कोझिकोड विमान हादसा: विमान में सवार लोगों की आपबीती
29 साल के शर्फुदीन घर वापस लौटने को लेकर काफ़ी रोमांचित थे. उन्होंने सोशल मीडिया पर मैसेज डाला था कि वो पांच घंटे में अपने घर पहुँच जाएंगे.
लेकिन जब कोझिकोड के एयरपोर्ट पर सवेरे 7.40 बजे एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान ने लैंड किया, तो विमान फिसल कर रनवे से दूर गिरा और दो टुकड़ों में बंट गया. हादसे में शर्फुदीन की मौत हो गई.
वहीं तस्वीर में मां अमीना शरीन के गोद में बैठी शर्फुदीन की दो साल की बेटी फ़ातिमा इज़्जा की आंखें अचरज से भरी हुई हैं कि ये सब क्या हो रहा है. फ़ातिमा के सिर में चोट आई है और कालीकट मेडिकल कॉलेज में आज सुबह सर्जरी कर उसके सिर में जम चुके खून को निकाला है.
उनके चाचा हानी हसन ने बीबीसी हिंदी को बताया, "डॉक्टरों ने कहा कि वो अब ठीक है. उसे आईसीयू में शिफ़्ट किया गया है."
रुंधे गले से हसन बताते हैं कि शर्फुदीन की 23 साल की पत्नी अमीना ने उनसे सुबह पांच बजे ऑपरेशन में जाने से पहले बात की थी.
वो बताते हैं, "उनके दोनों हाथ और दोनों पैर बुरी तरह से जख़्मी हैं. उन्हें ऑपरेशन के लिए उस वक़्त तैयार किया जा रहा था और लगातार उस दौरान अपने पति के बारे में पूछ रही थी. हमने उसे कुछ नहीं बताया है."
फ़ातिमा का ऑपरेशन कालीकट मेडिकल कॉलेज में हुआ है तो वहीं अमीना का ऑपरेशन मालाबार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस में हुआ है.
हसन बताते हैं कि शर्फुदीन दुबई में सेल्समैन का काम करते थे.
'विमान के अंदर अफरा-तफरी का माहौल था'
एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट कोझिकोड के कारीपुरी एयरपोर्ट पर लैंड करते वक्त रनवे से फिसल कर आगे निकल गया और और घाटी में गिर गया. विमान के पायलट कैप्टन दीपक साठे की भी हादसे में मौत हो गई है वे भारतीय एयर फोर्स के अनुभवी पायलट रहे थे.
विमान में सवार 46 साल की जयामोल जोसेफ़ ने दुबई में अपने पारिवारिक मित्र सादिक मोहम्मद को बताया कि जब विमान लगभग लैंड करने के बाद भी नहीं रुका और फिर से ज़मीन से थोड़ा ऊपर उठ गया तो विमान के भीतर अफरा-तफरी का माहौल था.
सादिक बताते हैं, "उसने बताया कि फिर से उड़ान भरने से पहले विमान के चक्के लगभग ज़मीन को छू चुके थे. विमान के अंदर अफरा-तफरी मच गई और उसने महसूस किया कि विमान घाटी में गिर चुका है."
सादिक बताते हैं, "ज़्यादातर यात्रियों को यह पता था कि विमान के साथ क्या हो रहा था. क्रैश करने के बाद उसने अपना फ़ोन ऑन किया. दूसरे पैसेंजर भी अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को कॉल कर रहे थे. वैसे ही उसने भी हमें फ़ोन किया."
जयामोल जोसेफ़ दुबई में अपने पारिवारिक दोस्तों के साथ मिलने और घूमने-फिरने गई थीं. उनके दोस्त भी कोझिकोड से ही हैं.
उन्हें मार्च में केरल लौटना था. लेकिन लॉकडाउन के दौरान विमान परिचालन पर पाबंदी लगने की वजह से उन्हें कई महीनों तक वहीं रहना पड़ा.
सादिक बताते हैं, "किस्मत से वो ठीक हैं. हो सकता है इसलिए क्योंकि वो 31वीं पंक्ति में बैठी थीं. उन्हें नाक पर थोड़ी चोट आई है और वो अभी अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में हैं."
26 साल के अफसल पारा की किस्मत भी अच्छी थी. उनका नाम भी इस विमान से लौटने वालों में था. लेकिन वो विमान पर नहीं चढ़ पाए थे.
उनके चचेरे भाई शामिल मोहम्मद बताते हैं, "उनके पास एयरपोर्ट तक पहुँचने के पैसे नहीं थे. उनका वीज़ा रद्द हो गया था क्योंकि उन्होंने 500 दिरहम का जुर्माना नहीं भरा था. उनके पास पांच महीने से कोई काम नहीं था. इसलिए उनके पास पैसा नहीं था."
वंदे मातरम अभियान के तहत लौटने वाले कम से कम आधे यात्री ऐसे है जिनका काम छूट गया है या जिनका वीज़ा रद्द हो गया है. बाक़ी वैसे लोग हैं जो कोरोना की वजह से हुए लॉकडाउन के चलते दुबई में फंसे हुए थे.












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