Kanwar Order Row: ओवैसी ने लगाए मुसलमानों से नफरत के आरोप, जवाब में बीजेपी ने की जिन्ना से तुलना

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकार ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित ढाबों और रेस्टोरेंट को अपने मालिकों के नाम प्रदर्शित करने का निर्देश दिया है। इस निर्देश पर काफी विवाद हो रहा है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष बीजेपी सरकार पर हमलावर है और उन्होंने इस व्यवहार को भेदभावपूर्ण बताया है।

एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस आदेश की आलोचना करते हुए सरकार पर कई आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरकार का यह रवैया देश में मुसलामानों के प्रति गहरी दुश्मनी को दिखा रहा है।

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एआईएमआईएम प्रमुख ने आदेश की आलोचना करते हुए सोशल मीडिया साइट, एक्स पर एक अंडे की दुकान की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, "यूपी के कांवड़ मार्गों पर डर: यह भारतीय मुसलमानों के प्रति नफरत की सच्चाई है। इस गहरी नफरत का श्रेय राजनीतिक दलों, हिंदुत्व के नेताओं और तथाकथित दिखावटी धर्मनिरपेक्ष दलों को जाता है।"

विपक्ष ने इस रवैये को बताया 'विभाजनकारी'

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के विभाजनकारी उपाय केवल देश को विभाजित करेंगे। उन्होंने एक्स पर लिखा, "कांवड़ यात्रा मार्ग यूपी ने सड़क किनारे ठेले सहित भोजनालयों को मालिकों के नाम प्रदर्शित करने का निर्देश दिया है! क्या यह 'विकसित भारत' का मार्ग है? विभाजनकारी एजेंडे केवल देश को विभाजित करेंगे!"

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने भी इस आदेश की निंदा करते हुए इसे "धर्म की आड़ में राजनीति का नया खेल" बताया। उन्होंने कहा, "यह पूरी तरह से भेदभावपूर्ण और सांप्रदायिक फैसला है और राष्ट्रविरोधी तत्वों को इससे लाभ उठाने का मौका मिलेगा।"

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने भविष्य के लक्ष्यों के बारे में अपनी आशंकाएं व्यक्त कीं। उन्होंने दावा किया कि मुसलमानों के बाद, दलितों को भाजपा सरकार द्वारा भेदभाव का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, "पहले वे (भाजपा) मुसलमानों के अधिकारों को कुचलना चाहते हैं, फिर दलितों और फिर पिछड़ों और अन्य जातियों की बारी आएगी क्योंकि वे एक अलग व्यवस्था बनाना चाहते हैं और उन्होंने यूपी में जो किया वह इस देश के संविधान के खिलाफ है।"

शिवसेना ने राष्ट्रीय एकता पर जताई चिंताएं

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने भाजपा पर ऐसे निर्देशों से राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "अब आप (भाजपा) खाद्य स्टॉल को जाति और धर्म के आधार पर नामपट्टिका लगाने का निर्देश दे रहे हैं? क्या आप देश को बांटना चाहते हैं? इससे आपको कोई लाभ नहीं होगा। आप देश की एकता को तोड़ रहे हैं।"

इस निर्देश के कारण विभिन्न राजनीतिक दलों में गरमागरम बहस छिड़ गई है। अलग-अलग नेताओं ने सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता पर इसके प्रभाव के बारे में चिंता व्यक्त की है। वहीं, भाजपा ने इस फैसले का बचाव करते हे विपक्ष पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है।

भाजपा ने किया इस फैसले का बचाव

पश्चिम बंगाल भाजपा प्रमुख सुकांत मजूमदार ने विपक्ष पर गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाते हुए इन दावों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि पिछली समाजवादी पार्टी सरकारों द्वारा भी इसी तरह की अधिसूचनाएं जारी की गई थीं।

मजूमदार ने कहा, "विपक्ष लोगों को गुमराह कर रहा है और झूठ फैला रहा है। मुलायम सिंह यादव की सरकार के दौरान भी इसी तरह की अधिसूचनाएं जारी की गई थीं और अखिलेश यादव की सरकार ने भी ऐसी अधिसूचनाएं जारी की थीं... यह एक नियमित अभ्यास है और कांवड़ यात्रा तक सीमित नहीं है। कानून के अनुसार नाम पंजीकृत होना चाहिए, किसी की पहचान धर्म से नहीं की जानी चाहिए... मांसाहारी हिंदू मुस्लिम दुकानों पर जाते हैं। पश्चिम बंगाल में, हम ऐसी कई दुकानों पर जाते हैं, जो मुसलमानों द्वारा चलाई जाती हैं। विपक्ष लोगों को बांटने की कोशिश कर रहा है और असदुद्दीन ओवैसी जिन्ना की भूमिका निभा रहे हैं।"

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