करतारपुर साहिब: सबसे पहले वाजपेयी ने पेश किया प्रस्ताव, मनमोहन सिंह ने शुरू की थी वार्ता
अमृतसर। नौ नवंबर को भारत और पाकिस्तान के बीच एक नई शुरुआत देखने को मिलेगी जब कई दशकों से अटका करतारपुर कॉरिडोर वाकई श्रद्धालुओं के लिए खुलेगा। पिछले वर्ष नवंबर में इस कॉरिडोर की नींव रखी गई थी। लेकिन भारत के पंजाब से पाकिस्तान के पंजाब में मौजूद इस गुरुद्वारे की चार किलोमीटर की दूरी को तय करने में कई सदियों का समय लग गया। सिख धर्म के श्रद्धालुओं को करतारपुर स्थित दरबार साहिब के दर्शन के लिए इस कॉरिडोर के जरिए जाना एक सपने के सच होने जैसा है। सात दशक बाद अब सह सपना पूरा हो रहा है।

1999 में वाजपेयी ने दिया प्रस्ताव
पंजाब के गुरुदासपुर में आने वाला डेरा बाबा नानक, भारत पाकिस्तान के बॉर्डर से सिर्फ एक किलोमीटर की दूरी पर है। करतारपुर साहिब को बॉर्डर से नंगी आंखों से देखा जा सकता है और इसकी दूरी चार से पांच किलोमीटर के बीच है। बंटवारे के बाद से श्रद्धालु एक दूरबीन की मदद से ही इस गुरुद्वारे के दर्शन कर पाते हैं। करतारपुर साहिब एक पवित्र जगह है लेकिन सीमा विवाद का असर इस पवित्र स्थल पर भी पड़ा है। पिछले वर्ष भले ही करतारपुर कॉरिडोर का ऐलान करके पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने भारतीय सिखों के बीच खुद को हीरो साबित करने की कोशिश की हो लेकिन इसका पहला प्रस्ताव पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तरफ से दिया गया था।

इंदिरा गांधी ने किया था जमीन लेने का वादा
साल 1969 पहला मौका था जब गुरुनानक देव जी की 500 वीं जन्मतिथि के मौके पर तत्कालीन इंदिरा गांधी ने पंजाब की सरकार से वादा किया था कि पाकिस्तान के साथ जमीन लेकर करतारपुर साहिब को भारत में शामिल किया जाएगा। इंदिरा गांधी ने कहा था कि केंद्र की तरफ से पाक सरकार से बात की जाएगी और उन्हें करतारपुर साहिब के बदले भारतीय इलाके का एक हिस्सा दिया जाएगा। उन्होंने ने भी नानकाना साहिब में वीजा फ्री एंट्री का भरोसा सिखों को दिया था। फिर 1971 में हुई जंग की वजह से सब-कुछ वहीं का वहीं रह गया।
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इंदिरा गांधी ने किया था जमीन लेने का वादा
साल 1969 पहला मौका था जब गुरुनानक देव जी की 500 वीं जन्मतिथि के मौके पर तत्कालीन इंदिरा गांधी ने पंजाब की सरकार से वादा किया था कि पाकिस्तान के साथ जमीन लेकर करतारपुर साहिब को भारत में शामिल किया जाएगा। इंदिरा गांधी ने कहा था कि केंद्र की तरफ से पाक सरकार से बात की जाएगी और उन्हें करतारपुर साहिब के बदले भारतीय इलाके का एक हिस्सा दिया जाएगा। उन्होंने ने भी नानकाना साहिब में वीजा फ्री एंट्री का भरोसा सिखों को दिया था। फिर 1971 में हुई जंग की वजह से सब-कुछ वहीं का वहीं रह गया।

मनमोहन ने शुरू की वार्ता
साल 2004 में जब मनमोहन सिंह पहली बार प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने भी पंजाब में दिए अपने भाषण में इस कॉरिडोर का जिक्र किया। भारत और पाक के बीच इसी वर्ष कॉरिडोर को लेकर वार्ता शुरू हुई और साथ ही अमृतसर-लाहौर-करतारपुर रोड लिंक को श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। मनमोहन सिंह 550 लोगों के उस जत्थे में शामिल हैं जो 9 नवंबर को करतारपुर साहिब के दर्शन को जाएंगे।












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