KBC 12 की हॉट सीट पर दिखे ग्लोबल टीचर अवार्ड विनर रंजीत दिसले, 7 करोड़ की प्राइज मनी में आधी कर दी दान

नई दिल्ली। Ranjitsinh Disale Wins Teacher Prize 2020: कौन बनेगा करोड़पति( Kaun Banega Crorepati 12)के इस हफ्ते के कर्मवीर स्पेशल एपिसोड में अमिताभ बच्चन(amitabh Bachchan) के साथ गर्ल्‍स हायर सेकंडरी स्‍कूल जहांगीराबाद, भोपाल की प्रिसिंपल उषा खरे और जिला परिषद प्राइमरी-सेकंडरी स्‍कूल परीतेवाड़ी सोलापुर, महाराष्‍ट्र के रंजीत दिसले( Ranjit Disale ) नजर आए। बच्चन ने बताया कि, रंजीत दिसले ने हाल ही में ग्लोबल टीचर प्राइज 2020 जीता है। उन्हें 140 देशों और 12,000 टीचर्स ने के बीच से चुना गया है। यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय हैं। ग्लोबल टीचर अवार्ड की प्राइज मनी दस लाख डॉलर (7.38 करोड़) है। रंजीत सिंह दिसाले को ग्लोबल टीचर प्राइज लड़कियों के शिक्षा को बढ़ावा देने और देश में त्वरित कार्रवाई (क्यूआर) कोड वाली पाठ्यपुस्तक क्रांति को ट्रिगर करने के लिए मिला है।

खुद बिग-बी ने वीडियो कॉल पर दी थी बधाई

खुद बिग-बी ने वीडियो कॉल पर दी थी बधाई

बिग बी ने खुलासा किया कि उन्होंने अवॉर्ड जीतने के कुछ दिनों पहले रंजीत दिसले के साथ एपिसोड रिकॉर्ड किया था। उनकी इस उपलब्धि के लिए बाद में बिग बी वीडियो कॉल के माध्यम से उन्हें बधाई दी थी। रंजीत ने इस अवॉर्ड को उन सभी शिक्षकों को समर्पित किया है जो अनेकों गावों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इतना ही नहीं ग्लोबल टीचर प्राइज जीतने के बाद रंजीत सिंह दिसले ने अपनी प्राइज राशि का आधा हिस्सा अपने साथी प्रतिभागियों को उनके अतुल्य कार्य में मदद के लिए दान में दे दिया।

बदल दिया शिक्षा का तरीका

बदल दिया शिक्षा का तरीका

बता दें कि रंजीत सिंह दिसले महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के खांडवी में जिला परिषद प्राइमरी स्कूल में शिक्षक हैं। इन्होंने बालिका शिक्षा में नवाचार किया है। खांडवी के सरकारी स्कूल की बच्चियां किताबों के साथ क्यूआरडी कोड स्कैन करके भी पढ़ाई करती हैं। शिक्षक रंजीत सिंह दिसले के प्रयासों का ही नतीजा है कि इस सरकारी स्कूल की बच्चियां ऑनलाइन अन्य देशों के स्कूली बच्चों से संवाद भी करती हैं। उनकी भाषा औरपढ़ाई समझने की कोशिश करती हैं। इसको रंजीत ने वर्चुअल फील्ड ट्रिप योजना का नाम दिया है।

किताबों को जोड़ा क्यूआर कोड से

किताबों को जोड़ा क्यूआर कोड से

रंजीत सिंह दिसले बताते हैं कि वे एक बार को सामान लाने दुकान पर गए थे। वहां उन्होंने दुकानदार को क्यूआरडी स्कैन करके डिजीटल पैमेंट पाते देखा तो रणजीत के दिमाग में क्यूआरडी कोड का इस्तेमाल बच्चियों की पढ़ाई में करने का विचार आया। ऐसे में रंजीत ने पुस्तक में गद्य भाग के वीडियो और कविताओं के ऑडियो फॉरमेट तैयार करवाए। पुरस्क में क्यूआरडी कोड भी छपवाया। जिसे स्कैन करने के बाद स्कूली बच्चियां न केवल पढ़ सकती हैं बल्कि देख और सुनकर भी पढ़ाई कर सकती हैं। रंजीत सिंह के इसी नवाचार के चलते उन्हें ग्लोबल टीचर अवार्ड से सम्मानित किया गया है।

माइक्रोसॉफ्ट ने 300 आविष्कारों की सूची में मिली जगह

माइक्रोसॉफ्ट ने 300 आविष्कारों की सूची में मिली जगह

सरकारी स्कूल की लड़कियों को पढ़ाने के लिए टीचर रंजीत सिंह डिसले द्वारा किए गए इस अनूठे प्रयास की दुनियाभर में प्रशंसा हो रही है। आईटी कम्पनी माइक्रोसॉफ्ट ने रंजीत के नवाचार को कमाल का आविष्कार माना है। इसे माइक्रोसॉफ्ट ने 300 आविष्कारों की सूची में जगह दी है। रंजीत के इसी आइडिया पर अब 11 देशों के स्कूली बच्चों की किताबें तैयार की जा रही हैं।

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