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जानिए पति श्याम चरण से कहां मिली थीं द्रौपदी मुर्मू ? दहेज में क्यों दिए गए थे गाय-बैल?

जानिए पति श्याम चरण से कहां मिली थीं द्रौपदी मुर्मू ?

नई दिल्ली , 22 जुलाई। द्रौपदी मुर्मू अब देश की 15वीं राष्ट्रपति बन गई हैं, वो पहली आदिवासी महिला हैं, जो कि देश के सर्वोच्च पद पर आसीन होने जा रही हैं। 25 जुलाई को वो राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी। द्रोपदी मुर्मू का जीवन बहुत सारे उतार-चढ़ाव से गुजरा है, आज जिन मुर्मू को हम देख रहे हैं दरअसल वहां तक पहुंचने के लिए उन्हें बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

 मयूरगंज जिले के बैदपोसी गांव में हुआ था जन्म

मयूरगंज जिले के बैदपोसी गांव में हुआ था जन्म

ओडिशा के मयूरगंज जिले के बैदपोसी गांव में 20 जून 1958 को जन्मी द्रौपदी बचपन से ही काफी मेधावी थीं। पढ़ाई के प्रति उनकी लगन और शिद्दत का ही नतीजा रहा कि उन्हें अपने गांव से बाहर जाकर भुवनेश्वर के कॉलेज में पढ़ने का मौका मिला था, वो अपने गांव की पहली लड़की थीं, जिन्हें कॉलेज में पढ़ने के लिए गांव से बाहर भेजा गया था।

कॉलेज में हुई थी श्याम चरण मुर्मू से मुलाकात

कॉलेज में हुई थी श्याम चरण मुर्मू से मुलाकात

1969 से 1973 तक आदिवासी आवासीय स्कूल में पढ़ने वाली द्रौपदी ने भुवनेश्वर के रामा देवी कॉलेज में स्नातक करने के लिए दाखिला लिया और यहीं पर उनकी मुलाकात श्याम चरण मुर्मू से हुई थी। कॉलेज की ही पढ़ाई के दौरान दोनों की दोस्ती हुई और फिर ये दोस्ती कब प्रेम में बदल गई, इस बात का पता दोनों को ही नहीं चला। लेकिन उस वक्त प्रेम करना आसान नहीं था इसलिए द्रौपदी मुर्मू को भी इस बात के लिए काफी कुछ झेलना पड़ा। दरअसल जब दोनों लोगों का लगा कि अब शादी कर लेनी चाहिए उस वक्त द्रौपदी मुर्मू के घर पर हंगामा मच गया।

पिता बिरंची नारायण टुडू को मनाना पड़ा

पिता बिरंची नारायण टुडू को मनाना पड़ा

क्योंकि द्रौपदी के पिता बिरंची नारायण टुडू इस शादी के खि्लाफ थे लेकिन श्याम चरण मुर्मू ने हार नहीं मानी, उनके कुछ रिश्तेदार बैदपोसी गांव में ही रहते थे इसलिए वो उनके घर में ही रूक गए और लगातार तीन दिनों तक बिरंची नारायण टुडू को मनाने की कोशिश करने लगे, हालांकि उनकी कोशिश रंग लाई क्योंकि बिरंची नारायण टुडू उनके और द्रौपदी के रिश्ते के लिए मान गए, जिसके बाद साल 1980 में दोनों की शादी हो गई।

एक गाय, एक बैल और 16 जोड़ी कपड़े

एक गाय, एक बैल और 16 जोड़ी कपड़े

लेकिन आपको एक खास बात बताते हैं, दरअसल उस वक्त संथाल समुदाय की कन्या से शादी करने के लिए लड़के को दहेज देना होता था और इसलिए द्रौपदी को अपनी पत्नी बनाने के लिए श्याम चरण मुर्मू ने भी दहेज दिया और वो दहेज था एक गाय, एक बैल और 16 जोड़ी कपड़े और यही नहीं इस शादी में लाल-पीले चिकन की स्पेशल डिश बनी थी, जिसे कि गांव वालों ने बड़े ही चाव से खाया था।

दो जवान बेटों और पति का छूटा साथ

दो जवान बेटों और पति का छूटा साथ

इस शादी के बाद सबको लगा था कि द्रौपदी के जीवन के कष्ट खत्म हो जाएंगे लेकिन नियति के आगे किसी की नहीं चलती है और वो ही हुआ द्रौपदी के भी साथ। इस शादी से मुर्मू को तीन संतान हुए , जिसमें दो बेटे और एक बेटी रहे लेकिन उनके दो जवान बेटे अकाल मृत्यु के शिकार हो गए और यही नहीं उनके पति श्याम चरण मुर्मू का भी दिल का दौरा पड़ने से साल 2014 में निधन हो गया।

ना थकीं, ना टूटीं और ना बिखरीं

लेकिन कुदरत के इस क्रूर प्रहार के बाद भी द्रौपदी ने खुद को बिखरने नहीं दिया। वो पेशे से शिक्षिका थीं और इसलिए जिस घर में वो शादी करके आई थीं, उस घर को उन्होंने स्कूल में तब्दील कर दिया।

राजनीतिक जीवन

राजनीतिक जीवन

  • साल 1997 में राइरंगपुर नगर पंचायत के पार्षद चुनाव जीता।
  • 1997 में ही अनुसूचित जनजाति मोर्चा की उपाध्यक्ष बनीं।
  • रायरंगपुर सीट से 2000 और 2009 में भाजपा के टिकट पर विधायक बनीं।
  • ओडिशा सरकार में साल 2000 और 2004 के बीच मंत्री रहीं।
  • झारखंड की साल 2015 में गर्वनर बनीं ।
  • साल 2022 में देश की 15वीं राष्ट्रपति चुनी गई हैं।

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