Vikram Batra Love Story: शादी से पहले शहीद हो गए थे 'शेरशाह', आज तक गर्लफ्रेंड ने नहीं की शादी
नई दिल्ली, 12 अगस्त: कारगिल युद्ध को 22 साल का वक्त हो गया। उस दौरान अदम्य साहस का परिचय देने वाले कैप्टन विक्रम बत्रा को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके ऊपर 'शेरशाह' नाम से फिल्म बनाई गई, जो आज यानी 12 अगस्त को अमेजन प्राइम पर रिलीज हुई। इस फिल्म में उनकी जांबाजी के साथ लव स्टोरी को दिखाया गया है। वैसे बहुत से लोग इसे फिल्मी कहानी मान रहे, लेकिन विक्रम की रियल लव स्टोरी के बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

आध्यात्मिक व्यक्ति थे विक्रम
शहीद विक्रम बत्रा के पिता गिरिधारी लाल बत्रा की आंखें आज भी बेटे को याद कर नम हो जाती हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि पूरी दुनिया जानती है कि विक्रम कितने वीर थे, लेकिन एक पहलु सबसे छिपा है। उनके अंदर बहुत ज्यादा आध्यात्मिकता भी थी। कारगिल युद्ध में जाने से पहले घर वालों ने उनकी शादी तय की। सोचा था कि उनके आने के बाद तुरंत उनको नए बंधन में बांध देंगे, लेकिन विक्रम वहां से तिरंगे में लिपटकर आए।
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गर्लफ्रेंड ने नहीं की शादी
वहीं फिल्म में विक्रम की जो लव स्टोरी दिखाई गई है, वो भी एकदम सही है। पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान विक्रम की मुलाकात एक लड़की से हुई। पहले तो दोनों दोस्त थे, लेकिन बाद में वो एक-दूसरे से प्यार करने लगे। विक्रम की शहादत के बाद उन्होंने अकेले ही जिंदगी गुजारने का फैसला लिया। विक्रम के पिता के मुताबिक आज उनकी उम्र 40 साल से ज्यादा की हो गई है, लेकिन उन्होंने शादी नहीं की। आज भी वो विक्रम की यादों के साथ जिंदगी गुजार रही हैं।

कियारा आडवाणी निभा रहीं रोल
'शेरशाह' में विक्रम बत्रा का रोल सिद्धार्थ मलहोत्रा निभा रहे हैं, जबकि उनकी रील लाइफ गर्लफ्रेंड कियारा आडवाणी बनी हैं। कुछ दिनों पहले कियारा ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि जब स्क्रिप्ट मिली, तो उनको विक्रम की गर्लफ्रेंड के बारे में पता चला। उनको विश्वास ही नहीं हो रहा कि एक लड़की किसी शख्स से इतना ज्यादा प्यार करती है, जिसने पूरी जिंदगी अकेले रहने का फैसला किया।

साथी को बचाते वक्त लगी गोली
श्रीनगर-लेह हाईवे के ऊपर की चोटियों पर पाकिस्तानी घुसपैठिए कब्जा जमाकर बैठे थे। विक्रम को उन चोटियों को आजाद करवाने का टॉस्क मिला। उनके एक साथी यशपाल शर्मा हमेशा उनके साथ रहते थे। यशपाल के मुताबिक विक्रम लड़ाई के वक्त दुश्मन के बंकर के काफी करीब थे। आमने-सामने की लड़ाई में उन्होंने कई घुसपैठियों को मार गिराया। इस दौरान विक्रम ने उनकी जान भी बचाई, लेकिन वो बुरी तरह घायल हो गए। जब तक उन तक मेडिकल सहायता पहुंचती, वो वीरगति को प्राप्त कर चुके थे। युद्ध खत्म होने के बाद भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया।

'शेरशाह' था कोडनेम
1999 के वक्त भारतीय सेना के पास कम्यूनिकेशन का बेहतरीन साधन था, लेकिन कई बार लाइन इंटरसेप्ट कर ली जाती थी। जिस वजह से कारगिल युद्ध में शामिल सभी अफसरों को कोडनेम दिया गया था। ट्रेनिंग के वक्त से विक्रम शेरशाह शब्द का इस्तेमाल करते थे, जिस वजह से कारगिल में भी उन्हें यही कोड नेम दिया गया। फिल्म का टाइटल इसी कोडनेम पर दिया गया है।









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