'बहनजी' का बंगला बनाने वाले बिल्डर ने कराया अखिलेश-मायावती का गठबंधन!
कौन है वो शख्स, जिसने 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए अखिलेश यादव और मायावती के बीच महागठबंधन में पुल का काम किया।
नई दिल्ली। 2019 में उत्तर प्रदेश का चुनावी महासंग्राम जीतने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को साथ आते हुए महागठबंधन का आधिकारिक तौर पर ऐलान कर दिया। दोनों नेताओं ने 23 साल पुरानी 'सियासी दुश्मनी' को पीछे छोड़ते हुए 2019 के लोकसभा चुनाव में साथ मिलकर चुनाव लड़ने के लिए शंख फूंक दिया है। अखिलेश यादव और मायावती के बीच गठबंधन के कयास उसी वक्त लगने लगे थे, जब यूपी की गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में बसपा के समर्थन से समाजवादी पार्टी ने जीत का परचम लहराया था। इस जीत के बाद एक खास शख्स ने दोनों नेताओं के बीच आगे की बातचीत को रफ्तार दी। आइए जानते हैं उस शख्स के बारे में, जिसने सपा-बसपा के बीच महागठबंधन की नींव रखने का काम किया।

संजय सेठ ने कराई अखिलेश-माया की मुलाकात
अखिलेश यादव और मायावती 23 साल पुराने गेस्ट हाउस कांड को भुलाकर यूपी में एक बार फिर सपा-बसपा के झंडों को साथ लेकर आए हैं। मायावती और अखिलेश के बीच बातचीत की शुरुआत उस वक्त हुई, जब पिछले साल गोरखपुर और फूलपुर के चुनावी नतीजों में सपा ने बसपा के समर्थन से भाजपा को पटखनी दी और उसी शाम मायावती ने अखिलेश यादव के लिए मर्सडीज गाड़ी भिजवाई। अखिलेश यादव जब मायावती के सरकारी आवास '13 ए माल एवेन्यू' पहुंचे तो खुद बसपा सुप्रीमो ने गुलदस्ता देकर सपा अध्यक्ष का स्वागत किया। सूत्रों की मानें तो महागठबंधन के लिए अखिलेश यादव और मायावती की इस मुलाकात की जिस शख्स ने आधारशिला रखी, उनका नाम है संजय सेठ। संजय सेठ दोनों नेताओं के बीच हुई इस बेहद अहम मुलाकात में मौजूद भी थे। इस मुलाकात के बाद दोनों नेताओं के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत आगे बढ़ने लगी।

कौन हैं संजय सेठ?
संजय सेठ समाजवादी पार्टी में कोषाध्यक्ष के पद पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और वर्तमान में राज्यसभा के सांसद भी हैं। संजय सेठ की गिनती समाजवादी पार्टी के दिग्गज और जिम्मेदार नेताओं में होती है। सपा के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के करीबी नेताओं में शुमार संजय सेठ पेशे से बिल्डर हैं। मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव के साथ वो शालीमार कॉर्प नामक रियल स्टेट कंपनी में पार्टनर भी हैं। लखनऊ में बसपा सुप्रीमो मायावती, इटावा में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव का बंगला इन्होंने ही बनवाया था। बताया जाता है कि मुलायम सिंह यादव और अखिलेश के अलावा संजय सेठ के मायावती से भी बेहद अच्छे संबंध हैं।

सपा-बसपा के बीच यह है सीटों का गणित
आपको बता दें कि यूपी में महागठबंधन का ऐलान करते हुए सपा और बसपा ने 38-38 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है। अखिलेश-मायावती के महागठबंधन ने कांग्रेस को स्पष्ट तौर पर ना कर दिया है। बाकी बची 4 सीटों में दो सीटों पर बाद में निर्णय लिया जाएगा। माना जा रहा है कि इन दो सीटों को किसी नए सहयोगी के लिए रखा गया है। वहीं, अमेठी और रायबरेली में गठबंधन की ओर से कोई प्रत्याशी नहीं उतारा जाएगा। इन दोनों सीटों से क्रमश: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी चुनाव लड़ते रहे हैं। मायावती और अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिलहाल आरएलडी को लेकर भी कोई ऐलान नहीं किया गया है। मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस मे कहा कि सपा-बसपा का यह गठबंधन पीएम मोदी और अमित शाह की नींद उड़ाने वाला है।












Click it and Unblock the Notifications