Kidney Transplant में डॉक्टरों का कमाल, नवजात के कारण 58 साल की महिला को मिला 'नया जीवन'
सफल Kidney Transplant जैसी चीजें सुनने के बाद नया जीवन मिलने सरीखा एहसास होता है। यूं तो किसी भी ऑर्न का फेल होना जानलेवा बन सकता है, लेकिन किडनी का प्रत्यारोपण और इसकी सफलता बेहद जटिल प्रक्रिया है।
हैदराबाद के डॉक्टरों की टीम ने किडनी प्रत्यारोपण का ऐसा ही जटिल और दुर्लभ ऑपरेशन किया है। ब्रेन-डेड घोषित किए गए 14 महीने के शिशु से ली गई किडनी 58 वर्षीय महिला के शरीर में प्रत्यारोपित की गई।

पिछले सात वर्षों से डायलिसिस करा रही महिला की दुर्लभ सर्जरी के बारे में इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया कि ऑपरेशन हैदराबाद के कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (KIMS) के सर्जनों ने किया।
मेडिकल साइंस की दुनिया में आशा की किरण जैसी इस खबर के अनुसार मानव किडनी तीन साल की उम्र तक बढ़ती रहती है। प्रत्यारोपित किडनी महिला के शरीर के अंदर बढ़ती रहेगी।
14 महीने के नवजात की किडनी से 58 साल की महिला को मिली नई लाइफ के बारे में किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी करने वाली टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ. उमामहेश्वर राव ने बताया, यह सर्जरी अनोखी थी क्योंकि शिशु और महिला के अंगों के आकार में अंतर था।
राव ने मेडिकल बारीकियों का जिक्र करते हुए कहा, "कई पहलुओं पर सावधानीपूर्वक विचार के बाद डॉक्टरों ने एकत्रित किडनी के आकार और ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीज के शरीर पर मंथन किया।
उन्होंने कहा कि किडनी डोनर और रिसीव करने वाले मरीज के शरीर में उसकी स्वीकृति की संभावना कितनी है, इस बात पर गौर करना सबसे अहम होता है। डॉक्टरों ने बताया कि सभी पहलुओं पर विचार के बाद सर्जरी सुचारू रूप से आगे बढ़ी।

सर्जिकल टीम में डॉ. उमामहेश्वर राव के नेतृत्व में डॉ. पराग, डॉ. चेतन, डॉ. दिवाकर नायडू गज्जला, डॉ. वीएस रेड्डी, डॉ. गोपीचंद, डॉ. श्रीहर्ष, डॉ. नरेश कुमार और डॉ. मुरली मोहन शामिल थे।












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