Karnataka Election: बीजेपी को अपने गढ़ 'उत्तरी कर्नाटक' में भी बड़ा झटका, लिंगायत समुदाय की दूरी बनी वजह!
Karnataka Election Result: कर्नाटक में बीजेपी की सत्ता से रवानगी हो गई है। ऐसे में बीजेपी को अपने गढ़ 'उत्तरी कर्नाटक' में भी बड़ा झटका लगा है।

कर्नाटक में बीजेपी का सूपड़ा साफ हो गया है। कांग्रेस 130 से ज्यादा सीटें जीतकर सरकार बनाने जा रही है। विकास और मोदी लहर के बावजूद जनता ने बीजेपी को दरकिनार कर दिया। इस बीच उत्तरी कर्नाटक (North Karnataka) के 7 जिलों में कांग्रेस पार्टी की मिली भारी जीत को बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
2018 में जीती थी 52 सीटें
उत्तरी कर्नाटक में 13 जिलों और 90 विधानसभा सीटों के साथ कित्तूर कर्नाटक (मुंबई कर्नाटक) और कल्याण कर्नाटक (हैदराबाद कर्नाटक) क्षेत्र शामिल हैं। यहां 2018 में भाजपा के पास 52 सीटें, जबकि कांग्रेस और जेडीएस के पास 32 और 6 सीटें थी।
लिंगायत समुदाय, जो परंपरागत रूप से भाजपा का कट्टर समर्थक रहा है, जिसके प्रभाव में बेलगावी, उत्तर कन्नड़, हावेरी, गदग, विजयपुरा, बागलोकोट और धारवाड़ के क्षेत्र आते, वहां कांग्रेस को समर्थन मिला है।
हालांकि भाजपा से कांग्रेस में आने वाले पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार अपनी हुबली-मध्य धारवाड़ सीट नहीं बचा पाए। भाजपा से उनके जाने को लिंगायत समुदाय द्वारा विरोध के रूप में देखा गया। इसके अलावा लिंगायतों के अखिल भारतीय वीरशैव समुदाय ने खुले तौर पर कांग्रेस पार्टी का समर्थन किया, जिससे पंजे को अहम बढ़त मिली।
कई दिग्गजों ने गंवाई सीट
इधर, एक और प्रभावशाली लिंगायत नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी, जिन्होंने कांग्रेस के लिए भाजपा छोड़ दी थी, उन्होंने बेलगावी जिले के अथानी में अपनी पारंपरिक सीट बरकरार रखी। जिसके बाद ऐसा लगता है कि इन हाई-प्रोफाइल नेताओं के दलबदल का असर उत्तर कर्नाटक में भाजपा पर पड़ा है, जो कई सालों से पार्टी का गढ़ रहा था। नतीजतन इस हार के बाद भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को कई सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
उत्तरी कर्नाटक सत्ता की चाबी
दिलचस्प बात यह भी है कि उत्तरी कर्नाटक में 50 से ज्यादा सीटें हासिल करने वाली पार्टी आमतौर पर राज्य में सरकार बनाती है। 2013 में कांग्रेस ने 59 सीटें जीतीं और सत्ता संभाली, जबकि 2018 में भाजपा ने 52 सीटें जीतीं, लेकिन कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन सत्ता में आया। इसके बाद 2019 में, कांग्रेस और जद (एस) के कई विधायकों के पार्टी में शामिल होने के बाद भाजपा ने अपनी सरकार बनाई।












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