बच्ची और पिता का महिला पुलिस ने किया था अपमान, बचाव कर रही सरकार को केरल हाई कोर्ट ने फटकारा
बच्ची और पिता का महिला पुलिस ने किया था अपमान, बचाव कर रही सरकार को केरल हाई कोर्ट ने फटकारा
नई दिल्ली, 21 दिसंबर: केरल हाई कोर्ट ने केरल की सरकार को फटकार लगाई है क्योंकि राज्य सरकार एक महिला पुलिस अधिकारी का बचाव कर रही थी, जिसने एक बच्ची और उसके पिता का अपमान किया है। ये घटना तिरुवनंतपुरम जिले की है। तिरुवनंतपुरम जिले के अत्तिंगल में एक महिला पुलिस अधिकारी ने आठ वर्षीय लड़की और उसके पिता का अपमान किया। जिसको लेकर पिता ने मुआवजे की मांग की है। मुआवजे को लेकर राज्य सरकार के रुख को देखकर हाई कोर्ट ने गुगली करार दिया है। मामला यह था कि महिला पिंक पुलिस ऑफिसर ने अगस्त में एक पिता और उसकी बेटी पर अपना मोबाइल फोन चोरी करने का आरोप लगाया था। लड़की के पिता की ओर से मुआवजे की मांगने का मामला हाई कोर्ट में पहुंच गया है। राज्य सरकार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए बने 'पिंक पेट्रोल' के पुलिस अधिकारी ने न तो कोई दुर्व्यवहार किया और न ही ऐसा कुछ किया जिससे बच्ची को मानसिक पीड़ा हो। इसे प्रमाणित करने के लिए चार गवाहों के बयान भी कोर्ट में पेश किए गए। राज्य ने बच्चे को मुआवजे देने से भी इनकार किया है।

जानिए क्या है पूरा मामला?
यह घटना 27 अगस्त 2021 की है, जब 38 वर्षीय जयचंद्रन और उनकी बेटी किसी काम के लिए बाहर जा रही थीं। अचानक महिला अधिकारी रेजिता ने सोचा कि उसका मोबाइल फोन गायब हो गया है और जयचंद्रन पर पुलिस गश्ती वाहन के पास खड़े होने का आरोप लगाया था। महिला पुलिस अधिकारी ने बच्ची के पिता पर फोन चोरी का आरोप लगाया है। उसने यहां तक कहा कि उसने अपनी आठ साल की बेटी को मोबाइल फोन दे दिया है।
महिला पुलिस ने सार्वजनिक रूप से पिता और बेटी की जोड़ी को अपमानित किया और दोनों को पास के पुलिस स्टेशन ले जाने की धमकी दी। इस घटना को वहां आसपास खड़े लोगों ने देखा। हालांकि बाद में महिला पुलिस अधिकारी का मोबाइल फोन वाहन में मिला। बाद में इस वीडियो को किसी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और वह वायरल हो गया था।
31 अगस्त को जयचंद्रन ने राज्य के पुलिस प्रमुख अनिल कांत से संपर्क कर रजिता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, क्योंकि उनकी बेटी सार्वजनिक रूप से डांटे जाने के कारण सदमे की स्थिति में हैं। राज्य के पुलिस प्रमुख अनिल कांत ने कार्रवाई का वादा करते हुए दक्षिण क्षेत्र की आईजी हर्षिता अटालूरी से जांच करने को कहा और रेजिता का तबादला कर दिया गया। हालांकि, यह पता चला कि रजिता को अधिक सुविधाजनक स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया था। सितंबर में, परिवार ने केरल सचिवालय के सामने एक दिवसीय धरना दिया। इस पर भी किसी का ध्यान नहीं गया तो परिवार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
बच्ची के परिवार का आरोप है कि सरकार अधिकारी को बचाने की कोशिश कर रही है और बच्चे को उसके मूल अधिकारों से वंचित कर रही है। जयचंद्रन ने मीडिया से कहा कि वे मामले को आगे बढ़ाएंगे और उन्हें अदालत पर भरोसा है।
29 नवंबर 2021 को बच्चे और उसके पिता को अपमानित करने वाले अधिकारी के दृश्यों को देखने के बाद, अदालत ने कहा कि उसका आचरण "खाकी का अहंकार'' को दिखाता है। न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन ने यह भी कहा कि अधिकारी ने बच्चे से माफी मांगने की भी जहमत नहीं उठाई। एक हफ्ते बाद महिला अधिकारी ने हाई कोर्ट को एक लिखित माफीनामा प्रस्तुत किया और कहा कि उसके भी घर पर बच्चे हैं। लेकिन न तो बच्ची और न ही उसके माता-पिता माफी स्वीकार करने के लिए तैयार थे क्योंकि अधिकारी ने केवल इसलिए माफी मांगी क्योंकि अदालत ने इसका उल्लेख किया था।
अदालत परिवार द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें परिवार ने 50 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की गई थी। हालांकि, अदालत ने कहा है कि 50 लाख रुपये प्रदान नहीं किए जा सकते क्योंकि यह बहुत अधिक राशि है।












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