'कोई दीवाना कहता है' वाले कुमार विश्वास इन दिनों क्यों हैं आप में बेगाने?
नई दिल्ली। 'देश से भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ है, ये कोई राजनीतक दल नहीं बल्कि एक विचार धारा है', ये ही अल्फाज थे देश के लोकप्रिय कवि और आप नेता कुमार विश्वास के, जब आप पार्टी अस्तित्व में आई थी। 'कोई दिवाना कहता है' से लोगों के दिलों पर राज करने वाले कुमार विश्वास इन दिनों एक कवि कम बल्कि नाराज और बगवाती नेता ज्यादा नजर आ रहे हैं। खबर है कि इस वक्त पार्टी के अंदर केजरीवाल बनाम कुमार विश्वास की लड़ाई चल रही है। जिस तरह से कुमार विश्वास के बयान मीडिया में आए हैं, उससे तो यही लग रहा है कि वो अपने अजीज मित्र अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के कामों से खुश नहीं है । मुद्दे एक नई कई है, जिससे लगता है कि पार्टी का संगठन अब गड़बड़ा गया है।

केजरीवाल और विश्वास की सोच
पिछले महीने ही पांच साल पूरे करने वाली आप पार्टी ने जब जन्म लिया था तो इसके केन्द्र में थे अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और कुमार विश्वास। तीन अभिन्न मित्र जो पार्टी के गठन के वक्त मजबूती से एक साथ खड़े थे आज आपस में खफा-खफा नजर आ रहे हैं। केजरीवाल और विश्वास की सोच और विचारधारा में अब जमीन-आसमान का अंतर दिख रहा है और विश्वास ठीक उसी तरह से बातें कर रहे हैं, जिस तरह की बातें कुछ वक्त पहले प्रशांत भूषण, योंगेद्र यादव, शाजिया इल्मी, अंजलि दमानिया, मयंक गांधी और धर्मवीर गांधी किया करते थे।

आखिर चूक कहां हुई?
आखिर चूक कहां हुई, आखिर क्यों कल तक जिन्हें अपना हमराज कहते थे विश्वास, उनके लिए बेगाने हो गए हैं, क्या इसकी वजह कुमार विश्वास को भाजपा-आरएसएस का एजेंट बताने वाले विधायक अमानतुल्ला खान को पार्टी में वापस आना है, जिन्होंने खुले आम विश्वास पर आरोप लगाए बावजूद इसके, उनकी पार्टी में ससम्मान वापसी हो गई। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी से 2014 में लोक सभा चुनाव लडऩे वाले विश्वास के करीबियों का मानना है कि यह दरार उस मंडली ने पैदा की है जो कि केजरीवाल के करीब हैं। विश्वास का मानना है कि पार्टी नेतृत्व ने उनकी अनदेखी की है।

राज्य सभा सीट
विवाद की एक वजह राज्य सभा सीट भी है। वर्ष 2015 में दिल्ली में मिली शानदार जीत की बदौलत आम आदमी पार्टी दिल्ली की तीनों राज्यसभा सीटें निश्चित रूप से जीत सकती है, सीटें जनवरी में खाली होंगी और कुमार विश्वास का कहना है कि तीनों में से एक सीट के हकदार वह हैं, हालिया इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा भी था कि वो हमेशा ब्राइड्समेड (दुल्हन की सहेली) ही बने रहे हैं लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं कि उन्हें दुल्हन बनने का हक नहीं। उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर सीधे हमला नहीं किया, लेकिन यह कहने से भी नहीं हिचके कि उन्हें AAP से निकाले जाने की साजिश तेजी से चल रही है लेकिन मैं पार्टी नहीं छोड़ने वाला।

विश्वास पार्टी के नेतृत्व से खुश नहीं
विश्वास पार्टी के नेतृत्व से खुश तो नहीं है, इस बात का अंदाजा तभी हो गया जब कार्यकर्ताओं से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा है कि वह पार्टी का वर्जन 2 लाएंगे, इसके लिए वो कार्यकर्ताओं के 'एंटी वायरस' लगाएंगे जो चुने हुए जनप्रतिनिधियों और संगठन में हो रही गलतियों के बारे में बता सके। वहीं उन्होंने ये भी कहा कि प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव जैसे नेताओं को वापस लाने के लिए संवाद कायम करेंगे, जिसके बाद सुगबुगाहट तेज है कि विश्वास कहीं दूसरा संगठन तो नहीं तैयार कर रहे, जिसका नेतृत्व वो करेंगे, वो भी केजरीवाल के खिलाफ।

अन्ना हजारे भी याद आए...
उन्हें इस वक्त अन्ना हजारे भी याद आ रहे हैं, जो कि खुद केजरीवाल के खिलाफ हैं, फिलहाल सर्द मौसम में भी आप के अंदर विद्रोह का पारा उबल रहा है, देखते हैं इस उबाल से सीएम अरविंद केजरीवाल कैसे निपटते हैं।












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