कर्नाटक विधानसभा चुनाव में 72.67 प्रतिशत हुआ मतदान, जानें क्या टूटा 2018 का रिकार्ड
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए 10 मई को वोटिंग हुई। प्रदेश भर में इस बार 72.67 प्रतिशत वोटिंग हुई।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए 10 मई को पोलिंग हो चुकी है और 13 मई को चुनाव परिणाम घोषित होगा। वहीं वोटिंग के बाद कई टीवी चैनलों ने अपने एग्जिट पोल में कांग्रेस को इस चुनाव में अधिक सीटें मिलने की संभावना जताई है।
वहीं भाजपा जिसके लिए कर्नाटक दक्षिण के राज्याें में एंट्री का दरवाजा है उसको दूसरे नंबर पर सीटें मिलने का अनुमान बताया गया है। एग्जिट पोल के अनुसार कनार्टक में त्रिशंकु विधानसभा आने का अनुमान लगाया है वहीं कुछ ने कांग्रेस को बहुमत मिलने की संभावना जताई है।
जानें किस शहर में सबसे अधिक हुआ मतदान
चुनाव आयोग के अनुसार डाक मतपत्रों और घरेलू मतदान को छोड़कर कुल 72.67 प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं चिक्काबल्लापुर जिले में सबसे अधिक 85.83 प्रतिशत मतदान हुआ। वही वोटिंग के मामले में दूसरे नंबर पर रामनगरम है जहां 84.98 प्रतिशत मतदान हुआ।
जानें 2018 में कितना हुआ था मतदान
बता दें कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा सीटों के लिुए हुए चुनाव में वोटों की गिनती 13 मई को होगी। चुनाव आयोग (EC) ने बुधवार को कहा कर्नाटक ने 2018 के विधानसभा चुनावों में 72.44 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ था। वहीं इस बार उससे थोड़ा अधिक 72.67 प्रतिशत मतदान हुआ। हालांकि अभी इसमें डाक मतपत्रों और घर से बैठ कर जिन मतदाताओं ने वोट दिए वो इसमें शामिल नहीं है।
चुनाव आयोग ने वोटिंग बढ़ाने के लिए किए थे ये प्रयास
याद रहे इस बार के चुनाव में चुनाव आयोग ने मतदाताओं को मतदान करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए काफी मशक्कत की। चुनाव आयोग ने इस चुनाव में थीम आधारित और जातीय मतदान बूथ, और विशेष रूप से महिलाओं द्वारा संचालित पिंक बूथ जैसी कई पहल की थी। थीम आधारित और जातीय मतदान केंद्र - पूरे राज्य में 737 - ने इस कवायद में बहुत रंग डाला। युद्ध
2018 में कर्नाटक में बनी थी त्रिशंकु सरकार
बता दें 2018 में इतनी अधिक प्रतिशत वोटिंग होने के बाद कर्नाटक में त्रिशंकु सरकार बनी थी। पिछली बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा 104 सीटों पर जीत हासिल करने के बावजूद सरकार नहीं बना पाई थी। इसकी वजह थी कि भारतीय जनता पार्टी बहुमत की सीटों से चंद सीटों से पीछे रह गई थी और कांगेस और जेडी एस ने मिलकर त्रिशंकु सरकार बना ली थी।
हालांकि ये देखना रोचक होगा कि अगर राज्य की जनता त्रिशंकु जनादेश की स्थिति उत्पन्न होता है तो पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली जनता दल (सेक्युलर) सरकार बनाने के लिए किंगमेकर बनेगी या किंग बनती है या नहीं।
भाजपा ने पीएम को बनाया है अपना चुनावी चेहरा
ये ही कारण है कि कर्नाटक में 2023 के चुनाव में भाजपा ने मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं रखा और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़कर 38 साल पुराने चुनावी ट्रेंड को तोड़ना चाहा है।
कर्नाटक में रहा है ये ट्रेंड
याद रहे कर्नाटक में ट्रेंड रहा है कि राज्य ने सत्ताधारी पार्टी को कभी वोट नहीं दिया, वहीं कांग्रेस मनोबल बढ़ाने वाली जीत की उम्मीद कर रही है। कांग्रेस की इस उम्मीद और दावे को एग्जिट पोल के परिणामों ने और बढ़ावा दिया है।
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