टीपू सुल्तान जयंती समारोह पर रोक लगाने से कर्नाटक HC का इनकार
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का कहना है कि इस बार भी टीपू जयंती पिछली बार की तरह 10 नवम्बर को मनाया जाएगा
नई दिल्ली। कर्नाटक हाई कोर्ट ने अठारहवीं सदी के महान शासक टीपू सुल्तान की जयंती पर आयोजित होने वाले समारोह पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कुर्ग के एक किसान की तरफ से एक याचिका कर्नाटक हाईकोर्ट में दायर की गई थी, जिसमें अपील की गई है कि 10 नवंबर को होने वाले टीपू जयंती समारोह पर रोक लगाई जाए। कर्नाटक सरकार हर साल 10 नवंबर को टीपू जयंती काआयोजन करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के मुताबिक टीपू स्वतंत्रता सेनानी थे और उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

दरअसल, कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार की तरफ से पिछले साल पहली बार टीपू जयंती मनाने का फैसला किया गया था। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पहल पर पहले समारोह के दौरान कुर्ग में हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें दो लोगों की जान चली गई थी। आरएसएस का आरोप है कि टीपू ने बड़े पैमाने पर मालाबार इलाके में धर्म परिवर्तन कराया था, ऐसे में टीपू जयंती नहीं मनाई जानी चाहिए।
आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख वी. नागराज ने कहा कि अंग्रेज़ों और मुस्लिम इतिहासकारों ने इसका वर्णन किया है कि टीपू ने बड़े पैमाने में हिंदुओं और ईसाईयों का धर्म परिवर्तन किया। इतना ही नहीं वो एक निरंकुश शासक था. ऐसे में संघ परिवार सिद्धारमैया सरकार के इस फैसले का विरोध करता है।
वहीं, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का कहना है कि इस बार भी टीपू जयंती पिछली बार की तरह 10 नवम्बर को मनाया जाएगा। वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना है कि आरएसएस के इशारे पर कांग्रेस नहीं चलेगी। जब आरएसएस गोडसे दिवस मना सकती है तो टीपू सुल्तान दिवस मनाने में क्या हर्ज है?












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