कर्नाटक में कांग्रेस की सहयोगी क्यों हुई बागी? दलित-आदिवासियों के साथ कर दिया कैसा खेल?
Karnataka Politics: कर्नाटक सरकार के 'ग्रह गोचर' लगता है कि सही नहीं चल रहे हैं। एक विवाद खत्म भी नहीं होता कि दूसरा विवाद सामने आ जाता है। लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली हार के बाद से ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसकी वजह से कांग्रेस की सिद्दारमैया सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा है।
मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को मैसूर में पत्नी को मुआवजे के तौर पर मिली बेशकीमती जमीन को लेकर पहले से ही सफाई देनी पड़ रही है। अब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आवंटित फंड के साथ 'हेरफेर' करने के आरोप लग रहे हैं। कांग्रेस की दिक्कत ये है कि इस मसले पर उसकी एक सहयोगी भी आक्रामक है और उसने अपना समर्थन भी वापस खींच लिया है।

एससी-एसटी योजना का फंड गारंटी पूरा करने पर कुर्बान!
कर्नाटक सरकार ने फैसला किया है कि वह 2023 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ओर से दी गई पांच गारंटियों वाले वादे को पूरा करने के लिए अनुसूचित जाति योजना और अनुसूचित जनजाति उप-योजना (SCPTSP) के लिए आवंटित फंड का इस्तेमाल करना जारी रखेगी।
दलित संघर्ष समिति ने सड़कों पर उतरने का किया एलान
सिद्दारमैया सरकार के इस फैसलो को विपक्षी बीजेपी अदालत में चुनौती देने की योजना बनाने में जुट गई है। वहीं कांग्रेस की सहयोगी दलित संघर्ष समिति (DSS) तो इससे इतनी नाराज है कि उसने इसके विरोध में सड़कों पर उतरने की बात कह दी है।
विधानसभा और लोकसभा चुनावों में दिया था साथ, अब समर्थन किया समाप्त
समिति से जुड़े लोगों ने विधानसभा और लोकसभा चुनावों में खुलकर कांग्रेस का साथ दिया है। लेकिन, अब आरोप लगा रही है कि पार्टी एससी और एसटी के लिए 'दिल खोलकर' काम नहीं कर रही है, इसलिए उसने अपना समर्थन खत्म करने की भी घोषणा कर दी है। डीएसएस के इंदुधर होन्नापुरा ने कहा है, 'एससीपीटीएसपी फंड को डायवर्ट करना सरकार की ओर से लिए गए एकतरफा फैसलों का उदाहरण है।'
3,900 करोड़ रुपये ज्यादादेकर 14,283 करोड़ रुपए गारंटियों के लिए किया डायवर्ट
पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री ने कहा था कि उनकी सरकार ने इस साल एससीपीटीएसपी के लिए 39,121 करोड़ रुपए निर्धारित किए हैं, जो कि पिछले साल से 3,900 करोड़ रुपये ज्यादा है। क्योंकि, सरकार ने इन समुदायों के लिए बजट परिव्यय 24.1% रखने का फैसला किया है।
लेकिन, इस फंड में से 14,283 करोड़ रुपए का इस्तेमाल पांच गारंटियों के लिए करने के निर्णय ने बेंगलुरू से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में गर्माहट ला दी है। बीजेपी इसे 'गबन' बता रही है।
भाजपा फंड डायवर्ट करने को बता रही है 'गबन'
बीजेपी एमएलसी चलावाडी नारायणस्वामी ने आरोप लगाया है, 'बीजेपी अदालत का दरवाजा खटखटाने पर विचार कर रही है, क्योंकि इन वंचित समुदायों के कल्याण के लिए विशेष रूप से निर्धारित एससीपीटीएसपी फंड को दूसरी दिशा में डायवर्ट करने का फैसला करके इस का दुरुपयोग किया जा रहा है।'
सरकार का दावा-पहले भी हो चुका है ऐसा
हालांकि, कर्नाटक सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का दावा है कि एससीपीटीएसपी के फंड को डायवर्ट करने जैसा कदम कोई पहली बार नहीं हो रहा है और पहले की सरकारों में भी हो चुका है। एक सरकारी अधिकारी का कहना है, 'एससीपीटीएसपी एक्ट के तहत सरकारी फंड का एक हिस्सा एससी और एसटी समुदाय के खास विकास पर खर्च कर सकती है। पहले भी हुआ है, जिसमें भाग्यलक्ष्मी योजना भी शामिल है, जिसमें बालिकाओं की बीमा से लेकर, छात्राओं को मुफ्त में साइकिल देने की योजना शामिल है।'
एक हाथ से देकर, दूसरे हाथ से वापस ले रही है सरकार-बीजेपी
लेकिन, बीजेपी नेता ने कहा, 'यह दावा करके कि फंड का इस्तेमाल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों पर किया जा रहा है, फंड को री-डायरेक्ट करने का संकल्प अपने आप में यह दिखाने की तरह है कि इन समुदायों के लिए निर्धारित धन का उपयोग उनके लिए ही किया जा रहा है, जबकि अन्य समुदायों को इसके पूरक लाभ मिल रहे हैं। यह उसी तरह से है कि एक हाथ से देकर, दूसरे हाथ से ले लिया जाए।'
दलितों और आदिवासी समुदाय से जुड़ा यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में जिला और तालुक पंचायतों के चुनाव होने वाले हैं।












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