दुनिया पर दशकों तक राज किया, वह संगीत की बेताज रानी थीं, आने वाले हर समय में भी उनकी आवाज लोगों के दिलों पर राज करती रहेगी। लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि।'

लताजी की आवाज के दीवाने रहे हैं पाकिस्तानी
92 साल की उम्र में हमें छोड़ गईं लता मंगेशकर, 70 वर्षों से ज्यादा के करियर में हमारे लिए 25,000 से ज्यादा मधुर और सुरीले गाने गा चुकी थीं। इन सात दशकों के इतिहास में भारत और पाकिस्तान की दुश्मनी को लेकर एक से एक तारीखें इतिहास में दर्ज हैं। लेकिन, जिस एक चीज पर भारत और पाकिस्तान दोनों हमेशा सहमत हुए हैं, वह है लता मंगेशकर की आवाज का जादू। पाकिस्तान और पाकिस्तानियों में लता की आवाज की दीवानगी के कई किस्से मशहूर हैं।

लताजी की तरह कोई पैदा नहीं हुआ-नूर जहां
एक चर्चित किस्सा है। लाहौर से ऑल इंडिया रेडियो को एक खत मिला था, जिसमें लिखा था कि भारत कश्मीर रख ले और लता मंगेशकर को पाकिस्तान को सौंप दे। सीमा के उस पार लता की आवाज के दीवानों में कई वरिष्ठ शास्त्रीय संगीतकार भी शामिल थे। लताजी के बारे में वह ये कहते नहीं थकते थे कि पाकिस्तान के लिए बंटवारे में यह सबसे बड़ा नुकसान था। पाकिस्तान की प्रतिष्ठित गायिका नूर जहां भी लताजी की बहुत बड़ी प्रशंसक थीं और एक बार उन्होंने कहा था, 'लोग कहते हैं कि वह (लता मंगेशकर) मेरी प्रशंसा करती है। पर लता तो लता है। मेरी नजर में लताजी की तरह कोई आज तक पैदा नहीं हुआ।'

एक किताब में पाकिस्तान में लताजी की लोकप्रियता का जिक्र
राजनारायण मिश्र की एक किताब 'घूमता हुआ आईना' में भी लता मंगेशकर की मधुर आवाज को लेकर पाकिस्तानी आवाम की दीवानगी का खास अंदाज में जिक्र किया गया है। इस पुस्तक में 'सब गवारा है थकन सारी चुभन एक खुशबू के लिए है ये सफ़र जैसा भी है' के शीर्षक से इस बात का उल्लेख किया गया है। इस किताब में दुनिया में शांति और अमन के लिए संगीत की आवश्यकता का उल्लेख करते हुए पाकिस्तानी जनता में लताजी की लोकप्रियता बयां की गई है।

'लता मंगेशकर दे दो और पूरा कश्मीर ले लो'
'घूमता हुआ आईना' किताब में स्वर-सम्राट बिसमिल्ला खां की बात हो रही थी। उन्होंने एक कार्यक्रम में संदेश दिया था कि 'दुनिया में अमन सिर्फ संगीत के जरिए ही कायम रह सकता है। संगीत महज संगीत नहीं, मजहब है। संगीत से शांति आ सकती है।' इसी को विस्तार देते हुए लेखक ने लिखा है, "एक बार बड़े हल्के फुल्के ढंग से यह प्रयास हुआ था। पाकिस्तान में मौसिकी पसंद लोगों ने यह तज़बीज की थी कि हमें स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर दे दो और पूरा कश्मीर ले लो। प्रत्युत्तर में भारत के संगीत प्रेमियों ने कहा था हमें मल्लिका-ए-तरन्नुम नूरजहां दे दीजिए ताजमहल ले लीजिए।"












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