Kerala Ernakulam blast: इजराइल-हमास जंग के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए क्यों है बड़ी चुनौती?
केरल में एर्नाकुलम के कलामसेरी में कंवेंशन सेंटर में यहोवा के साक्षियों (ईसाई) की प्रार्थना सभा के दौरान हुए तीन बड़े धमाके देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खड़ी नई चुनौतियों की ओर इशारा कर रहे हैं।
केरल के डीजीपी डॉ शेख दरवेश साहब के मुताबिक शुरुआती जांच से लगता है कि 'धमाके के लिए आईईडी डिवाइस का इस्तेमाल किया गया और हम इसकी जांच कर रहे हैं।' इस घटना की जांच के लिए नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को लगाया गया है। दिल्ली से एनएसजी की टीम भी भेजी गई है।

यहोवा के साक्षियों की प्रार्थना सभा को बनाया निशाना
कोच्चि में मौजूद एनआईए की एक टीम फौरन ही घटनास्थल के लिए रवाना कर दी गई। उसे स्थानीय पुलिस की भी मदद मिलेगी। लेकिन देश और दुनिया में बदले हुए हालातों की वजह से यह घटना बहुत ही संवेदनशील लग रही है। यहोवा के साक्षी ईसाई समुदाय का ही एक संप्रदाय है, जो मुख्यधारा के ईसाइयों से थोड़ी अलग परंपरा को अपनाते हैं।
प्रार्थना सभा का तीसरा और अंतिम दिन था
रविवार को कलामासेरी कंवेंशन सेंटर में यहोवा के साक्षियों की सभा का तीसरा और अंतिम दिन था। ऐसी प्रार्थना सभा दुनिया भर में समय-समय पर आयोजित होते रहते हैं। रविवार को ऐसी प्रार्थना सभाओं का मकसद ही यही होता है कि इसमें ज्यादा से ज्यादा लोग भाग ल सकें और लगता है कि हमले की साजिश रचने वालों ने इसकी प्लानिंग काफी सोच-समझकर की थी। इसलिए, घटना में एक की मौत और 30 से ज्यादा जख्मियों की संख्या बताई जा रही है।
इजराइल-हमास जंग के दौरान हुए धमाके
गौरतलब है कि इजराइल में जिस तरह से हमास के मुस्लिम आतंकवादियों ने हमला किया है और उसके बाद से जिस तरह से दोनों के बीच भयंकर जंग हो रही है, उससे पूरी दुनिया असहज हो चुकी है। भारत में भी हमास के हमले के बाद से खास सतर्कता बरती जा रही है।
केरल में इजराइल के खिलाफ माहौल बनाने की हो रही है कोशिश
तथ्य यह है कि केरल के कोच्चि के पास स्थित कलामासेरी में पहले कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों की काफी गतिविधियां देखी जा चुकी हैं, जिसमें से प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) जैसे संगठन भी शामल रहे हैं। एक बात और गौर करने वाली है कि जिस समय यह धमाके हुए है, उस दौरान केरल के कई इलाकों में कथित रूप से हमास के समर्थन और इजराइल-विरोधी भयंकर माहौल बनने की रिपोर्ट सामने आ चुकी है।
मलप्पुरम की रैली को हमास के पूर्व सरगना ने किया था संबोधित
खास बात यह है कि एक दिन पहले ही उत्तर केरल के मलप्पुरम में फिलिस्तीन के समर्थन में एक विशाल सभी आयोजित की गई थी, जिसे वर्चुल माध्यम से हमास का पूर्व सरगना खालिद मशाल ने भी संबोधित किया था। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार इस सभा में उसने जमात-ए-इस्लामी के लोगों से खासकर हिंदुओं और गैर-विश्वासियों के खिलाफ कार्रवाई का भी आह्वान किया था। यह मामला बहुत बड़े सियासी विवाद की भी वजह बन गया है और विपक्षी बीजेपी सत्ताधारी एलडीएफ पर आतंकवादियों के लिए नरम होने का आरोप लगा रही है।
इस बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता अल्फोंस केजे ने कहा है.....'हालात बहुत ही गंभीर हैं.....मैं लंबे वक्त से चेतावनी दे रहा हूं कि केरल में लेफ्ट और राइट दोनों आतंकवाद का समर्थन कर रहे हैं.....केरल में यह लंबे समय से चल रहा है....आज केरल आंकवाद की गिरफ्त में है....इसे रोकना होगा......।'
इस घटना के बाद केरल में 14 जिलों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दिल्ली पुलिस भी केरल के धमाके के बाद से हाई अलर्ट पर है। यूपी में भी हाई अलर्ट जारी किया गया है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि खुफिया एजेंसियों ने इजराइल की जंग को देखते हुए पहले ही देश में यहूदी ठिकानों पर संभावित हमलों का अलर्ट जारी किया था।












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