बिहार सम्मान-सरकारी संस्था का मजाक बनाते केजरीवाल
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) राजधानी की एक सरकारी और साहित्यिक संस्था का मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जमकर दुरुपयोग किया। दरअसल बुधवार को दिल्ली के मावलंकर हॉल में नीतीश कुमार के सम्मान में 'बिहार सम्मान समारोह' का भव्य आयोजन दिल्ली सरकार के मैथिली-भोजपुरी अकादमी के सहयोग से किया गया।
वरिष्ठ लेखकशिवानन्द द्विवेदी सहर कहते हैं कि सरकारी संस्थाओं में विचारधारा के घुसपैठ का आरोप भाजपा पर लगता है और खुलेआम डकैती दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री करते हुए नजर आ रहे हैं।
साहित्यिक उत्थान
उक्त अकादमी का गठन दिल्ली में भोजपुरी और मैथिली के साहित्यिक उत्थान के लिए किया गया था। ये संस्था पिछले कई सालों से भोजपुरी-मैथिली कवि सम्मेलन, संगोष्ठी आदि का साहित्यिक आयोजन करती रही है।
सियासी हितों के लिए
सहर मानते हैं कि यह पहली ही बार हुआ है कि इस संस्था का दुरूपयोग राजनीतिक हितों के लिए किया गया है। इस कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी के टोपीधारी कैडर्स को बसों में भर कर लाया गया था।
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क्यों बिहार सम्मान
भाषा से जुडी एक साहित्यिक संस्था का राजनीतिक हितों में इस्तेमाल करने का जो चलन आज दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने किया है, वो वाकई घातक है। सबसे बड़ा सवाल कि भाषाई संस्था के मंच पर अभी 'बिहार सम्मान समारोह' क्यों ? क्या भोजपुरी केवल बिहार की भाषा है?
अभी ही सरकारी पैसे पर नीतीश के साथ मंच साझा करने का औचित्य क्या था? अगर सम्मान ही देना था तो भिखारी ठाकुर और विद्यापति के नाम पर देते? भोजपुरी तो यूपी में बड़ी संख्या में लोग बोलते हैं, फिर यूपी के भोजपुरियों को दरकिनार क्यों किया गया?
आम आदमी पार्टी के 11 विधायकों का मंच से अभिनन्दन क्यों भई ? क्या यह उनका पार्टी कार्यक्रम था ? ये तमाम सवाल हैं जो दिल्ली सरकार से पूछे जा रहे हैं ?













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