कर्नाटक में BJP-JDS के मिलते ही बुरी तरह से घिरी कांग्रेस, सियासी संकट से कैसे उबरेगी सिद्दारमैया सरकार?
कावेरी जल संकट इस बार कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के लिए बहुत बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुकी है। सिद्दारमैया सरकार के लिए यह मुद्दा फिलहाल आगे कुआं, पीछे खाई जैसा हो गया है। विपक्षी दलों को उसकी मुश्किलों का अंदाजा है, इसलिए वह इस मुद्दे को हाथ से निकलने देने के लिए तैयार नहीं है। ऊपर से इसी मुद्दे पर 26 सितंबर यानी मंगलवार को बेंगलुरु बंद ने कांग्रेस सरकार का संकट और बढ़ा दिया है।
दिलचस्प बात ये है कि यह मुद्दा ऐसे समय में गरम हुआ है, जब 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए बीजेपी और जेडीएस ने कर्नाटक में हाथ मिला लिया है। कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की वजह से कांग्रेस बुरी तरह से बैकफुट पर है। पार्टी जिस तरह की राजनीति विरोधी दलों की सरकारों के खिलाफ करती है, वही राजनीति कर्नाटक में उसके लिए गले की फांस बनी है।

सुप्रीम कोर्ट ने अथॉरिटी के फैसले में दखल से किया है इनकार
क्योंकि, मुद्दा सीधे किसानों की भावनाओं और वास्तविक संकट से जुड़ा हुआ है। दरअसल, कावेरी वॉटर मैनेजमेंट अथॉरिटी (CWMA) ने कर्नाटक को 26 सितंबर तक 5,000 क्यूसेक कावेरी जल तमिलनाडु को जारी करने का आदेश दे रखा है। यह अथॉरिटी दोनों राज्यों के बीच कावेरी जल विवाद का निपटारा करती है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सीडब्ल्यूएमए की ओर से जारी आदेश पर दखल देने से मना कर दिया था। लिहाजा, कर्नाटक सरकार के लिए पड़ोसी राज्य के लिए उतना पानी छोड़ना बाध्यकारी है।
जहां कांग्रेस का हुआ शानदार प्रदर्शन, वही बना आंदोलन का केंद्र
लेकिन, इसकी वजह से कर्नाटक के किसानों में भारी नाराजगी है। वह राज्य में विभिन्न जगहों पर विरोध कर रहे हैं। कर्नाटक में पहले से ही कम बारिश के चलते पानी का अभाव बताया जा रहा है। शनिवार को उन्होंने मांड्या में बंद का आयोजन किया, जिसका बीजेपी और जेडीएस दोनों ने समर्थन किया था। मांड्या पुराने मैसुरू का क्षेत्र है, जहां इस साल हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया है।
बीजेपी-जेडीएस गठबंधन को मिल गया बड़ा मुद्दा
दिलचस्प संयोग ये है कि जिस दिन सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया, उसी दिन जेडीएस-बीजेपी गठबंधन पर मुहर लगी। पूर्व सीएम और जेडीएस नेता कुमारस्वामी ने उसी दिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से दिल्ली में मुलाकात की थी।
कावेरी जल संकट पर बीजेपी हो चुकी है पूरी तरह से ऐक्टिव
शनिवार को कावेरी जल संकट को लेकर विरोध प्रदर्शन के लिए पूरी बीजेपी बेंगलुरु के सड़कों पर उतरी हुई थी। इसमें पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा खुद भी शामिल थे। उन्होंने तो कावेरी जल संकट को हल करने में नाकाम रहने के लिए कांग्रेस सरकार से इस्तीफे तक की मांग कर डाली।
जेडीएस का किसानों में बड़ा जनाधार
कावेरी के पानी का मामला आगे भी खूब उबलने के आसार हैं। इसी को देखते हुए कुमारस्वामी मांड्या स्थित केआरएस डैम का भी दौरा कर आए हैं, ताकि पानी की वास्तविक स्थिति देख सकें। अकेले इस डैम से बेंगलुरु के 70% पानी की जरूरतें पूरी होती हैं। गौरतलब है कि जेडीएस मूलरूप से किसानों के जनाधार वाली ही पार्टी है और पुराने मैसुरू के इलाके में उसका काफी प्रभाव रहा है।
कांग्रेस पर तमिलनाडु की सहयोगी को खुश करने की कोशिशों के आरोप
बीजेपी-जेडीएस के नजरिए से कावेरी जल संकट अभी उनके लिए सुविधाजनक सियासत साबित हो सकती है। क्योंकि, कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों जगहों पर विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया की सरकारें हैं। कर्नाटक में कांग्रेस सत्ता में है तो तमिलनाडु में वह सत्ताधारी डीएमके की सहयोगी है। यही वजह है कि बीजेपी-जेडीएस के नेता कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर तमिलनाडु को खुश करने के लिए पानी छोड़ने का आरोप लगा रहे हैं।
विधानसभा चुनावों के परिणाम से मायूस बीजेपी को मिला बड़ा मौका
कर्नाटक में 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने 28 में से 25 सीटें खुद जीती थी और एक पर उसकी सहयोगी को कामयाबी मिली थी। विधानसभा चुनाव के परिणामों ने उसके दिल की धड़कनें बढ़ा रखी हैं और जेडीएस के साथ चुनावी गठबंधन उसी का नतीजा है। लिहाजा, कावेरी जल संकट उसे कांग्रेस सरकार को घेरने के लिए तोहफे के रूप में मिला है, जो प्रदेश की जनता के लिए संकट के साथ-साथ भावनात्मक मसला भी रहा है।
बीजेपी नेता सीटी रवि ने ईटी को बताया है, 'कर्नाटक की जनता INDI (इंडी) एलायंस की कीमतें चुका रही है। कर्नाटक कांग्रेस, तमिलनाडु और इंडी एलायंस के फायदे के लिए अपने राज्य के हितों को नजरअंदाज कर रही है।'
इन सबके बीच मंगलवार को बुलाए गए बेंगलुरु बंद को जो अप्रत्याशित समर्थन मिल रहा है, उसने चार महीने पुरानी सिद्दारमैया सरकार के लिए भारी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।












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