एक्टर इरफान खान की 'दो ख्वाहिशें' जो पूरी नहीं हो पाईं
मुंबई। बॉलीवुड के उम्दा कलाकारों में से एक इरफान खान का 54 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। कैंसर की वजह से उनके असमय निधन ने उनके फैंस को खासा दुखी कर दिया है। साल 2018 में जब से इरफान ने फैंस को खुद इस बात की जानकारी दी थी कि वह कैंसर से जूझ रहे हैं तो उसके बाद से ही उनकी एक झलक देखने के लिए फैंस तरस गए थे। फैंस की यह ख्वाहिश इरफान नहीं पूरा कर पाए तो इरफान की दो ऐसी ख्वाहिशें हैं जो नियति की वजह से अधूरी रह गई।
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मां के जनाजे में नहीं शामिल होने की अधूरी ख्वाहिश
चार दिन पहले यानी 25 अप्रैल को इरफान की मां सईदा बेगम का जयपुर में इंतकाल हो गया था। 95 साल की सईदा ने लंबी बीमारी के बीच दम तोड़ दिया। इरफान अपनी मां के बहुत करीब थे लेकिन मां के जनाजे में शामिल नहीं हो पाए। देश में कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन लगा है और रेल, फ्लाइट और बस सर्विसेज बंद हैं। ऐसे में इरफान को मन मसोस कर रहना पड़ा। इरफान की मां सईदा टोंक की नवाब फैमिली से आती थीं और जयपुर की बेनीवाल कृष्णा कॉलोनी में रह रही थीं। मां के इंतकाल के चार दिन बाद बेटे ने भी आखिरी सांस ली।
आखिरी फिल्म 'अंग्रेजी मीडियम' बंपर ओपनिंग से चूकी
इरफान खान की आखिरी फिल्म थी 'अंग्रेजी मीडियम' और इस फिल्म को 13 मार्च को रिलीज किया गया था। कोरोना वायरस के चलते फिल्म कुछ दिन तक ही सिनेमाहॉल्स में रही मगर दर्शक वायरस के डर की वजह से हॉल्स तक नहीं पहुंचे। ऐसे में फिल्म उस बंपर ओपनिंग से चूक गई जिसकी उम्मीद खुद इरफान खान कर रहे थे। बाद में फिल्म को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया। गौरतलब है कि कोरोना के चलते कई शहरों में पहले चरण के लॉकडाउन से पहले ही थियेटर बंद कर दिए थे। ऑनलाइन रिलीज होने से पहले इरफान ने फिल्म की टीम के साथ वीडियो चैट की थी मगर कॉल में सिर्फ इरफान का नाम था और उनकी फोटो नजर नहीं आ रही थी। इरफान ने खुद इसका स्क्रीन शॉट शेयर किया था।

क्या थी इरफान को बीमारी
इरफान खान को उन्हें न्यूरो-एंडोक्राइम ट्यूमर था और इस ट्यूमर के इलाज के लिए वह लंदन भी गए थे। क्या है एंडो-क्राइन सिस्टम शरीर का एंडो-क्राइन सिस्टम कई तरह की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है जो कई तरह के हार्मोंस को प्रोड्यूस करती हैं। हार्मोन केमिकल पदार्थ होता है जो रक्त कोशिकाओं के जरिए शरीर में बहता है और कई अंगों की कोशिकाओं पर अलग-अलग तरह से प्रभाव डालता है।ट्यूमर उस समय शरीर में बनता है जब स्वस्थ्य कोशिकाओं में किसी तरह का परिवर्तन होता है और वह अनियंत्रित होकर एक गुच्छे में बदल जाती है। किसी भी ट्यूमर या तो इलाज संभव है या फिर वह जानलेवा साबित हो सकता है।

लाइलाज ट्यूमर बना कैंसर
लाइलाज ट्यूमर शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल सकता है अगर शुरुआत में ही इसका पता न चले और इसका इलाज न हो। दूसरे प्रकार का ट्यूमर ऐसा ट्यूमर है जो बढ़ता है लेकिन वह शरीर के दूसरे हिस्सों को प्रभावित नहीं करता है। इस तरह के ट्यूमर को आसानी से निकाला जा सकता है। न्यूरो-एंडोक्राइन ट्यूमर वह ट्यूमर है जो शरीर के न्यूरो-एंडोक्राइन सिस्टम के लिए हार्मोन प्रोड्यूस करने वाली कोशिकाओं पर होता है यानी ऐसी कोशिकाएं जहां से एंडोक्राइन और नर्व कोशिकाओं के लिए हार्मोन का उत्पादन होता है। न्यूरो-एंडोक्राइन कोशिकाएं पूरे शरीर जैसे फेफड़ों, पेट और आंतों जैसे हिस्सों में होती हैं।












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