Karnataka Shiggaon By-Election Result: लिंगायतों के गढ़ में 25 साल बाद मुस्लिम MLA,कैसे चला कांग्रेस का दांव?
Karnataka Shiggaon By-Election Result 2024 in Hindi:कर्नाटक के शिगगांव विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी यासिर अहमद खान पठान की जीत बहुत ही अप्रत्याशित मानी जा सकती है। 1999 के बाद से यहां पहली बार कोई मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीता है। यह सीट पूर्व सीएम और बीजेपी के दिग्गज बसवराज बोम्मई के लोकसभा चुनाव जीतने की वजह से इस्तीफे के बाद खाली हुई थी और पार्टी ने उनके बेटे भरत बोम्मई पर दांव लगाया था।
शिगगांव विधानसभा सीट में इस बार कांग्रेस प्रत्याशी यासिर अहमद खान पठान 13,448 वोटों से बीजेपी के भरत बोम्मई से जीत गए हैं। पठान को 1,00,756 वोट मिले हैं, जबकि बोम्मई को 87,308 वोट आए है। बसवराज बोम्मई इससे पहले लगातार पांच बार शिगगांव से बीजेपी का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

बोम्मई परिवार की गढ़ बन चुकी थी शिगगांव सीट
कर्नाटक की हावेरी जिले की इस सीट पर सबसे ज्यादा आबादी लिंगायतों की है और बोम्मई उसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। हालांकि, वह इसी की कम जनसंख्या वाली उपजाति सदर लिंगायत से जुड़े हैं, लेकिन यहां से बीजेपी प्रत्याशी का हारना बहुत मायने रखता है।
25 साल बाद शिगगांव को मिला मुस्लिम MLA
शिगगांव में पहले भी मुसलमान विधायक चुने जा चुके हैं, लेकिन 1999 के बाद यहां से कोई मुस्लिम प्रत्याशी नहीं जीत सका था। पहले यह सीट चार दशकों से ज्यादा समय तक कांग्रेस की गढ़ रह चुकी है, लेकिन बाद में पूरी तरह से बीजेपी के किले में तब्दील हो गई।
शिगगांव में 27% से अधिक मुस्लिम
लेकिन, 27% से अधिक मुस्लिम आबादी को देखते हुए कांग्रेस हार के बावजूद लगातार 6 बार से यहां मुसलमान प्रत्याशी पर ही दांव लगाती आ रही थी, जो इस बार कामयाब हो गई है। 2004 से लेकर 2018 तक यहां कांग्रेस प्रत्याशी सैयद अजीम पीर कादरी लगातार चार बार चुनाव हारे थे।
2019 में बड़े मार्जिन से जीती थी बीजेपी
2019 में पार्टी ने यहां से पठान को ही टिकट दिया था, लेकिन तब वे बसवराज बोम्मई से बहुत बड़े अंतर से हार गए थे। इस सीट पर अपने दबदबे को देखते हुए बीजेपी ने इस बार बोम्मई परिवार की तीसरी पीढ़ी को मौका दिया था। भरत के पिता से पहले उनके दादा एसआर बोम्मई भी सीएम रह चुके थे।
हालांकि, लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को इस सीट से बढ़त मिली थी, लेकिन उसने अभी बीजेपी की आंतरिक कलह को भुनाने में भी सफलता हासिल की है। कांग्रेस को चुनाव से पहले यहां पहली सफलता तब मिली जब बागी के तौर पर नामांकन करने वाले कादरी से नामांकन वापस करवाने में वह सफल हो गई।
सिद्दारमैया का अहिंदा कार्ड यहां भी चल गया?
शिगगांव में लिंगायतों के अलावा कुरुबा जाति के मतदाता भी बड़ी तादाद में हैं। वहीं दलितों की आबादी भी 2011 की जनगणना के अनुसार 13% से ज्यादा और आदिवासियों की करीब 6% है।
माना जा रहा है कि शिगगांव में कांग्रेस की जीत में सिद्दारमैया की अपनी जाति का वोट बैंक और उनके 'अहिंदा' समीकरण ने काम किया है, जिसमें वह मुसलमान, पिछड़े और दलितों को साधने की कोशिश करते रहे हैं।












Click it and Unblock the Notifications