Ram Mandir: अयोध्या में 'लल्ला' तो जनकपुर में 'पहुना', जन्मभूमि में 5 वर्ष के ही राम क्यों?

भगवान राम अपनी जन्मभूमि पर विराजमान हो गए हैं। भारत ही बल्कि दुनिया के अन्य देशों में उत्साह और आस्था एक अलग ही लेवल पर संचार दिखाई है। विश्व में राम के कई रूपों में पूजा जाता है। लेकिन अगर बात अयोध्या और जनकपुर की हो तो बात ही कुछ अलग है। यहां तो रामलला के प्रति आस्था का एक अलग ही क्रेज है। जनपुरवासी अयोध्या को जिस सम्मान की दृष्टि से देखते है वैसा दुनिया में शायद ही कहीं देखा जाता हो। यहां भगवान की 'गारी' से स्वागत किया जाता है। तो वहीं अयोध्या में भगवान को रामलला यानी बालक के रूप में पूजा जाता है। इन दोनों क्षेत्रों को बीच जो संबंध है, वो बड़ा ही प्यारा है।

अयोध्या में रामलला के पांच वर्ष के बालक के रूप में पूजा होती है। जबकि जनकपुर में 16 वर्ष के राम की कल्पना की जाती है। पौराणिक मान्यताओं अनुसार भगवान के राम और मां सीता से विवाह के बाद से जनकपुर के बीच जो संबंध प्रगाढ हुए उसकी झलक आज भी देखी जा सकती है।

Ramlala in Ayodhya and Pahuna in Janakpur

अयोध्या में जब राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा हो रही तो इसका जश्न नेपाल में भी मनाया जा रहा है। जनकपुर में जानकी मंदिर को रोशनी और मिट्टी के दीयों से सजाया गया है। जनकपुर को भगवान राम के ससुराल के तौर पर भी जाना जाता है। पूरे शहर में सजावट की गई है और लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।

श्रीराम जन्मभूमि में 5 वर्ष के राम
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अयोध्या में राजा दशरथ के चार पुत्रों में राम सबसे बड़े थे। चारो भाईयों का जन्म स्थान अयोध्या में ही हुआ। ऐसे में अयोध्यावासी ही पुरे अवध क्षेत्र के सनातनधर्मी भगवान राम के एक बालक के रूप में पूजते हैं। ऐसे में उन्होंने रामलल्ला (रामलला) कहते हैं। भगवान राम का जन्मोत्सव हर वर्ष यहां बड़ी भव्यता के साथ मनाया जाता है। हिन्दी महीने के चैत्र मास की नवरात्र के दौरान नवमी तिथि की यहां भगवान राम का प्राकट्योत्सव मनाया जाता है। अयोध्या में पांच वर्ष के बालक के रूप में स्थापित करने की वजह सिर्फ अयोध्या से जुड़ी मान्यता ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के सनातन धर्मियों के बीच अयोध्या की पहचान राम जन्मभूमि के रूप में होना भी है।

जनकपुर में 'पहुना' क्यों?

वर्तमान में नेपाल स्थित जनकपुर भगवान राम समेत उनके तीनों भाईयों की ससुराल है। मां सीता का मायका जनपुर में है। ऐसे में यहां के वासी भगवान राम को पहुना यानी जामाता मानते हैं। अयोध्या में रामलला प्राकट्योत्सव तो जनकपुर में हर वर्ष बड़े धूमधाम राम-जनकी विवाह मनाया जाता है। विवाह में जब कलेवा की परंपरा के दौरान जनपुरवाली अपने पहुना यानी भगवान राम का स्वागत गारी गीत गाकर करते हैं। यहां भगवान को 16 वर्ष के रूप में पूजा जाता है। क्योंकि भगवान राम जब मां सीता विवाह करने जनपुर पहुंचे थे तो उनकी उम्र 16 वर्ष थी। ऐसे में यहां भगवान की यहां किशोर की अवस्था के स्वरूप में अर्चना की जाती है।

दुल्हन की तरह सजी अयोध्या

रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के दौरान राम मंदिर, राम जन्मभूमि परिसर समेत पूरी अयोध्या को भव्य रूप से सजाया गया है। इसमें हजारों टन फूलों का इस्तेमाल किया गया है। जब राम मंदिर के भीतर पीएम मोदी प्राण प्रतिष्ठा कर रहे थे। उस वक्त हेलीकॉप्टर के जरिए पुष्पवर्षा की जा रही थी। देश-दुनिया हर तरफ सिर्फ राम-राम ही सुनाई दे रहा है। अयोध्या में जगह-जगह भजन और भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। घरों को झालर और फूलों से सजा दिया गया है। शाम में दीपावली मनाने की तैयारी की है। रामलला के आने की खुशी सर्फ भारत में ही नहीं बल्कि अमेरिका में भी है। अमेरिका में टाइम्स स्क्वायर पर ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ राम मंदिर के सदस्यों ने लड्डू बांटे।

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