केरल सरकार का बड़ा ऐलान, नए कृषि कानूनों को सुप्रीम कोर्ट में देगी चुनौती
नई दिल्ली। केरल की पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। केरल के कृषि मंत्री वीएस सुनील कुमार ने सोमवार को कहा है कि नए कृषि कानूनों को उनकी सरकार राज्य में नहीं लागू होने देगी साथ ही इनके खिलाफ इसी हफ्ते सुप्रीम कोर्ट जाएगी। सुनील ने ये भी कहा है कि नए कानून राज्यों के अधिकारों का अतिक्रमण और संघीय ढांचे के खिलाफ हैं क्योंकि कृषि समवर्ती सूची का विषय है। इसके बावजूद इन कानूनों को लाने से पहले राज्यों से कोई सलाह नहीं ली गई और किसानों से भी मशविरा नहीं किया गया।

कानून के जानकारों से मशविरे के बाद फैसला
सुनील कुमार ने कहा है कि नए कृषि कानूनों के बाद किसानों के अधिकारों को लेकर उनकी सरकार चिंतिंत है। इसी को लेकर राज्य सरकार ने माहिर लोगों से कानूनी राय मांगी थी। विशेषज्ञों ने कहा है कि इन कानूनों की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। जिसके बाद हमने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला लिया है। वहीं ये भी जानकारी है कि केरल सरकार पंजाब और राजस्थान की सरकारों के साथ इन मिलकर इन कानूनों के खिलाफ बड़े प्रोटेस्ट पर भी विचार कर रही है।

भाजपा ने की आलोचना
केरल सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले पर राज्य की भाजपा इकाई ने एतराज जताया है। विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने कहा कि राज्य सरकार अपना कुछ राजनीतिक नंबर बनाना चाहती है। यह कुछ और नहीं बल्कि सरासर नाटक है।

किसानों ने कल बुलाया है भारत बंद
केंद्र सरकार तीन नए कृषि कानून लेकर आई है, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने समेत कई प्रावधान किए गए हैं। इसको लेकर किसान जून से आंदोलनरत हैं। बीते 12 आठ दिन से किसान दिल्ली और हरियाणा को जोड़ने वाले सिंधु बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं। इसी को लेकर अब किसानों ने 8 दिसंबर को भारत बंद की घोषणा की है। किसानों के भारत बंद और आंदोलन को केरल की सत्ताधारी सीपीएम समेत विपक्षी के ज्यादातर दलों का समर्थन मिला है। शिवसेना, बसपा, आप, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसी, आरजेडी, एनसीपी, डीएमके, एआईएफबी, आरएसपी, सीपीआई, सीपीआईएम, सीपीआईएमएल, पीएजीडी ने किसानों को समर्थन दिया है।
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