आप पार्टी का दुश्मन नहीं सच्चा दोस्त है आवाम संगठन
[अजय मोहन] अगर दो दिन से आप खबरों से जुड़े हुए हैं, तो आपके जहन में एक बात जरूर आ गई होगी कि दिल्ली के दंगल में 'आवाम' आम आदमी पार्टी की दुश्मन बनकर उतरी है। लेकिन अगर आप आवाम के संकल्प और उसकी विचारधारा का गहन अध्ययन करें तो आप पायेंगे कि आवाम आप पार्टी की दुश्मन नहीं है, बल्कि उस अच्छे दोस्त की तरह काम कर रहा है, जो अपने मित्र के अंदर जरा भी बुराई बर्दाश्त नहीं कर सकता।
संगठन का नारा है- "स्वराज की इस लड़ाई में, आप भी अपने अनुभव, जज़्बात और वो समस्याएं जिन्होंने आपको पार्टी के अन्दर या बाहर से तकलीफ दी है, सबको बताएं, और एक बेहतर AAP बनाएं।" यह नारा आवाम की वेबसाइट पर लिखा हुआ है।
आवाम के दिल के अंदर सुलग रही है यह बात
जब से अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद छोड़ा तब से आवाम के कार्यकर्ताओं के दिलों में यह बात कोयले की तरह सुलग रही है, "आम आदमी पार्टी में स्वराज को स्थापति करने के लिए आवाम ने सोलह अगस्त से सत्तर दिनों तक जन आन्दोलन करा मगर, वालंटियर्स की बात सुनने की जगह उनको देशद्रोही और गद्दार कहकर अपमानित करा गया! क्या इसी लिए हमने अपना तन मन धन लगाकर पार्टी को खड़ा किया था?"
अपने अधिकार की जंग लड़ रहा आवाम
आवाम संगठन इस वक्त उस अधिकार की जंग लड़ रहा है, जो उसे आप पार्टी से मिलना चाहिये। यह साबित होता है आवाम के इस नारे से, "पार्टी में स्वराज वालंटियर का अधिकार है, वालंटियर इसको लेकर ही रहेगा।" पढ़ें दिल्ली चुनाव पर विशेष कवरेज।













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