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कन्हैया कुमार को CPI में मिला बड़ा प्रमोशन, मिली ये अहम जिम्मेदारी

नई दिल्ली: जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया(सीपीआई) ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। सीपीआई ने हिंदी क्षेत्र में विस्तार के लिए ये फैसला लिया है। कन्हैया को रविवार को कम्युनिस्ट पार्टी में शीर्ष निर्णय लेने वाले राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद में शामिल कर लिया गया। कन्हैया कुमार को पार्टी के वरिष्ठ नेता शमीम फैजी की जगह कार्यकारिणी में शामिल किया गया है। उनके अलावा दो अन्य सदस्यों को भी इसमें जगह दी गई है।

कन्हैया कुमार को मिली बड़ी जिम्मेदारी

कन्हैया कुमार को मिली बड़ी जिम्मेदारी

विख्यात पत्रकार शमीम फैजी के निधन के बाद ये पोस्ट खाली थी। इसके लिए कई दावेदार थे और आखिर में उनके नाम पर सगमति बनी। सीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव सुधाकर रेड्डी ने राष्ट्रीय परिषद की तीन दिवसीय बैठक के बाद डी राजा को पार्टी का नया महासचिव घोषित किया। इसी मीटिंग में कन्हैया कुमार को भी नई जिम्मेदारी सौंपी गई। कई लोग सीपीआई की निर्णय लेने वाली शीर्ष इकाई के फैसले को युवाओं को अपनी तरफ जोड़ने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।

डी राजा बने नए महासचिव

डी राजा बने नए महासचिव

सीपीआई के राज्यसभा सदस्य डी राजा को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) का महासचिव बनाया गया है। सुधाकर रेड्डी ने स्वास्थ कारणों से पद छोड़ा। डी राजा ने महासचिव बनने के बाद कहा कि 'पश्चगामी' ताकतों के खिलाफ पार्टी की लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फासीवादी शासन में संकटपूर्ण दौर से गुजर रहा है। वाम शक्तियां भले ही लोकसभा चुनाव में सीट हार गई हों और संसद में घटकर छोटी ताकत रह गई हों लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम देश में सिमट गए हैं या हमारा वैचारिक एवं राजनीतिक प्रभाव सिकुड़ गया है।

गिरिराज सिंह ने कन्हैया को हराया

गिरिराज सिंह ने कन्हैया को हराया

गौरतलब है कि हाल में संपन्न लोकसभा चुनाव में कन्हैया कुमार को सीपीआई ने बिहार के बेगुसराय से लोकसभा चुनाव में उतारा था। उनके खिलाफ बीजेपी के फायरब्रांड नेता गिरिराज सिंह मैदान में थे। गिरिराज सिंह ने उन्हें करीब 4.19 लाख से भी ज्यादा वोटों के अंतर से हराया था। वहीं कन्हैया कुमार चुनाव के दौरान चर्चा में रहे। उनके समर्थन मे कई गैर राजनीतिक लोगों ने प्रचार किया। कन्हैया को हारने के बावजूद चुनाव में करीब 2.67 लाख वोट मिले।

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