जानिए कौन है वो शख्‍स जिसने पाकिस्‍तान आर्मी चीफ बाज़वा की नाक में किया है दम

बेंगलुरु। पाकिस्‍तान में सेना प्रमुख कमर जावेद बाज़वा जिसने पाकिस्‍तान की सरकार तक कांपती है,उसी बाज़वा की पाकिस्‍तान के एक सख्‍स ने नाक में दम कर दिया है। इतना ही नहीं उसके एक खुलासे ने बाज़वा को पाक सेना प्रमुख की कुर्सी से उतारने तक का इंतजाम तक कर दिया है। आइए जानते हैं वह शख्‍स कौन है और क्यों लिया सीधे बाज़वा से पंगा?

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जनरल बाजवा के लिए काल बना यह पाकिस्‍तानी शख्‍स पेशे से एक वकील हैं। दरअसल, रियाज हनीफ राही नाम के इस वकील ने पाकिस्‍तान सरकार के बाजवा के कार्यकाल विस्‍तार के फैसले के खिलाफ पाकिस्‍तान सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे डाली। जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा पाक आर्मी चीफ बाजवा के कार्यकाल विस्‍तार को लेकर दी गयी नोटिस के बाद पाकिस्‍तान में पिछले कुछ दिनों से घमासान मचा हुआ है।

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बता दें पिछले 19 अगस्‍त को पाक पीएम इमरान खान ने एक आधिकारिक अधिसूचना के जरिए बाजवा का तीन साल का कार्यकाल विस्‍तार कर दिया था। इसके पीछे उन्‍होंने कश्‍मीर और अफगानिस्‍तान के खराब हालात के कारण क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल का हवाला दिया था। लेकिन सरकार के इस फैसले को रियाज राही ने कोर्ट में याचिका दायर कर दी।

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पाकिस्‍तान की कोर्ट में पिछले कई वर्षो में राजनीतिक और संवैधानिक महत्व के मामलों पर कई याचिका दर्ज करने वाले एडवोकेट रियाज राही को खुद अंदाजा नहीं था कि उनकी याचिका कितना बड़ा मुद्दा बन जाएगी। रियाज राही की याचिका इसलिए भी अहम है कि क्योंकि बाजवा का मूल कार्यकाल 28 नवंबर यानी गुरुवार को समाप्‍त होने वाला हैं । इस याचिका के आधार पर ही अब तय होगा कि बाजवा का रिटायरमेंट कब होगा? अदालत ने ये भी कहा कि पाकिस्तान सरकार बाजवा के सेवा विस्तार के लिए कोई कानूनी आधार पेश नहीं कर पाई है। इन तीखी टिप्पणियों के बाद अब सबको इंतज़ार है 27 नवंबर के दिन का, जब मामले में दोबारा सुनवाई होगी।

गैर-मुस्लिम हैं बाज़वा इस आधार पर की अपील

गैर-मुस्लिम हैं बाज़वा इस आधार पर की अपील

बता दें बाजवा के कार्यकाल के विस्‍तार को लेकर कोर्ट में कई याचिका दायर हुई हैं। इनमें से एक याचिका में कहा गया है कि बाजवा अहमदिया समुदाय से आते हैं इसलिए उनका कार्यकाल नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय को गैर-मुस्लिम करार दिया जाता है। गौरतलब है कि पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक, एक गैर-मुस्लिम आर्मी चीफ नियुक्त नहीं हो सकता है।

कोर्ट ने सेवा विस्तार को अवैध और गैर-कानूनी बताया

कोर्ट ने सेवा विस्तार को अवैध और गैर-कानूनी बताया

चूंकि इस समुदाय को पाक में अहमदिया मुसलमान के तौर पर जाने जाते हैं और यहां पर लोग इन्हें 'गैर-मुस्लिम' मानते हैं। इस समुदाय को हमेशा से पाकिस्‍तान में उनके धार्मिक विश्‍वासों की वजह से शक का सामना करना पड़ा है। जिस समय उन्‍हें आर्मी चीफ नियुक्‍त किया गया था तो उस फैसले को अहमदिया समुदाय के संघर्ष को पहचान दिलाने वाला बताया गया था। इसी आधार पर याचिका में आर्मी चीफ के सेवा विस्तार को अवैध और गैर-कानूनी करार दिया गया है।

बाज़वा का कार्यकाल बढ़ाने के लिए पीएम ने किया संसोधन

बाज़वा का कार्यकाल बढ़ाने के लिए पीएम ने किया संसोधन

जावेद बाजवा को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को पाक आर्मी चीफ कमर बाजवा के कार्यकाल विस्तार के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया था। कोर्ट के इस आदेश के बाद पाक की इमरान खान सरकार ने बाजवा आर्मी चीफ की कुर्सी पर बने रहे इसके लिए आर्मी एक्ट में संशोधन कर इसमें 'विस्तार' शब्द भी जोड़ा गया।

सुप्रीम कोर्ट ने बाजवा की नियुक्ति पर गंभीर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने बाजवा की नियुक्ति पर गंभीर सवाल

जनरल बाजवा के सेवा विस्तार को द ज्यूरिस्ट फाउंडेशन की ओर से वकील रियाज हनीफ राही ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, बाद में रियाज राही ने संभवत: दबाव में आकर अपनी याचिका वापस लेने की इच्छा जताई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी और पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 184(3) के तहत जनहित में याचिका को स्वीकार कर लिया। इस तरह ये एक स्वतः प्रेरित संज्ञान वाला मामला बन गया।

सीधे तौर पर कहे तो एक ऐसा मामला, जिसे अदालत अपनी तरफ से उठाती है। और चीफ जस्टिस खोसा ने न सिर्फ संज्ञान लेकर नोटिस दिया है बल्कि उन्होंने बाजवा की नियुक्ति पर कई गंभीर सवाल भी उठाए हैं। उन्होंने सरकार से कहा कि सेनाध्यक्ष को सेवा विस्तार सिर्फ राष्ट्रपति दे सकते हैं। ये भी पूछा कि जब 19 अगस्त को नोटिफिकेशन निकल गया था तो 21 अगस्त को किस बात की मंज़ूरी दी गई. इस पर पाकिस्तान सरकार की तरफ से पेश हुए अटॉर्नी जनरल मंसूर खान ने कहा कि कैबिनेट की मंज़ूरी रह गई थी। इस पर जस्टिस खोसा ने पूछ लिया कि कैबिनेट के 25 सदस्यों में से सिर्फ 11 ने बाजवा के नाम पर हामी भरी थी। तो क्या बाकी 14 की खामोशी को ही हां मान लिया गया?

राही कोर्ट में पहले भी दे चुके सरकार के दूसरे फैसलों को चुनौती

राही कोर्ट में पहले भी दे चुके सरकार के दूसरे फैसलों को चुनौती

यह पहला मामला नहीं है जब राही ने कोर्ट में मुद्दा उठाकर पाकिस्‍तान में चर्चा में आए हैं। इससे पहले मार्च 2018 में रियाज राही ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ 'कोर्ट अवमानना' की याचिका दायर की थी। इसके अलावा अप्रैल 2018 में रियाज राही ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर जस्टिस काजी फैज ईसा की नियुक्ति को ही चुनौती दे डाली थी। हालांकि, जस्टिस ईजा की छवि पाकिस्तान में काफी अच्छी रही है। जस्टिस ईसा के मामले में कोर्ट ने राही पर 10,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया था।

इसे भी पढ़े- आखिर इमरान सरकार सेना प्रमुख के पद पर बाज़वा को ही क्‍यों रखना चाहते हैं ?

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