बिहार: लालू-नितीश गठबंधन की गांठ खोल पाएगी भाजपा?
पटना। बिहार की राजनीति भले ही गठबंधन के रंग में पहली बार ना रंगी हो पर इस बार मामला वाकई पेचीदा नज़र आ रहा है। राजनैतिक जानकार कह रहे हैं कि लालू-नीतीश की दोस्ती ने भाजपा के होश उड़ा दिए हैं व दोनों की वोटों की ताकत का अहसास भाजपा को हो गया है।

क्या-क्या कहा गया-
- इस बौखलाहट में तरह-तरह के बयान भाजपा के नेता दे रहे हैं। विधानसभा उप चुनाव में लालू-नीतीश की यह दोस्ती भाजपा पर कई गुणा भारी पड़ सकती है। भाजपा को खाता खोलना भी मुश्किल नज़र आ सकता है।
- इस बार विकास के एजेंड पर राजद-जदयू एवं कांग्रेस उपचुनाव में मैदान जीतने की कोशिश में है। लालू ने 15 सालों के शासनकाल में समाज के दबे-कुचलों को जुबान दी है। जदयू समर्थक कह रहे हैं कि नीतीश कुमार ने नौ वर्षो में सूबे की तरक्की का मार्ग प्रशस्त किया।
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क्या रंग लाएगा गठबंधन-
- गठबंधन हुंकार भर रहा है कि विधानसभा उपचुनाव में सभी दस सीटों पर गठबंधन की जीत होगी। भाजपा जोड़तोड़ को उपचुनाव में एक भी सीट नहीं मिलेगी। सूबे के शिक्षा मंत्री वृश्णि पटेल ने हाजीपुर विधानसभा क्षेत्र में महागठबंधन के उम्मीदवार राजेंद्र राय के पक्ष में यह बातें कही।
- उन्होंने कहा कि लालू, नीतीश ने एक ही सिद्धांत व सोच की राजनीति शुरु की थी। तीनों कर्पूरी ठाकुर की झोपड़ी से निकले हुए लोग हैं। पटेल ने कहा कि बिहार में जदयू, राजद एवं कांग्रेस का जो महागठबंधन बना है वह सभी सीटों पर जीतेगी।
इस आरोप-प्रत्यारोप के मौके पर जदयू जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश कुशवाहा, सिद्धार्थ पटेल, प्रो. संजय कुमार सिंह, रामानंद गुप्ता समेत बड़ी संख्या में जदयू के अन्य सदस्यों ने आगामी योजना पर चर्चा की व भाजपा को अभी से 'डरा-सहमा' करार दिया।












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