'भारत में 47 लाख कोरोना से मौत' WHO के दावे पर भड़के कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री, जानें क्या कहा?
'भारत में 47 लाख कोरोना से मौत' WHO के दावे पर भड़के कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री, कहा-बिना वैज्ञानिक प्रमाण के...
बेंगलुरू 7 मई: भारत के कोविड-19 की मौत पर वैश्विक स्वास्थ्य निकाय विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट पर चल रहे विवाद के बीच कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। डब्ल्यूएचओ ने दावा किया है कि भारत में कोरोना से 5 लाख नहीं बल्कि 47 लाख मौतें हुई हैं। डब्ल्यूएचओ के इस दावे में कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर भड़क गए हैं और उन्होंने आरोप लगाया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बिना किसी वैज्ञानिक प्रमाण और तर्कसंगत तर्क के कहा है कि भारत में कोविड-19 के कारण होने वाली मौतों की संख्या, जो दर्ज की है वो वास्तविक संख्या नहीं है।

'भारत में हर मौत को वैज्ञानिक रूप से दर्ज किया गया...'
कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर ने कहा, इस देश में हर मौत को वैज्ञानिक रूप से दर्ज किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि भारत में हर मौत सबसे खंडित तरीके से दर्ज की जाती है। एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, "डब्ल्यूएचओ ने बिना किसी वैज्ञानिक प्रमाण और तर्कसंगत तर्क के कहा है कि भारत में कोविड-19 के कारण दर्ज मौतों की संख्या वास्तविक संख्या नहीं है। यहां मौजूद सभी स्वास्थ्य मंत्रियों ने इसकी निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है।"
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के सुधाकर बोले- हम अपनी संख्या पर कायम हैं
के सुधाकर ने कहा, "हम अपनी संख्या पर कायम हैं क्योंकि इस तरह की प्रथा और आंकड़े भारत ने हमेशा अपनाए हैं। इस देश में हर मौत को वैज्ञानिक रूप से दर्ज किया गया है। हर मौत भारत में सबसे खंडित तरीके से दर्ज की जाती है।"

'डब्ल्यूएचओ के अनुमान त्रुटिपूर्ण हैं...'
इससे पहले शुक्रवार (06 मई) को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) के सम्मेलन में एक प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन के भारत में 4.7 मिलियन कोरोना मौतों के अनुमान पर कड़ी आपत्ति जताई गई थी। गुजरात के केवड़िया में 14वें केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में सम्मेलन के दौरान कोरोना मौतों के संबंध में डब्ल्यूएचओ के मामले को उठाया गया था। सूत्रों ने आगे कहा कि डब्ल्यूएचओ के अनुमान त्रुटिपूर्ण हैं और यह अनुमान भारत के लिए अस्वीकार्य हैं।












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