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नहीं काम आया भाजपा का 'तुरूप का इक्‍का', ऐन वक्‍त पर पलट गई पूरी बाजी

By Ankur Kumar Srivastava
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    बेंगलुरु। पिछले चार दिनों से कर्नाटक में जारी 'नंबर गेम' आज उस वक्‍त समाप्‍त हुआ जब बीजेपी के सीएम बीएस येदुरप्पा ने बहुमत परीक्षण से पहले ही इस्तीफा दे दिया। येदुरप्‍पा के इस्‍तीफे के साथ ही यह भी साफ हो गया कि कर्नाटक में सत्ता की बागडोर कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के हाथ में होगी। ऐसा नहीं कि बीजेपी ने बहुमत साबित करने में कोई भी कसर छोड़ी हो लेकिन ऐन वक्‍त पर उसके सभी समीकरण फेल हो गए। बीजेपी के तुरूप का इक्‍का भी काम नहीं आया। आपको बता दें कि विधानसभा में बहुमत परीक्षण के लिए प्रोटेम स्‍पीकर के रूप में केजी बोपैया की नियुक्ति की गई थी। केजी बोपैया बीजेपी के करीबी माने जाते हैं। अगर गेंद बोपैया के पाले में आती तो कांग्रेस के लिए जीत की उम्‍मीद खत्‍म हो जाती। तो आईए आपको विस्‍तार से बताते हैं कि बोपैया को लाने के पीछे क्‍या थी गणित

    इस खास प्‍लान के तहत आए थे बोपैया लेकिन वो भी फेल

    इस खास प्‍लान के तहत आए थे बोपैया लेकिन वो भी फेल

    वैसे तो सबसे अनुभवी विधायक को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाता है। कर्नाटक के राज्यपाल ने पांच बार के विधायक केजी बोपैया को यह ज़िम्मेदारी दी थी। कांग्रेस-जेडीएस ने इस पर ऐतराज किया लेकिन बीजेपी का कहना था कि बोपैया दस साल पहले 2008 में भी स्पीकर रह चुके हैं। तब उन्होंने येदियुरप्पा को विश्वास मत हासिल करने में मदद दी थी! दरअसल, बीजेपी इसमें फायदा देख रही थी।अगर प्रोटेम स्पीकर के बजाए स्पीकर की अध्यक्षता में विश्वास मत की बात होती तो सबसे पहले तो स्पीकर का ही चुनाव कराना होता और उसी में पता चल जाता कि आंकड़े किस के साथ हैं। साथ ही टाई होने पर प्रोटेम स्पीकर वोट डाल सकते थे। और इस बात की पूरी आशंका थी की बोपैया का वोट बीजेपी की तरफ ही होता।

    जान लीजिए बोपैया के बारे में कुछ खास बातें

    जान लीजिए बोपैया के बारे में कुछ खास बातें

    केजी बोपैया का पूरा नाम कोम्बारना गणपति बोपैया है। उन्होंने विराजपेट विधानसभा से जीत हासिल की है। इससे पहले भी वो तीन बार इसी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे हैं। वह कर्नाटक की राजनीति में अलग पहचान रखने वाले 'वोक्कालिगा' समाज से ताल्लुक रखते हैं। बोपैया 2009 में हुए चुनावों के बाद भी प्रोटेम स्पीकर रहे थे। इस चुनावों में भाजपा को जीत हासिल हुई थी। सरकार बनने के बाद वो विधानसभा के स्पीकर चुने गए। केजी बोपैया बचपन से ही संघ परिवार से जुड़े रहे हैं। कॉलेज के दौरान वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के सदस्य भी रहे। उन्होंने बीएससी की डिग्री के बाद वकालत की पढ़ाई की। आपातकाल के दौरान कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था, उनमें से वो भी एक थे।

    येदुरप्‍पा के खासा करीबी रहे हैं बोपैया

    येदुरप्‍पा के खासा करीबी रहे हैं बोपैया

    बोपैया बीएस येदियुरप्पा के नजदीकी माने जाते हैं। अवैध खनन मामले में साल 2010 में जब भाजपा के विधायक अपनी ही सरकार का विरोध कर रहे थे, तब बतौर स्पीकर बोपैया ने 11 बागी विधायकों और 5 निर्दलीय विधायक को अयोग्य घोषित कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने बोपैया के इस फैसले को गलत ठहराया था।

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    English summary
    Karnataka Floor Test: How KG Bhopaiah game didn't work this time for BJP.

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