सबरीमाला: दर्शन करने के लिए जाने वाली महिलाओं को सुरक्षा नहीं देगी केरल सरकार
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तिरुवनंतपुरम। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सबरीमाला मामले को सात जजों की एक पीठ को सौंप दिया है। इसके साथ ही आदेश दिया है कि, नया फैसला आने तक कोर्ट का 2018 का फैसला लागू रहेगा। अब 16 नवंबर से सबरीमाला मंदिर के द्वार फिर से खुलने जा रहे हैं। केरल सरकार ने किसी भी अनहोनी से बचने के लिए सबरीमाला परिसर में 17 हजार पुलिस जवान तैनात किए हैं। इसके साथ ही केरल सरकार ने साफ कर दिया है कि, कि मंदिर में प्रवेश के लिए जाने वाली महिलाओं को केरल सरकार की ओर से कोई सुरक्षा नहीं दी जाएगी।

दरअसल गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केरल के सीएम पिनराई विजयन ने इस मामले पर अपने मंत्रीमंडल सरकार के मंत्रिमंडल में ज्यादातर मंत्रियों की राय है कि कानून व्यवस्था को बनाए रखना चाहिए और महिला कार्यकर्ताओं को मंदिर से दूर रखा जाना चाहिए. सूत्रों ने हमें यह भी बताया कि इस साल जो महिला कार्यकर्ता सबरीमाला जाना चाहती हैं, पुलिस उनको सुरक्षा प्रदान नहीं करेगी।
केरल के मंत्री सुनील कुमार ने कहा, मंदिर राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने की जगह नहीं है। हमारी प्राथमिकता कानून और व्यवस्था पर ध्यान देना है। राज्य में मंदिर से जुड़े मंत्री काडाकंपाली सुरेंद्रन ने कहा कि सरकार महिलाओं को गेट तोड़कर मंदिर में घुसने के लिए प्रोत्साहित नहीं करेगी।तिरुवनंतपुरम में सुरेंद्रन ने प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर कहा कि मंदिर को यथास्थिति बनाए रखा जाए। सरकार शांति चाहती है।
त्रावणकोर देवासम बोर्ड के अध्यक्ष एन वसु ने कहा कि जो लोग कानूनी रूप से मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं, उन्हें रोका नहीं जाएगा। 28 सितंबर, 2018 को आए महिलाओं के मंदिर प्रवेश संबंधी आदेश पर कोई स्टे नहीं है। हम किसी को नहीं रोक रहे। कानूनी रूप से जो भी जाने के हकदार हैं, वे जा सकते हैं। हम किसी को नहीं रोकेंगे। आदेश पर हमें और स्पष्टता की जरूरत है। हमने कानूनी विशेषज्ञों की सलाह की मांग की है। यह दो दिनों में हमें मिल जाएगी, बोर्ड इस पर भी गौर कर रहा है।












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