कर्नाटक को भारी न पड़ जाए कांग्रेस का रिजर्वेशन वाला दांव, IT सेक्टर को ये सारे राज्य लपकने को तैयार
Karnataka Reservation Bill impact on IT Sector: कर्नाटक में प्राइवेट सेक्टर में लोकल लोगों के लिए नौकरियां आरक्षित करने वाला कांग्रेस सरकार का दांव उलटा पड़ सकता है। सिद्दारमैया के फैसले से परेशान टेक्नोलॉजी कंपनियों को अन्य राज्यों से ऑफर मिलने शुरू हो गए हैं।
कांग्रेस सरकार किसके पांव में मार रही है कुल्हाड़ी?
तथ्य ये है कि कर्नाटक की जीडीपी में टेक सेक्टर का योगदान 25% है। देश की एक-चौथाई डिजिटल कौशल इसे बढ़ाने में दिन-रात लगे हुए हैं।

आज कर्नाटक 11,000 से ज्यादा स्टार्टअप्स का ठिकाना बन चुका है। यही नहीं ग्लोबल कैपिसिटी सेंटर्स (GCC) का 30% हिस्सा इसी के पास है। लेकिन अगर ये कंपनियां यहां से निकल जाने की ठान लें तो कन्नडिगा के लिए इनमें नौकरियां आरक्षित करके ही क्या होगा?
जब नौकरियां ही खत्म कर देगी तो कांग्रेस किसे देगी आरक्षण?
कर्नाटक में अगर टैलेंट की जगह स्थानीय लोगों को नौकरी देने के लिए कंपनियों को मजबूर किया जाएगा तो टेक्नोलॉजी कंपनियों को यहां से बाहर जाने के अलावा क्या विकल्प बचेगा। क्योंकि, यहां पहले से भी समस्याओं का अंबार लग चुका है।
नैसकॉम की चिंता को दूर करने के लिए आंध्र प्रदेश ने दिया ऑफर
जब भारत में 245 बिलियन डॉलर की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री की सर्वोच्च संस्था नैसकॉम (NASSCOM) को यह चिंता सता रही है, तो इसकी भयानकता का अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन, इससे दूसरे राज्यों की उम्मीदें बढ़ गई हैं और ऐसी कंपनियों अपने यहां कारोबार शुरू करने का ऑफ दिया जा रहा है।
नैसकॉम की चिंता पर सबसे पहले आंध्र प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने फौरन ही नैसकॉम को विशाखापट्टनम के आईटी, आईटी सर्विसेज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर क्लस्टर में सारे बिजनेस लाने का ऑफर दिया है।
चंद्रबाबू सरकार के ऑफर को गंभीरता से ले सकते हैं आईटी सेक्टर
उन्होंने अपने राज्य में टेक्नोलॉजी कंपनियों को हर तरह की सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाने का भरोसा भी दिया है। आंध्र प्रदेश में अभी सत्ता परिवर्तन हुआ है। चंद्रबाबू हैदराबाद को देश के आईटी और औद्योगिक हब के रूप में पहचान दिलाने के लिए जाने जाते हैं।
इसलिए उनकी सरकार का ऑफर मायने रखता है। वैसे भी आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम, विजयवाड़ा और तिरुपति जैसे शहर पहले से ही टियर-2 टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित हो रहे हैं।
बेंगलुरु में पहले ही रही है समस्याओं का अंबार
सिद्दारमैया सरकार ने आईटी सेक्टर को ऐसे समय में टेंशन दिया है, जब बेंगलुरु शहर में रोजाना की ट्रैफिक समस्या, कभी सूखा और कभी बाढ़ जैसी दिक्कतों के चलते यह पहले से ही दूसरे विकल्पों पर विचार कर रहा है।
बेंगलुरु का उजाड़कर किसे फायदा पहुंचाना चाहती है कांग्रेस सरकार?
अकेले बेंगलुरु शहर से भारत का एक-तिहाई सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट होता है। यहां 3,500 से ज्यादा आईटी कंपनियां और 79 से अधिक टेक्नो पार्क हैं। लेकिन, कांग्रेस सरकार के एक फैसले ने एक ही झटके में सबके सामने सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
IT सेक्टर को ये सारे राज्य लपकने को तैयार
नैसकॉम की एक रिपोर्ट पहले आई थी, जिसके मुताबिक बेंगलुरु की तुलना में अन्य जो टेक्निकल हब उभरे हैं, वहां 25 से 30% कम लागत में ज्यादा योग्य टैलेंट उपलब्ध हो रहे हैं।
ऐसे पहले टेक्नोलॉजी हब के रूप में उभरने वालों में 6 बड़े शहर हैं। दिल्ली-एनसीआर (दिल्ली-हरियाणा-यूपी), हैदराबाद (तेलंगाना), चेन्नई (तमिलनाडु), कोलकाता (पश्चिम बंगाल), मुंबई और पुणे (महाराष्ट्र)।
लेकिन, टेक-2 हब वाले विशाखापट्टनम जैसे शहरों की तो एक पूरी लंबी फेहरिस्त है। इसलिए कांग्रेस सरकार ने प्रदेश की जनता में वाहवाही बटोरने के नाम पर लगता है कि 'आ बैल मुझे मार' वाली स्थिति पैदा कर दी है।












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