कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बड़े संकट की ओर बढ़ रही है कांग्रेस! सरकार के पास क्या हैं विकल्प?

Karnataka Congress News: कर्नाटक में लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। राज्य में कांग्रेस के कुछ मंत्रियों की ओर से उपमुख्यमंत्री के नए पद गठित करने की जो मांग शुरू की गई, वह अब मुख्यमंत्री के पद तक पहुंच चुकी है।

कांग्रेस के सामने संकट ये है कि कर्नाटक की दो सबसे प्रभावशाली माने जाने समुदाय वोक्कालिगा और वीरशैव-लिंगायतों को ओर से सीएम की कुर्सी पर खुली दावेदारी जता दी गई है। इससे पहले तो बात सिर्फ तीन नए डिप्टी सीएम बनाने की चल रही थी और मामला दिल्ली दरबार तक पहुंचने की खबरें थीं।

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वीरशैव-लिंगायत संत ने की समुदाय के मंत्री को सीएम बनाने की मांग
एक वोक्कालिगा संत की ओर से उनके समुदाय से आने वाले उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को सीएम बनाने की मांग के एक दिन बाद ही वीरशैव-लिंगायत समुदाय के एक प्रमुख संत ने शुक्रवार को गुजारिश की है कि अगर सीएम बदलने की बात उठती है तो उनके समुदाय से आने वाले मंत्रियों के नाम पर प्राथमिकता से विचार होना चाहिए।

डिप्टी सीएम के पद पर भी जताया लिंगायत समुदाय का दावा

यही नहीं श्रीशैल जगद्गुरु चन्ना सिद्धराम पंडिताराध्य स्वामीजी ने कहा है कि अगर प्रदेश में कोई अतिरिक्त उपमुख्यमंत्री का पद बनता है तो उसके लिए भी लिंगायतों पर विचार होना चाहिए, क्योंकि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनाने में उनके समाज की अहम भूमिका रही है।

उन्होंने कहा, 'कर्नाटक राज्य की राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े जो समाचार आ रहे हैं, वह चर्चा में हैं। अगर मुख्यमंत्री के पद पर बदलाव होता है और अगर उपमुख्यमंत्री के पद गठित होते हैं, ऐसी स्थिति में मैं पार्टी (कांग्रेस) और सरकार से वीरशैव-लिंगायत समुदाय से आने वाले मंत्रियों को प्राथमिकता देने का आग्रह करता हूं।'

विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को वोट के बदले सीएम की कुर्सी देने की मांग
उनका कहना है कि 'इसका कारण ये है कि सरकार बनने के दौरान वीरशैव-लिंगायत वोट निर्णायक रहे थे। इसलिए वीरशैव-लिंगायत मंत्रियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। ईश्वर खान्ड्रे, एमबी पाटिल, एएस मल्लिकार्जुन जैसे मंत्री हैं....इन लोगों पर विचार होना चाहिए और उनके अनुभवों का उपयोग किया जाना चाहिए। मैं आग्रह करता हूं कि इन्हें अवसर दिया जाना चाहिए।'

वोक्कालिगा संत कर चुके हैं डीके शिवकुमार को सीएम बनाने की मांग
एक दिन पहले ही विश्व वोक्कालिगा महासम्स्तना मठ के संत कुमार चंद्रशेखररत्ना स्वामीजी ने डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की पैरवी की थी। उन्होंने बेंगलुरु के संस्थापक केम्पेगौड़ा की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री शिवकुमार की मौजूदगी में ही अपनी मांग रख दी थी।

तीन अतिरिक्त डिप्टी सीएम की मांग पर पहले से ही जारी है चर्चा
शिवकुमार दक्षिण कर्नाटक की प्रभावशाली वोक्कालिगा समाज से ही आते हैं। उनकी कर्नाटक सरकार और कांग्रेस पार्टी में अहमियत इतनी है कि वे प्रदेश अध्यक्ष होने के साथ-साथ एकमात्र उपमुख्यमंत्री भी हैं। लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद पार्टी में लिंगायत, अनुसूचित जाति/जनजाति और मुसलमानों में से तीन अतिरिक्त डिप्टी सीएम बनाने की मांग ने भी जोर पकड़ी हुई है।

विधानसभा चुनावों के बाद से ही डीके शिवकुमार की रही है दावेदारी
पिछले साल जब मई में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी बड़ी बहुमत से जीती थी तो मुख्यमंत्री तय करने में लंबा वक्त लग गया था। इसकी वजह ये थी कि इस पद को लेकर सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार में जबर्दस्त प्रतियोगिता बताई गई। बाद में कांग्रेस आलाकमान ने शिवकुमार को किसी तरह से मना लिया और सिद्दारमैया को कुर्सी सौंप दी।

लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को नहीं मिली सफलता
तब ऐसी भी चर्चा थी कि दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल तक के लिए सीएम की कुर्सी पर डील करवाई गई है। हालांकि, पार्टी की ओर से कभी भी इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं की गई। वैसे कई ऐसे मौके आए जब डीके ने अपनी इच्छा जाहिर की है और सिद्दारमैया भी अपनी कुर्सी बचाने के लिए लोकसभा चुनावों में मतदाताओं से ज्यादा से ज्यादा सीटों पर जिताने की मांग कर चुके हैं। अलबत्ता कर्नाटक के मतदाताओं ने दोनों को ही झटका दे दिया है।

कांग्रेस के पास क्या हैं विकल्प?
कांग्रेस के पास विकल्प कम हैं। पार्टी लोक-लुभावन वादों पर चुनाव जीतकर आई है। उसके खिलाफ बीजेपी जैसी मजबूत विपक्ष है। ऐसे में उसके पास सीएम और डिप्टी सीएम के मुद्दों को दुरुस्त करने के विकल्प कम हैं। जरा भी राजनीतिक नासमझी सरकार को संकट में ला सकती है।

वैसे कांग्रेस के अंदर एक वर्ग में यह भी चर्चा है कि तीन अतिरिक्त उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे नेताओं के पीछे खुद मुख्यमंत्री हैं, जो इसके आधार पर शिवकुमार पर शिकंजा कसे रखना चाहते हैं, ताकि उनके कार्यकाल के 2.5 साल पूरे होने के बाद वह उनकी कुर्सी के लिए खतरा न पैदा कर सकें। (इनपुट-पीटीआई)

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