Karnataka Elections 2018: 10 साल, तीन चुनाव, कर्नाटक में कैसे छाया भगवा रंग
नई दिल्ली। मंगलवार को भाजपा के प्रदर्शन में 2008 वाला आईना देखने को मिला। जब उसने पहली बार कर्नाटक में अपनी सरकार बनाई थी। इन दोनों ही चुनावों में पार्टी को मुंबई, कोस्ट और सेंट्रल कर्नाटक से बड़ा जनाधार प्राप्त हुआ था। हालांकि 2013 में कांग्रेस ने बीजेपी की फूट का फायदा उठाया और उसका राज्य से सफाया कर दिया। वहीं जेडीएस 2008 के चुनाव में दक्षिण कर्नाटक में किसानों और शक्तिशाली वोक्कालिंगा समुदाय के बीच अपने समर्थन को मजबूत करने में कामयाब रही।

कांग्रेस का वोट शेयर ज्यादा फिर भी पीछे
अब 10 साल बाद कर्नाटक में जीत मार्जिन नीचे आ गया है क्योंकि बीजेपी, जेडी (एस) और कांग्रेस के बीच प्रतिद्बंदता काफी तेज हो गई है। 2018 में जेडीएस ने दक्षिणी कर्नाटक में बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। वहीं कांग्रेस राज्य में दूसरे नंबर पर रही तो उधर वाकी पूरे कर्नाटक पर बीजेपी का कब्जा हो गया। अगर जीत के अंतर की बात करें तो कांग्रेस का इन चुनावों में वोट शेयर बीजेपी से 1.8 प्रतिशत ज्यादा रहा लेकिन भाजपा 104 के आंकड़े पर पहुंच गई और कांग्रेस 78 पर अटक गई। इससे ये बात तो साफ हो जाती है कि बीजेपी अपने वोट शेयर एकजुट है।

बीजेपी के पक्ष में बाजार के भी संकेत
राजनीतिक स्थिरिता को देखते हुए और 2019 के लोकसभा चुनावों में सत्ता में कौन वापसी कर रहा इसके संकेतों के साथ बाजार ने तालमेल बैठा लिया है। आप यह साफ तौर पर देखने को मिला था कि कर्नाटक में मतगणना के दौरान भाजपी की सीटों की स्थिति बाजार पर किस तरह का असर डाल रहीं थी। मंगलवार को सुबह त्रिशंकु विधानसभा की आशंका के चलते 9.15 पर बाजार सपाट खुला था। लेकिन जैसे-जैसे बीजेपी कांग्रेस पर बढ़त बनाती चली गई । बाजार में उछलता चला गया। 9.27 बजे बाजारा सोमवार को जिस स्तर पर बंद हुआ था उसके मुकाबले 250 अंको उपर चला गया।

बीजेपी को बहुमत ना मिलने असर बाजार दिखा
जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ती गई बाजार में तीन सौ अंकों का उछाल आ गया। जब बीजेपी ने रुझानों में 100 के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार किया तो सेंसेक्स 10.15 मिनट पर 437 अंकों बढ़त पर कारोबार करने लगा। शाम होते-होते जब बीजेपी की सीटें 104 पर अटक गई और लगने लगा कि कांग्रेस और जेडीएस मिलकर सत्ता में आ रहे हैं तो सेंसेक्स 12 अंक गिरकर 35,543 के स्तर पर बंद हुआ।












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