KBC-12: 'मैं तोतला था, सब मुझपर हंसते थे' जब Boman Irani ने सुनाई थी अपने बचपन की कहानी

नई दिल्ली। बोमन ईरानी आज बॉलीवुड के दिग्गज कलाकारों में से एक हैं। जिनका अभिनय लोगों का दिल जीत लेता है। लेकिन उनके लिए बॉलीवुड तक पहुंचने का रास्ता उतना भी आसान नहीं था। यहां तक आने के लिए उन्होंने कई दिक्कतों का सामना किया है। यहां तक कि उन्हें अपनी निजी जिंदगी में भी काफी कुछ झेलना पड़ा है। बोमन ईरानी ने एक कार्यक्रम के दौरान इन्हीं सब बातों के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था कि उनका जन्म दिसंबर, 1959 में हुआ था। लेकिन इससे करीब 6 महीने पहले यानी मई में ही उनके पिता का निधन हो गया था। बोमन ईरानी हाल ही में कौन बनेगा करोड़पति शो के विशेष करमवीर एपीसोड में भी आए थे।

'आदमियों से डर लगता था'

'आदमियों से डर लगता था'

कुछ समय पहले एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया था, 'मैं अपने पिता के निधन के छह महीने बाद दुनिया में आया था। मेरे आसपास हमेशा कोई ना कोई औरत रहती थी। मेरी मां, मेरी तीन बहनें, मेरी मासियां, मेरे पिता की दो बहनें, उनकी दोस्त, मेरे अधिकतर कजिन्स में लड़कियां थीं। मुझे नहीं पता था कि आदमी कैसे दिखते हैं। मैंने किसी आदमी की आवाज नहीं सुनी थी। मैं किसी आदमी से नहीं मिला था, तो मुझे उनसे डर लगा करता था। मैं काफी डरा सहमा हुआ करता था। मेरे पड़ोस में जो बच्चे थे, उनके पिता काफी बॉसी थे। मैं उनकी आवाज सुनकर डर जाता था।'

'लोग मुझपर हंसा करते थे'

'लोग मुझपर हंसा करते थे'

अपनी हकलाने की परेशानी के बारे में बताते हुए बोमन ईरानी ने कहा था, 'एक अन्य परेशानी ये भी थी कि मेरी स्पीच में परेशानी थी। हिंदी में वो क्या कहते हैं, तोतला, मैं वही था। मैं तोतला था लेकिन मैं इस सबसे भी बाहर निकला। कुछ ऐसा ही जैसे वायरस थ्री इडीयट्स में बोलता है। अभी एक छोटे बच्चे के तौर पर आप लोग मुझे चीयर कर रहे हैं, वायरस की तरह बोलने के लिए। लेकिन जब मैं बच्चा था, लोग हंसते थे। और इससे मुझे शर्मिंदगी होती थी कि क्यों ये लोग मुझपर हंस रहे हैं। क्या मैं कोई बेवकूफ हूं। उन्होंने मुझमें ऐसा क्या ढूंढ़ लिया है, जिससे वो मुझे शर्मिंदगी महसूस करा रहे हैं। जब भी मैं बोलता था तो कोई ना कोई हंसने लगता था।'

बोमन ईरानी- मुझे लगा कि मैं ठीक नहीं हूं

बोमन ईरानी- मुझे लगा कि मैं ठीक नहीं हूं

उन्होंने आगे बताया, 'स्कूल में भी सब ऐसे ही हंसते थे। तो मुझे लगता था कि मुझमें कोई कमी है। मैं जब दूसरे बच्चों को देखता था, तो उनके साथ उनके माता-पिता दोनों होते थे। मुझे लगा कि मैं ठीक नहीं हूं। मामला और भी बदतर इसलिए था, क्योंकि मैं डिस्लैक्सिक था, डिस्कैल्कुलिक था और कई भी परेशानियां थीं। उस समय तक आमिर खान ने तारे जमीन पर फिल्म नहीं बनाई थी तो किसी को नहीं पता था कि डिस्लैक्सिया क्या होता है। तो वो लोग मुझे डफ्फर बोलते थे। जब मैं एंट्रेस एग्जाम के लिए एक स्कूल में गया तो वहां प्रिंसिपल ने कहा कि वो बस एक औपचारिकता के लिए मुझसे कुछ आसान सवाल पूछेंगे। वो बस तस्वीर दिखाकर जानवरों का नाम पूछेंगे। मैं साढ़े तीन साल का था, उन्होंने मुझे जानवरों की तस्वीर दिखाईं।'

7वीं कक्षा तक कुछ नहीं बोलते थे बोमन ईरानी

7वीं कक्षा तक कुछ नहीं बोलते थे बोमन ईरानी

बोमन ईरानी ने बताया, 'तब उन्होंने मुझे हॉर्स की तस्वीर दिखाई और मुझे कहा कि बोल नहीं सकते तो जवाब ही मत दो। मुझे वहां दाखिला नहीं मिला। हालांकि बाद में किसी वजह से मुझे दाखिला मिला गया। लेकिन परेशानी जारी रही। मैं 7वीं कक्षा तक कुछ नहीं बोलता था।' हालांकि बोमन ईरानी ने 10वीं कक्षा में पहुंचने के बाद इसमें सुधार करना शुरू किया। उन्होंने पढ़ाई पूरी करने के बाद दो साल तक ताज होटल में वेटर के तौर पर काम किया। इसके बाद वह अपनी मां के साथ बेकरी का काम करने लगे। उन्होंने करीब 14 साल तक ये काम किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात कोरियोग्राफर श्यामक डावर से हुई। उन्होंने कई फिल्मों में काम किया है और आज पूरी दुनिया उनके शानदार अभिनय के लिए उन्हें जानती है।

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