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जेके रोलिंग के गिफ्ट का इंतज़ार करती ये कश्मीरी लड़की

By Bbc Hindi
कुलसुम
RIYAZ MASROOR/BBC
कुलसुम

हाजी पब्लिक स्कूल की बदौलत ब्रेसवाना के बच्चे इस सुदूर पहाड़ी गांव की अंग्रेज़ी बोलने वाली पहली पीढ़ी हैं. इस स्कूल ने उन्हें बेहतर शिक्षा, उनके लिए साहित्य पुस्तकों की उपलब्धता और सोशल मीडिया तक उनकी पहुंच बनाई है.

इसी स्कूल के विद्यार्थियों में 12 वर्षीय कुलसुम हैं. स्कूल की लाइब्रेरी में पहली बार हैरी पॉटर की किताब पढ़ने के साथ ही कुलसुम इस पर मोहित हो गईं.

वो कहती हैं, "मैं पार्ट-1 घर ले गई और इसे पढ़ते ही रोमांचित हो गई."

कुलसुम का लेख
RIYAZ MASROOR/BBC
कुलसुम का लेख

जेके रोलिंग पर लेख

जब एक बार उनके क्लास टीचर ने 'अपने सबसे पसंदीदा व्यक्तित्व' पर लेख लिखने को कहा तो कुलसुम ने गूगल और यूट्यूब की मदद से हैरी पॉटर की लेखिका पर लेख लिखा.

कुलसुम याद करती हैं, "सर्च से मुझे पता चला कि कैसे जेके रोलिंग कठिनाइयों से लड़ीं."

सबा का ट्वीट
BBC
सबा का ट्वीट

लेख को पढ़ने के बाद कुलसुम की टीचर इसे ट्वीट करने से खुद को नहीं रोक सकीं और उस पर अप्रत्याशित रूप से जेके रोलिंग का जवाब भी आया.

https://twitter.com/jk_rowling/status/989559245996773376

रोलिंग ने कुलसुम की टीचर के ट्वीट के जवाब में लिखा, "क्या आप मुझे कुलसुम का पूरा नाम डायरेक्ट मैसेज से भेज सकती हैं? मैं उन्हें कुछ भेजना चाहती हूँ."

स्कूल की प्रिसिंपल और कुलसुम की टीचर सबा हाजी ने बतया रोलिंग के इस जवाब का महत्व समझने के लिए कुलसुम अभी बहुत छोटी है.

सबा कहती हैं, "यह एक बड़ी उपलब्धि है. कुससुम इसके महत्व को नहीं समझ सकतीं. अगर रोलिंग हाथ से लिखा एक नोट भेजती हैं तो यह कुसलुम के साथ ही स्कूल के लिए सम्मान चिह्न के रूप में होगा."

सबा सऊदी अरब और बेंगलुरू में रह चुकी हैं लेकिन अपने गांव ब्रेसवाना में एक अच्छा स्कूल खोलने के उद्देश्य से वापस लौट आई.

यहां पहुंचने के लिए पहले डोडा से 55 मील चट्टानी सड़कों से होकर जाना पड़ता है
RIYAZ MASROOR/BBC
यहां पहुंचने के लिए पहले डोडा से 55 मील चट्टानी सड़कों से होकर जाना पड़ता है

श्रीनगर से पहाड़ियों पर 200 किलोमीटर की ड्राइव कर डोडा शहर पहुंचने के बाद 55 मील चट्टानी सड़क और फिर चार मील घोड़े पर चल कर आप ब्रेसवाना पहुंचते हैं, जहां हाजी पब्लिक स्कूल ऐसी एकमात्र संस्था है जो इंग्लिश मीडियम में पढ़ाती है.

यहां बिना किसी पारिश्रमिक के स्वेच्छा से भारत के विभिन्न शहरों के लोग पढ़ाते हैं और सबा को यकीन है कि यह स्कूल इस दुर्गम्य गांव में 'नॉलेज क्रांति' लाएगा.

कुलसुम
RIYAZ MASROOR/BBC
कुलसुम

महत्वाकांक्षा

कुलसुम को डॉक्टरी या इंजीनियरिंग जैसे प्रचलित पेशे में जाने की महत्वकांक्षा नहीं है. वो लेखिका, गायिका और कलाकार बनना चाहती हैं.

कुलसुम ऐसी एकमात्र लड़की नहीं हैं जो साहित्य, फ़िल्में और हैरी पॉटर की ओर आकर्षित हैं. कुलसुम की सहपाठी इफ़रा फ़रीद भी जेके रोलिंग की तरह उपन्यासकार बनना चाहती हैं.

इफ़रा फ़रीद
RIYAZ MASROOR/BBC
इफ़रा फ़रीद

वो बेतकल्लुफ अंग्रेज़ी में कहती हैं, "मैं कुससुल को लेकर खुश हूं. लेकिन मैं भी हैरी पॉटर पढ़ती हूं. मैं एक उपन्यासकार बनना चाहती हूं. एक दिन मैं जेके रोलिंग से मिलूंगी."

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English summary
Kashmiri girl waiting for the gift of JK Rolling

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