राष्ट्रपति बनने का ख्वाब टूटा, भड़ास निकली आडवाणी की
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) कभी भाजपा के शीर्ष नेता रहे आडवाणी द्वारा देश में आपातकाल की आशंका से एक बात साफ है कि आडवाणी का यह भरोसा भी टूट रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उनको राष्ट्रपति बनायेंगे।
इसलिए वे परोक्ष रूप से मोदी और उनकी सरकार पर वार करने लगे हैं। उन्हें कहीं न कहीं ये भी लगता है कि उनकी करीबी सुषमा स्वराज को संकट में डालने में पार्टी के कुछ उन नेताओं का हाथ है,जो उन्हें भी नहीं चाहते।
राष्ट्रपति बनने का ख्वाब
भाजपा के करीबी सूत्रों का कहना है कि आडवाणी के दिल के किसी कोने में प्रणव कुमाऱ मुखर्जी के बाद देश का राष्ट्रपति बनने का ख्वाब था। उन्हें मालूम था कि बदलती परिस्थितियों में वे देश के प्रधानमंत्री तो नहीं बन सकते। पर राष्ट्रपति पद का सपना उन्होंने पाल रखा था। उन्हें उम्मीद थी कि मुखर्जी के 2017 में अपने पद को छोड़ने के बाद वे देश के राष्ट्रपति बन सकते हैं।
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निकालते भड़ास
पर जिस तरह से पार्टी उन्हें इग्नोर करने लगी है, उसके बाद उनके सामने कोई विकल्प ही नहीं बचा कि वे चुप रहे। वे तो अब एक तरह से अपनी भड़ास ही निकाल रहे हैं।
आजिज आई पार्टी
भाजपा के एक नेता ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि पार्टी उनसे आजिज आ चुकी है। वे कुछ भी कह देते हैं। कभी बिल्कुल चुप्पी साध लेते हैं। कुछ समय पहले भाजपा के बैंगलोर में हुए सम्मेलन में वे पूरी तरह से चुप रहे। अगर उन्हें चुप ही रहना था तो वे वहां पर गए ही क्यों। चुप रहकर एक तरह से उन्होंने संकेत दे दिए कि वे भाजपा के मौजूदा शिखर नेतृत्व से खफा से हैं।













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