Kulbhushan Jadhav:रिव्यू पिटीशन दायर करने के लिए पाकिस्तान ने दिया भारत को ऑफर
नई दिल्ली- कुलभूषण यादव की सजा के खिलाफ पाकिस्तान ने भारत को रिव्यू पिटीशन दायर करने का निमंत्रण दिया है। पाकिस्तान की एक मिलिट्री कोर्ट ने जाधव को जासूसी के आरोपों में मौत की सजा सुनाई थी। इससे पहले कल ही पाकिस्तान ने दावा किया था कुलभूषण ने अपनी सजा के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने से इनकार कर दिया है। लेकिन, भारत ने पाकिस्तान के इन दावों को ये कहकर खारिज कर दिया था कि वह पिछले चार साल से ऐसे ही फरेब पर फरेब करता जा रहा है और यह दावा भी उसकी एक और झूठ का उदाहरण है।
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पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान जारी कर कहा कि 'हालांकि कमांडर जाधव की दया याचिका अभी भी लंबित है, भारत को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के जजमेंट के आलोक में रिव्यू और रिकन्सिडरेशन पिटीशन दायर करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।' जबकि, पाकिस्तान के दावों को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि 'पाकिस्तान पिछले चार सालों से ऐसे ही फरेब कर रहा है और ये दावा (रिव्यू नहीं दायर करने का) भी पाकिस्तान का एक और झूठ है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुलभूषण जाधव को एक मजाकिया ट्रायल के जरिए फांसी की सजा सुनाई गई है। वह पाकिस्तान की सेना के कब्जे में है। उसे रिव्यू पिटीशन दर्ज करने से इनकार करने के लिए निश्चित रूप से मजबूर किया गया है।'
विदेश मंत्रालय के बयान में यह भी कहा गया कि हमारे लगातार आग्रह के बावजूद पाकिस्तान जाधव तक भारत को फ्री ऐक्सेस नहीं दे रहा है। वह इंटरनेशनल कोर्ट के आदेश को उसी भावना के मुताबिक लेने से पीछे हट रहा है। इससे पहले पाकिस्तान के एडिश्नल अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि 17 जून, 2020 को कुलभूषण जाधव को उनकी सजा पर पुनर्विचार के लिए एक याचिका दायर करने के लिए कहा गया था। जाधव ने अपने कानूनी हक का प्रयोग करते हुए अपनी सजा पर पुनर्विचार याचिका दायर करने से इनकार कर दिया।
जाधव को 2017 में पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने जासूसी और आतंकवाद के केस में मौत की सजा सुनाई थी। भारत ने जाधव की सजा को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में चुनौती दी थी। 2019 में नीदरलैंड स्थित अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने करीब 26 महीने चली सुनवाई के बाद पाकिस्तान से जाधव की सजा की समीक्षा करने और उन्हें जल्द से जल्द काउंसलर एक्सेस देने का आदेश दिया था। साथ ही जाधव के मामले की सिविलियन अदालत में सुनवाई के लिए भी अवसर मुहैया कराने को कहा था।












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