लखीमपुर खीरी मामला: सरकार का अजय मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई का इरादा नहीं- सूत्र
नई दिल्ली, 16 दिसम्बर। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में एसआईटी की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को कैबिनेट से हटाने की मांग तेज कर दी है लेकिन मोदी सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है। सरकार से जुड़े विश्वस्त सूत्रों ने इस बारे में बताया है।

मिश्रा को कैबिनेट से हटाने का इरादा नहीं
इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि सरकार का मानना है एसआईटी की रिपोर्ट इस मामले में अंतिम शब्द नहीं है। सूत्रों ने कहा कि सरकार के भीतर यह भी मानना है कि मामला अभी विचाराधीन है और यह मंत्री अजय मिश्रा से नहीं बल्कि उनके बेटे से संबंधित है।
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी ने अपनी जांच में दावा किया था कि "प्रदर्शनकारी किसानों की हत्या एक सुनियोजित साजिश" थी। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को मुख्य आरोपी बनाया गया है।

पत्रकारों के साथ अभद्रता मामले में बुलाया गया
सूत्रों ने के मुताबिक सरकार ने अजय मिश्रा द्वारा द्वारा कुछ पत्रकारों पर आपा खोने के मामले में भी उन्हें बुलाया था। यह बुधवार को वायरल हुए एक वीडियो से संबंधित है जिसमें एसआईटी रिपोर्ट पर सवाल पूछने पर अजय मिश्रा अपना आपा खोते नजर आए थे। वीडियो में मंत्री अजय मिश्रा पत्रकार को मोबाइल बंद करने के लिए कहते नजर आ रहे हैं। इस दौरान उनके तेवर काफी सख्त थे।
इन सब घटनाक्रमों के बीच अजय मिश्रा गुरुवार को गृह मंत्रालय में पहुंचे और काम जारी रखा। उन्होंने अपने विभाग से संबंधित कुछ अधिकारियों के साथ बैठक भी की।
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क्या था मामला?
बीते 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में भड़की हिंसा में 8 लोगों की मौत हो गई थी। तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हजारों किसान उस दिन लखीमपुर खीरी में राज्य के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के दौरे का विरोध करने के लिए इकठ्ठा हुए थे। प्रदर्शन के दौरान एक एसयूवी किसानों को रौंदते हुए गुजर गई थी जिसमें चार किसानों की मौत हो गई थी। घटना के बाद हिंसा भड़क गई थी जिसमें दो बीजेपी कार्यकर्ता, अजय मिश्रा का एक ड्राइवर, एक पत्रकार की हत्या कर दी गई थी। इस तरह पूरे घटनाक्रम में 8 लोग मारे गए थे।

क्या कहा एसआईटी ने?
लखीमपुर हिंसा मामले की जांच के लिए यूपी के योगी आदित्यनाथ सरकार ने विशेष जांच समिति (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में पाया कि किसानों की हत्या एक 'नियोजित साजिश' थी न कि लापरवाही का परिणाम जैसा कि पहले दावा किया गया था।
एसआईटी ने एक न्यायाधीश को आशीष मिश्रा सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपों को संशोधित करने के लिए भी लिखा है।
आशीष मिश्रा पर एसआईटी ने धारा 307 (हत्या का प्रयास), धारा 326 (खतरनाक हथियार से चोट पहुंचाना), धारा 34 (एक ही इरादे से कई व्यक्तियों द्वारा मिलकर किया गया कृत्य) और आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 लागू करने की अनुमति मांगी है।












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