कुमार विश्वास: किराया बचाने को ट्रक में लिफ्ट लेने से देश के सबसे महंगे कवि तक का सफर
चुटीले अंदाज में अपनी बात रखने के लिए पहचान रखने वाले कुमार विश्वास का इंजीनयरिंग की पढ़ाई से साहित्य की तरफ आना और फिर कवि बनना, इसके बाद अन्ना आंदोलन से जुड़ना और आम आदमी पार्टी के नेता बनने तक की कहानी भी काफी दिलचस्प है।
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा के लिए उम्मीदवार ना बनाए जाने के बाद कुमार विश्वास ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कुमार विश्वास लगातार अरविंद केजरीवाल पर निशाना साध रहे हैं, चुटीले अंदाज में अपनी बात रखने के लिए पहचान रखने वाले कुमार विश्वास का इंजीनयरिंग की पढ़ाई से साहित्य की तरफ आना और फिर कवि बनना, इसके बाद अन्ना आंदोलन से जुड़ना और आम आदमी पार्टी के नेता बनने तक की कहानी काफी दिलचस्प है। कुमार को अपने शुरुआती दौर में कई मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा।

इंजीनयरिंग छोड़ पढ़ा हिन्दी साहित्य
कुमार विश्वास मूल रूप से उत्तर प्रदेश के पिलखुआ के रहने वाले हैं। कुमार के पिता अध्यापक रहे हैं। बारहवीं पास करने के बाद पिता ने उनका दाखिला इंजीनयरिंग में करवा दिया लेकिन उनका मन साहित्य में ही रमा। इंजीनयरिंग छोड़ बाद उन्होंने स्नातक और फिर हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया, इसके बाद 'कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना' विषय पर पीएचडी की। बतौर उन्होंने रजास्थान से अपना करियर शुरू किया। प्रवक्ता के रूप में 1994 में शुरू किया।

2011 में अन्ना आंदोलन से जुड़े विश्वास
2011 में अन्ना ने लोकपाल की मांग को लेकर दिल्ली में अनशन किया। कुमार विश्वास इस टीम का एक अहम हिस्सा रहे और उन्हें इस दौरान खूब लोकप्रियता मिली। 2012 में कुमार ने इसी आंदोलन के उनके साथी अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और कुछ लोगों के साथ मिलकर 'आम आदमी पार्टी' बनाई। पार्टी ने अपने पहले ही चुनाव में दिल्ली में सरकार बनाई। 2014 के लोकसभा के चुनाव में कुमार विश्वास ने अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ इलेक्शन लड़ा लेकिन हार गए।

ग्रेजुएशन के दौरान हुआ मंजू से प्यार, पत्नी को कहते हैं एडवाइजर
पढ़ाई के दौरान ही विश्वास की मुलाकात मंजू शर्मा से हुई थी। दोनों ही हिंदी साहित्य को पसंद करते थे और यहीं से दोनों में दोस्ती हुई। तब विश्वास मंजू को इम्प्रेस करने के लिए कविताएं लिखते थे। उन्ही कविताओं ने इन्हें कॉलेज में पॉपुलर किया। कुमार विश्वास ने 2014 के इलेक्शन में सबमिट किए एफिडेविट के मुताबिक कुमार विश्वास 3.8 करोड़ के मालिक हैं। वहीं एक इंटरव्यू में कुमार ने बताया था कि जब शुरुआत में उन्होंने कवि सम्मेलनों में जाना शुरू किया था तो उनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, ऐसे में देर रात सम्मेलनों से लौटते हुए ट्रकों में लिफ्ट लेनी पड़ती थी।












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