12 मई को होगा कर्नाटक में चुनाव, 15 मई को आएंगे परिणाम: चुनाव आयोग
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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने आज कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया। कर्नाटक में 224 सीटों के लिए 12 मई को मतदान होगा, जबकि चुनावों का परिणाम 15 मई को आएगा। चुनाव एक चरण में 12 मई को करवाया जाएगा। नामांकन करने की अंतिम तिथि 24 अप्रैल रखी गई है। 26 को स्क्रूटनी की जाएगी, जबकि प्रत्य़ाशी 27 अप्रैल को अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। कर्नाटक में मौजूदा कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार का कार्यकाल 28 मई को पूरा हो रहा है।कर्नाटक में दोनों राष्ट्रीय पार्टियां आमने सामने होंगी। जहां एक ओर राहुल गांधी के लिए यह अग्निपरीक्षा होगी। वहीं अमित शाह अपने विजय अभियान को जारी रखना चाहेंगे।

56 हजार बूथों पर वीवीपैट का इस्तेमाल
चुनाव आयोग ने कहा कि कर्नाटक की सभी 56 हजार बूथों पर वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा। दिव्यांगों और महिलाओं के लिए पोलिंग बूथ पर विशेष इंतजाम किये जाएंगे। इसके साथ ही, 28 मई से पहले सारी प्रक्रियाएं पूरी की जाएगी। चुनावों में इको-फ्रेंडली मेटेरियल का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं चुनाव आयोग ने कहा कि, कमजोर तबके को वोटरो की सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए है। जिससे निष्पक्ष मतदान करवाया जा सके।

सिद्धारमैया सरकार का कार्यकाल 28 मई को पूरा हो रहा है
225 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा का पांच वर्ष का कार्यकाल 28 मई को पूरा हो रहा है। यहां 224 सीट के लिए चुनाव होता है जबकि एक सीट पर एंग्लो-इंडियन समुदाय से सदस्य मनोनित होता है। कर्नाटक में बहुमत के लिए 113 सीटों की जरूरत होती है। राज्य की मौजूदा कांग्रेस सरकार के पास 123 विधायक है, जबकि बीजेपी के पास 43 और जेडीएस के पास 37 विधायक हैं। कांग्रेस पार्टी ने अपना आंतरिक सर्वे किया है, जिसमें उसे 126 सीटें मिलने की उम्मीद की गई है। वहीं इस सर्वे में बीजेपी को 70 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।

कर्नाटक में कुल 4.90 करोड़ वोटर हैं
कर्नाटक में कुल 4.90 करोड़ वोटर हैं। इनमें 19 फीसदी दलित, 16 फीसदी मुस्लिम, 16 फीसदी ओबीसी, 17 फीसदी लिंगायत, 11 फीसदी वोक्कालिगा और 21 फीसदी अन्य समुदाय के लोग आते हैं। 2013 के चुनाव में कांग्रेस को 122 सीटों पर जीत मिली थी। उसका कुल वोट शेयर 36.6 प्रतिशत था। वहीं जेडीएस और भाजपा ने 40-40 सीटें जीती थीं। उनका वोट शेयर क्रमश: 20.2% और 19.9% था। जबकि अन्य के खाते में 22 सीटें गईं थी।

ये 3 बड़े मुद्दे
इस बार के चुनाव में लिंगायत, हिंदुत्व और भ्रष्टाचार तीन सबसे बड़े मुद्दे हैं। जिनके आधार पर दोनों पार्टियां चुनावी मैदान में हैं। कर्नाटक में इन दिनों लिंगायत समुदाय को लेकर घमासान मचा हुआ है। राज्य की सिद्धारमैया सरकार ने लिंगायत-वीरशैव समुदाय को अलग अल्पसंख्यक धर्म का दर्जा देने के लिए केंद्र से सिफारिश की है। वहीं भाजपा ने अभी तक अपनी स्थिति साफ नहीं की है। भाजपा का आरोप सिद्धारमैया सरकार हिंदू विरोधी है, बीते पांच साल में राज्य में 24 संघ कार्यकर्ताओं की हत्या हुई। राहुल गांधी और अमित शाह दोनों ही यहां लिंगायत और दलितों के मंदिरों-मठों में जा रहे हैं। फरवरी के आखिरी हफ्ते में राज्य के दौरे पर आए नरेंद्र मोदी ने सिद्धारमैया सरकार को 'सीधा रुपैया' सरकार कहा था। उन्होंने कहा कि कोई भी काम हो, यहां पैसा ही चलता है। वहीं, कांग्रेस भाजपा की पिछली येदियुरप्पा सरकार पर भ्रष्ट होने का आरोप लगा रही है।
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