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लाल कृष्ण आडवाणी: 7 महीने में चौथी बार बिगड़ी सेहत, जानिए कब- कब हुए अस्पताल में भर्ती

Lal Krishna Advani: पूर्व उपप्रधानमंत्री और भाजपा के प्रमुख नेता लाल कृष्ण आडवाणी को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्हें ICU में रखा गया है, लेकिन अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार उनकी हालत अब स्थिर है। 97 साल के आडवाणी को करीब दो दिन पहले अस्पताल लाया गया था, जब उन्हें सर्दी-खांसी की समस्या बढ़ गई थी। उनके परिवार के अनुसार यह समस्या बढ़ने का कारण दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को बताया जा रहा है।

अस्पताल के मुताबिक, फिलहाल उन्हें न्यूरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर विनीत सूरी की देखरेख में रखा गया है। आडवाणी को अगले 48 घंटों के लिए निगरानी में रखा गया है, और डॉक्टरों का कहना है कि कल के बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा सकता है।

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आखिरी 7 महीने में चौथी बार तबीयत बिगड़ी

आडवाणी की यह तबीयत बिगड़ने का मामला पिछले 7 महीने में चौथी बार हुआ है। इससे पहले, 26 जून को उन्हें AIIMS दिल्ली में यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में एक छोटा ऑपरेशन कराया गया था। अगले ही दिन उन्हें छुट्टी मिल गई थी। इसके बाद, 3 जुलाई को रात को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन एक दिन बाद ही उन्हें घर भेज दिया गया। फिर, 6 अगस्त को उन्हें रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था।

भारत रत्न से सम्मानित हुए थे आडवाणी
आडवाणी को इस साल 31 मार्च को भारत रत्न से नवाजा गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनके घर जाकर उन्हें यह सम्मान प्रदान किया था। इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू भी उपस्थित थे। प्रधानमंत्री मोदी ने 3 फरवरी को आडवाणी को भारत रत्न देने की घोषणा की थी। इससे पहले, 2015 में आडवाणी को देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा गया था।

आडवाणी का ऐतिहासिक राजनीतिक सफर
आडवाणी भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक रहे हैं। भाजपा के संस्थापक सदस्य होने के साथ ही उन्होंने भारतीय राजनीति को नई दिशा दी। आडवाणी की 1987 में सोमनाथ से अयोध्या तक की रथ यात्रा ने भारतीय राजनीति में एक नया मोड़ लाया। इस यात्रा के माध्यम से उन्होंने राम मंदिर आंदोलन को प्रमुखता दी, जो भाजपा के लिए 1984 में 2 सीटों से बढ़कर 1991 में 120 सीटों तक पहुंचने में मददगार साबित हुई।

आडवाणी की रथ यात्रा भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम थी, जिसने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और बिहार जैसे राज्यों में पार्टी की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित की। आडवाणी ने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक यात्राएं निकालीं, जैसे राम रथ यात्रा, जनादेश यात्रा, स्वर्ण जयंती रथ यात्रा, भारत उदय यात्रा, भारत सुरक्षा यात्रा, और जनचेतना यात्रा, जिनमें से हर यात्रा भाजपा की राजनीति में महत्वपूर्ण साबित हुई।

नंबर दो की भूमिका में आडवाणी

आडवाणी का राजनीतिक जीवन हमेशा अटल बिहारी वाजपेयी के साथ रहा। 1995 में जब आडवाणी ने अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित किया, तो यह कदम सियासी हलकों में हैरान करने वाला था। इसके अलावा, 1996 में आडवाणी का नाम हवाला कांड में आया था, लेकिन उन्होंने अपनी बेदाग छवि के कारण इस्तीफा देकर चुनाव लड़ा और बाद में खुद को बेदाग साबित किया।

आडवाणी का योगदान भारतीय राजनीति में

आडवाणी का योगदान न सिर्फ भाजपा के लिए, बल्कि भारतीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण रहा है। उनकी नीतियों और दृष्टिकोण ने भारतीय राजनीति की दिशा को प्रभावित किया। आडवाणी का राजनीतिक जीवन सादगी और सिद्धांतों पर आधारित रहा, और उन्होंने भारतीय राजनीति में हिंदुत्व और राम मंदिर मुद्दे को मजबूती से उठाया।

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