कश्मीर घाटी से सेना की वापसी पर विचार कर रही है केंद्र सरकार- रिपोर्ट
केंद्र सरकार कश्मीर में सामान्य हालात की वास्तविकता दिखाने के लिए आंतरिक इलाकों से सेना को वापस बुलाने पर विचार कर रही है। कानून-व्यवस्था और आतंकवाद-विरोधी अभियानों के लिए उनकी जगह सीआरपीएफ की तैनाती बढ़ सकती है।

केंद्र सरकार कश्मीर घाटी के अंदरूनी इलाकों से सेना की वापसी पर गंभीरता से विचार कर रही है। करीब साढ़े तीन साल पहले 2019 में जब मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा हटाने के लिए आर्टिकल-370 खत्म किया था, तो वहां सेना की अतिरिक्त तैनाती की गई थी। लेकिन, अब जानकारी मिल रही है कि सरकार कश्मीर के अंदरूनी इलाकों से सेना को पूरी तरह से हटाने का मन बना चुकी है और सिर्फ राजनीतिक फैसला लेना बाकी है। अगर केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया तो केंद्र शासित प्रदेश में सेना की तैनाती सिर्फ नियंत्रण रेखा (LoC) पर ही रह जाएगी।

कश्मीर घाटी के आंतरिक इलाके से सेना हटाने पर विचार-रिपोर्ट
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा संस्थानों से जुड़े अधिकारियों ने बताया है कि कश्मीर के आंतरिक इलाकों से सेना की वापसी पर विचार पिछले करीब दो वर्षों से चल रहा है, जो कि अब 'एडवांस स्टेज' में है। अब इसपर रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय और सशस्त्र सेना और जम्मू और कश्मीर पुलिस के बीच चर्चा हो रही है। ऐसा प्रस्ताव है कि सेना को घाटी से हटाए जाने की स्थिति में कानून और व्यवस्था के साथ-साथ आंतकवाद-विरोधी कार्रवाइयों के लिए उसकी जगह सीआरपीएफ की तैनाती की जाएगी।

सिर्फ राजनीतिक फैसले का इंतजार- रिपोर्ट
एक सुरक्षा संस्थान से जुड़े बड़े अधिकारी ने बताया, 'इस मामले पर मंत्रालयों के स्तर पर आपस में गंभीर चर्चा हो रही है और माना जा रहा है कि यह करना संभव है। एक तरह से फैसला हो चुका है और सवाल यह है कि इसे लागू कब किया जाता है। क्योंकि, आखिरकार यह एक राजनीतिक फैसला होगा।' रिपोर्ट के मुताबिक खबर प्रेस में जाने तक इसपर सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना से कोई जवाब नहीं मिल पाया।

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'कश्मीर घाटी में आंतरिक सुरक्षा के लिए तैनात है सेना'
अधिकारियों के मुताबिक पूरे जम्मू-कश्मीर में इस समय सेना के 1.30 लाख जवानों की तैनाती है, जिसमें से करीब 80,000 सीमा पर तैनात हैं। राष्ट्रीय राइफल्स के करीब 40,000 से 45,000 जवानों को कश्मीर के अंदरूनी इलाकों में आतंकवाद-विरोधी अभियानों के लिए तैनात किया हुआ है।
सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर की भी भारी तैनाती
वहीं जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ के लगभग 60,000 जवान तैनात हैं, जिनमें से 45,000 से ज्यादा कश्मीर घाटी में मौजूद हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस के पास 83,000 जवान हैं। इनके अलावा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की भी कुछ कंपनियां घाटी में तैनात की गई हैं। इनकी संख्या घाटी के हालात को देखते हुए घटती-बढ़ती रहती है।
आर्टिकल-370 हटने से हिंसा में आई जबर्दस्त कमी
जानकारी के मुताबिक सेना की कश्मीर घाटी से वापसी के पीछे की सोच ना सिर्फ वहां सामान्य हालात होने का दावा करना है, बल्कि वास्तविकता में उसे दिखाना भी है। सरकार का दावा है कि 5 अगस्त, 2019 को आर्टिकल 370 हटाने के बाद से कश्मीर में आतंकी हिंसा और सुरक्षा बलों की हत्या के मामले में पहले की तुलना में 50 फीसदी की कमी आ चुकी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, '5 अगस्त, 2019 के फैसले के बाद घाटी में हिंसा में लगातार कमी आई है। पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग खत्म हो चुकी हैं और कानून-व्यवस्था के हालात आमतौर पर नियंत्रण में हैं। लेकिन, अंदरूनी इलाकों में इंडियन आर्मी की ज्यादा मौजूदगी सामान्य स्थिति के दावों से फिट नहीं बैठेगी।'












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