Karnataka By Election Results: सफेद सफारी सूट में नजर आने वाले येदियुरप्पा का चला जादू, जानिए खास बातें

बेंगलुरु। कर्नाटक में आज 15 सीटों पर हुए उपचुनावों की मतगणना जारी है, 6 दिसंबर को 15 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के रुझानों में बीजेपी बड़ी जीत की तरफ बढ़ती दिख रही है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक बीजेपी 12 सीट, कांग्रेस 2 और 1 सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी जीत चुके हैं, जबकि जेडीएस का खाता भी नहीं खुला है, उपचुनाव में भारी जीत के बाद सीएम येदियुरप्पा ने कहा, 'मैं खुश हूं कि इतना अच्छा जनाधार मिला, अब बिना किसी दिक्कत के हम राज्य में एक स्थायी और जनहितकारी सरकार दे सकते हैं।'

जीतने वाले 12 प्रत्याशियों में से 11 को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा

जीतने वाले 12 प्रत्याशियों में से 11 को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा

मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि जीतने वाले 12 प्रत्याशियों में से 11 को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा, मैंने रानीबेन्नूर से जीते बीजेपी प्रत्याशी से वादा नहीं किया था,11 मंत्री बनाने में कोई समस्या नहीं है, मैं अगले 3-4 दिनों में दिल्ली जाऊंगा और अंतिम रूप दूंगा।

आज एक बार फिर से येदियुरप्पा कर्नाटक में बीजेपी के हीरो बन गए हैं, चलिए जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें

चावल मिल में क्लर्क थे बीएस येदियुरप्पा

चावल मिल में क्लर्क थे बीएस येदियुरप्पा

चावल मिल के क्लर्क और एक किसान नेता से आगे बढ़कर दक्षिण में पहली बार भाजपा की सरकार के रूप में कमल खिलाने वाले बीएस येदियुरप्पा का जीवन संघर्षों से भरा रहा है, उनका जन्म 27 फरवरी 1943 को राज्य के मांड्या जिले के बुकानाकेरे में सिद्धलिंगप्पा और पुत्तथयम्मा के घर हुआ था। वो 4 साल के ही थे जब उनकी मां का देहांत हो गया। मां के जाने के बाद पिता ने ही उनकी जिम्मेदारी संभाली। पढ़ाई के साथ-साथ वो किसान के तौर पर खेतों के काम करते थे। फिर बीए पास करने के बाद उन्होंने चावल मिल के क्लर्क की नौकरी की, लेकिन वहां मन नहीं लगा तो नौकरी छोड़कर हार्डवेयर की दुकान खोल ली, इसी दौरान वो संघ के करीब आएं और उन्होंने संघ ज्वाइन कर लिया।

 लिंगायत समुदाय

लिंगायत समुदाय

साल 1972 में उन्हें शिकारीपुरा तालुका जनसंघ का अध्यक्ष चुना गया और इस तरह उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया, साल 1977 में जनता पार्टी के सचिव पद पर काबिज होने के साथ ही राजनीति में उनका कद और बढ़ गया। 1975 में इमरजेंसी के दौरान उन्हें 45 दिनों के लिए जेल भी जाना पड़ा।

लिंगायत समुदाय

लिंगायत समुदाय से ताल्लुक रखने वाले येदियुरप्पा साल 1983 में पहली बार विधायक बने। उन्होंने शिकारीपुरा विधानसभा सीट से पहली बार जीत हासिल की और वो वहां से लगातार 7 बार जीतते आए हैं । पार्टी में 1988 में उन्हें कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया और तब से लेकर अब तक वो तीसरी बार पार्टी की कमान संभाल रहे हैं। 1994 के विधानसभा चुनाव के बाद वे विपक्षी दल के नेता बने। साल 2008 में बीजेपी ने येदियुरप्पा के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा और पार्टी को बड़ी जीत दिलाई।

'ऑपरेशन लोटस'

'ऑपरेशन लोटस'

येदियुरप्पा ने साल 2008 के विधानसभा चुनाव में 'ऑपरेशन लोटस' के जरिए कर्नाटक में सत्ता हासिल की थी। 110 सीटें जीतकर वो किंग बन गए थे, यहां आपको बता दें कि हमेशा सफेद सफारी सूट में नजर आने वाले येदियुरप्पा नवम्बर 2007 में जनता दल (एस) के साथ गठबंधन सरकार गिरने से पहले भी कुछ समय के लिए मुख्यमंत्री रहे थे।

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